Madhya Pradesh GI Tag List: मध्यप्रदेश लगातार भौगोलिक संकेतक (GI) टैग के क्षेत्र में नई उपलब्धियां हासिल कर रहा है. हाल ही में जबलपुरी मटर, जबलपुर सिंघाड़ा, बुरहानपुर केला, रतलाम के गराड़ू और बालम ककड़ी समेत कई उत्पादों को GI टैग मिलने के बाद प्रदेश की पहचान राष्ट्रीय ही नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी मजबूत हुई है. मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इसे ‘वोकल फॉर लोकल' और ‘आत्मनिर्भर भारत' के विजन को साकार करने की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया है. नए उत्पादों के जुड़ने के बाद मध्यप्रदेश के 30 से ज्यादा उत्पाद और शिल्प कलाएं GI टैग प्राप्त कर चुकी हैं. सीएम का मानना है कि इससे किसानों, शिल्पकारों और उद्यमियों को बेहतर बाजार, उचित मूल्य और नए रोजगार अवसर मिलेंगे.
जबलपुर ने रचा इतिहास
हाल के महीनों में मध्यप्रदेश को जीआई टैग के मोर्चे पर बड़ी सफलता मिली है. नर्मदा अंचल के प्रसिद्ध जबलपुरी मटर और जबलपुर सिंघाड़ा को GI टैग मिलने से कृषि क्षेत्र में नई पहचान बनी है. देश में पहली बार किसी क्षेत्र के मटर और सिंघाड़े को यह मान्यता मिली है. इससे इन उत्पादों को कानूनी सुरक्षा मिलने के साथ-साथ वैश्विक बाजार में अलग पहचान भी प्राप्त होगी.

Madhya Pradesh GI Tag List: जबलपुर का मटर और सिंघाड़ा
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बुरहानपुर केला और मालवा के स्वाद को भी मिली मान्यता
प्रदेश के बुरहानपुर जिले का प्रसिद्ध केला भी अब GI टैग प्राप्त उत्पादों की सूची में शामिल हो गया है. वहीं रतलाम जिले के मालवा अंचल के मशहूर गराड़ू तथा सैलाना क्षेत्र की बालम ककड़ी (बालम खीरा) को भी GI टैग मिला है. यह दोनों उत्पाद लंबे समय से अपनी विशेष गुणवत्ता और स्वाद के लिए पहचाने जाते रहे हैं. गराड़ू मालवा की स्ट्रीट फूड संस्कृति की पहचान है, जबकि बालम खीरा गर्मियों में लोगों की पहली पसंद माना जाता है.

केला किसानों को मिली खुशखबरी.
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मांडू की खुरासानी इमली को मिली अंतरराष्ट्रीय पहचान
धार जिले के ऐतिहासिक नगर मांडू की पहचान माने जाने वाले खुरासानी इमली (बाओबाब फल) को भी GI टैग प्रदान किया गया है. बताया जाता है कि बाओबाब वृक्ष करीब 600 वर्ष पहले अफगानी और अरब व्यापारियों के माध्यम से मांडू पहुंचा था. अब GI टैग मिलने से इससे जुड़े उत्पादों की ब्रांडिंग मजबूत होगी और आदिवासी समुदायों को अतिरिक्त आय के अवसर मिलेंगे.

Madhya Pradesh GI Tag List: मध्य प्रदेश के जीआई टैग प्राप्त उत्पाद
वोकल फॉर लोकल को मिली मजबूती : मुख्यमंत्री
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि प्रदेश की शिल्प कलाओं, कृषि और उद्यानिकी उत्पादों को GI टैग मिलना प्रदेश के लिए गौरव की बात है. उन्होंने किसानों, खाद्य प्रसंस्करण उद्यमियों, स्वयं सहायता समूहों, शिल्पकारों और संबंधित विभागों को इस उपलब्धि के लिए बधाई देते हुए कहा कि इससे स्थानीय उत्पादों को वैश्विक पहचान मिलेगी.
मध्यप्रदेश के इन प्रमुख उत्पादों को मिल चुका है GI टैग
नए उत्पादों के शामिल होने के बाद मध्यप्रदेश में GI टैग प्राप्त उत्पादों और शिल्प कलाओं की संख्या बढ़कर 33 हो चुकी है. इनमें प्रमुख रूप से ये नाम शामिल हैं:
- चंदेरी साड़ी
- महेश्वरी साड़ी एवं फैब्रिक
- धार का बाग प्रिंट
- इंदौर के लेदर टॉयज
- दतिया-टीकमगढ़ बेल मेटल वेयर
- उज्जैन बटिक प्रिंट
- जबलपुर मार्बल क्राफ्ट
- डिंडोरी गोंड पेंटिंग
- वारासिवनी हैंडलूम साड़ी
- ग्वालियर कालीन
- पन्ना हीरा
- डिंडोरी लोहा शिल्प
- बालाघाट चिन्नौर चावल
- रीवा सुंदरजा आम
- शरबती गेहूं
- महोबा देशावरी पान
- नागपुरी संतरा
- कड़कनाथ
- रतलाम सेव
- मुरैना गजक
- कठिया गेहूं
- जावरा लहसुन
- खजुराहो स्टोन क्राफ्ट
- छतरपुर काष्ठ शिल्प
- बैतूल भरेवा मेटल क्राफ्ट
- ग्वालियर स्टोन क्राफ्ट
- ग्वालियर पेपर मैश कला
- जबलपुरी मटर
- जबलपुर सिंघाड़ा
- बुरहानपुर केला
- गराड़ू
- बालम ककड़ी
- खुरासानी इमली

Madhya Pradesh GI Tag List: इन प्रमुख उत्पादों को मिली है खास पहचान
किसानों को मिलेगा सीधा फायदा
GI टैग मिलने के बाद उत्पादों की प्रामाणिकता को कानूनी संरक्षण मिल जाता है. इससे नकली उत्पादों पर रोक लगती है और मूल उत्पाद अधिक मूल्य पर बिकता है. कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि प्रदेश के किसानों को बेहतर दाम मिलेंगे तथा राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार में मांग बढ़ेगी.
रोजगार और उद्योग को भी मिलेगा बढ़ावा
GI टैग का लाभ केवल खेती तक सीमित नहीं रहता. इससे खाद्य प्रसंस्करण उद्योग, पैकेजिंग, कोल्ड स्टोरेज, निर्यात और लॉजिस्टिक्स सेक्टर को भी गति मिलती है. फ्रोजन मटर, सिंघाड़ा आटा, केला आधारित उत्पाद, गराड़ू प्रोसेसिंग और अन्य वैल्यू एडेड उत्पादों के माध्यम से स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा हो सकते हैं.
कई और उत्पाद GI टैग की कतार में
राज्य सरकार और विभिन्न विभाग प्रदेश के अन्य विशिष्ट कृषि और शिल्प उत्पादों को भी GI टैग दिलाने के प्रयास में जुटे हैं. आने वाले वर्षों में मध्यप्रदेश GI टैग प्राप्त उत्पादों के मामले में देश के अग्रणी राज्यों में अपनी स्थिति और मजबूत कर सकता है.
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