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देश में पहली बार एक ही जगह के मटर और सिंघाड़े को मिला GI टैग; जबलपुर ने रचा इतिहास, किसानों को मिलेगा फायदा

जबलपुरी मटर और जबलपुर सिंघाड़ा को GI टैग मिल गया है. देश में पहली बार मटर और सिंघाड़े को यह मान्यता मिली है, जिससे किसानों को बेहतर दाम और वैश्विक पहचान मिलने की उम्मीद है.

देश में पहली बार एक ही जगह के मटर और सिंघाड़े को मिला GI टैग; जबलपुर ने रचा इतिहास, किसानों को मिलेगा फायदा
जबलपुर को बड़ी सौगात, मटर और सिंघाड़े को मिली GI पहचान

Jabalpur News GI Tag: जबलपुर के किसानों और कृषि क्षेत्र के लिए बड़ी खुशखबरी सामने आई है. नर्मदा घाटी की उपजाऊ मिट्टी और विशेष जलवायु में तैयार होने वाले जबलपुरी मटर (Jabalpuri Matar) और जबलपुर सिंघाड़ा (Jabalpur Singhada) को भौगोलिक संकेतक (Geographical Indication) टैग (GI Tag) मिल गया है. इसके साथ ही जबलपुर देश का पहला ऐसा क्षेत्र बन गया है, जहां के मटर और सिंघाड़े को जीआई टैग की मान्यता प्राप्त हुई है. जीआई रजिस्ट्री चेन्नई द्वारा दोनों उत्पादों को आधिकारिक रूप से पंजीकृत किए जाने के बाद अब इन्हें राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विशिष्ट पहचान मिलेगी. इस उपलब्धि से किसानों को बेहतर बाजार, उच्च मूल्य और निर्यात के नए अवसर प्राप्त होंगे, जिससे क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी.

जबलपुर के कृषि उत्पादों को मिली राष्ट्रीय पहचान

जबलपुर के प्रसिद्ध कृषि उत्पाद जबलपुरी मटर और जबलपुर सिंघाड़ा अब आधिकारिक रूप से जीआई टैग प्राप्त उत्पादों की सूची में शामिल हो गए हैं. जीआई रजिस्ट्री, चेन्नई ने दोनों उत्पादों को अपने आधिकारिक जर्नल में पंजीकृत और विज्ञापित कर दिया है. यह मान्यता इस बात का प्रमाण है कि इन कृषि उत्पादों की गुणवत्ता, विशेषता और भौगोलिक विशिष्टता देशभर में अलग पहचान रखती है.

Jabalpur News GI Tag: जबलपुरी मटर को जीआई टैग का पत्र

Jabalpur News GI Tag: जबलपुरी मटर को जीआई टैग का पत्र

देश में पहली बार मटर और सिंघाड़े को मिला GI टैग

जीआई प्रक्रिया से जुड़े विषय विशेषज्ञ और पद्मश्री सम्मानित डॉ. रजनीकांत के अनुसार भारत में पहली बार किसी क्षेत्र के मटर और सिंघाड़े को जीआई टैग दिया गया है. इस उपलब्धि ने जबलपुर को देश के कृषि मानचित्र पर विशेष स्थान दिलाया है. विशेषज्ञों का मानना है कि यह उपलब्धि केवल जबलपुर ही नहीं बल्कि पूरे मध्यप्रदेश के लिए गौरव का विषय है.

Jabalpur News GI Tag: जबलपुर सिंघाड़े को जीआई टैग पत्र

Jabalpur News GI Tag: जबलपुर सिंघाड़े को जीआई टैग पत्र

नर्मदा की मिट्टी और जल से मिलती है विशिष्ट गुणवत्ता

जबलपुरी मटर और जबलपुर सिंघाड़ा अपनी विशेष स्वाद, गुणवत्ता और उत्पादकता के लिए लंबे समय से प्रसिद्ध रहे हैं. कृषि विशेषज्ञों के अनुसार नर्मदा नदी के जल और क्षेत्र की उपजाऊ मिट्टी इन उत्पादों को विशिष्ट गुण प्रदान करती है. यही कारण है कि इनकी मांग स्थानीय बाजार से लेकर अन्य राज्यों तक बनी रहती है. जीआई टैग मिलने के बाद इन उत्पादों की विशिष्ट पहचान को कानूनी संरक्षण भी प्राप्त हो गया है.

किसानों को मिलेगा बेहतर दाम

जबलपुरी मटर पहले से ही केंद्र सरकार की ‘एक जिला-एक उत्पाद' (ODOP) योजना में शामिल है. अब जीआई टैग मिलने से इसकी ब्रांड वैल्यू और बढ़ेगी. विशेषज्ञों का मानना है कि प्रमाणित उत्पाद होने के कारण देश और विदेश के व्यापारी किसानों को बेहतर कीमत देने के लिए प्रोत्साहित होंगे. इससे किसानों की आय में वृद्धि होने की संभावना है.

Jabalpur News GI Tag: जबलपुरी मटर को मिलेगी पहचान

Jabalpur News GI Tag: जबलपुरी मटर को मिलेगी पहचान

नकली ब्रांडिंग पर लगेगी रोक

जीआई टैग मिलने का सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि अब जबलपुरी मटर और जबलपुर सिंघाड़ा नाम का उपयोग केवल अधिकृत उत्पादकों द्वारा ही किया जा सकेगा. इससे नकली उत्पादों और गलत ब्रांडिंग पर रोक लगेगी. असली उत्पाद को बाजार में अलग पहचान मिलेगी और उपभोक्ताओं का भरोसा भी बढ़ेगा.

निर्यात और वैश्विक बाजार के खुलेंगे रास्ते

जीआई टैग प्राप्त होने के बाद दोनों उत्पादों के लिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में अवसर बढ़ने की उम्मीद है. कृषि एवं निर्यात विशेषज्ञों के अनुसार वैश्विक स्तर पर क्षेत्रीय और विशिष्ट कृषि उत्पादों की मांग तेजी से बढ़ रही है. ऐसे में जबलपुरी मटर और सिंघाड़ा विदेशी बाजारों में भी अपनी अलग पहचान बना सकते हैं.

खाद्य प्रसंस्करण उद्योग को मिलेगा बढ़ावा

इस उपलब्धि से केवल किसानों को ही नहीं बल्कि स्थानीय उद्योगों को भी लाभ होगा. फ्रोजन मटर, सिंघाड़ा आटा, प्रोसेस्ड फूड और अन्य वैल्यू एडेड उत्पादों के निर्माण को बढ़ावा मिलेगा. इससे कोल्ड स्टोरेज, पैकेजिंग और फूड प्रोसेसिंग सेक्टर में निवेश बढ़ने की संभावना है.

रोजगार के नए अवसर होंगे सृजित

जीआई टैग के बाद यदि उत्पादन, प्रसंस्करण और निर्यात गतिविधियां बढ़ती हैं तो स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे. विशेषकर युवाओं को कृषि आधारित उद्योगों, लॉजिस्टिक्स, पैकेजिंग और विपणन क्षेत्रों में रोजगार मिलने की संभावना है.

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