मध्य प्रदेश के उज्जैन स्थित सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय एक बार फिर अपने अजीबोगरीब परीक्षा परिणामों को लेकर सवालों के घेरे में आ गया है. विश्वविद्यालय ने एमबीए चौथे सेमेस्टर के एक छात्र को 1600 में से 1604 अंक दे दिए, जिससे उसका कुल परिणाम 100.25 प्रतिशत तक पहुंच गया. वहीं, एमएससी के एक छात्र के रिजल्ट में प्रैक्टिकल के अंक जोड़े बिना ही उसे उत्तीर्ण घोषित कर दिया गया.
1600 में से 1604 अंक, 100.25% बना रिजल्ट
जून 2026 में आयोजित एमबीए चौथे सेमेस्टर की परीक्षा के हाल ही में घोषित परिणामों में एक निजी कॉलेज के छात्र के चारों सेमेस्टर के अंक क्रमशः 431, 393, 398 और 382 दर्ज थे. इनका वास्तविक कुल योग 1604 अंक होता है, लेकिन मार्कशीट में अधिकतम अंक 1600 ही दर्शाए गए. इसके चलते छात्र का परिणाम 100.25 प्रतिशत बन गया, जिससे विश्वविद्यालय की परिणाम प्रणाली पर सवाल खड़े हो गए हैं.
अंक दर्ज ही नहीं किए
इसी तरह, एमएससी सेकंड सेमेस्टर के छात्र अजय सिंह गुर्जर की मार्कशीट में प्रैक्टिकल परीक्षा के अंक दर्ज ही नहीं किए गए. अंक तालिका में स्थान खाली रहने के बावजूद उन्हें पास घोषित कर दिया गया.
विश्वविद्यालय में गड़बड़ियों का पुराना इतिहास
यह पहली बार नहीं है जब इस विश्वविद्यालय की परीक्षा और परिणाम प्रणाली विवादों में आई हो. इससे पहले भी फर्जी सॉल्वर, छात्रों को शून्य अंक मिलने, कॉपी जांच में धांधली और प्रश्नपत्रों में गड़बड़ी जैसे कई मामले सामने आ चुके हैं.
कुलसचिव अनिल शर्मा ने दी सफाई, एजेंसी को चेतावनी जारी
मामले पर विश्वविद्यालय के कुलसचिव अनिल शर्मा ने सफाई दी. उन्होंने कहा कि छात्र को 100 प्रतिशत से अधिक अंक नहीं मिले हैं. उनके अंतिम सेमेस्टर के अधिकतम अंक 'ग्रैंड टोटल' में शामिल न होने के कारण मार्कशीट में अधिकतम अंक 1600 प्रदर्शित हो रहे थे, जबकि वास्तविक अधिकतम अंक 2100 थे. परिणाम तैयार करने वाली एजेंसी की तकनीकी त्रुटि को सुधार दिया गया है और संबंधित एजेंसी को चेतावनी जारी की गई है. वहीं एमएससी छात्र के प्रैक्टिकल अंक न जुड़ने के मामले में उन्होंने जांच कराकर सुधार का आश्वासन दिया है.
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