- बुरहानपुर में केला उत्पादन की शुरुआत 1955 में महाराष्ट्र के जलगांव से बैलगाड़ी द्वारा लाए गए बीजों से हुई थी
- बुरहानपुर के 18,640 किसान 26,120 हेक्टेयर क्षेत्र में केला उत्पादन कर सालाना 18.28 लाख मीट्रिक टन उत्पादन करते
- बुरहानपुर केले को 23 जून 2026 को जीआई टैग मिला, जिससे किसानों को नकली उत्पादों से सुरक्षा मिलेगी
Burhanpur Banana GI Tag: मध्य प्रदेश में जीआई टैग पाने वाले बुरहानपुर में केला उत्पादन का इतिहास काफी रोचक है, जो यहां के किसानों की मेहनत को सलाम करने वाला है. बुरहानपुर में केला उत्पादन की शुरुआत साल 1955 में महाराष्ट्र के जलगांव से बैलगाड़ी में आए बीजों से हुई थी. अब 23 जून 2026 को बुरहानपुर केले को जीआई टैग मिलना इस बात का सबूत है कि देश में केला उत्पादन और उसकी खास गुणवत्ता के मामले में बुरहानपुर का कोई सानी नहीं है. ठीक वैसे ही जैसे दार्जिलिंग की चाय या बनारस की साड़ी. आइए जानते हैं बुरहानपुर के सुपर स्पेशल केले की पूरी कहानी, जिसकी आज दुनिया हो रही दीवानी.

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बुरहानपुर कैसे बना 'केला सिटी'?
यूं तो 15 अगस्त 2003 को पूर्वी निमाड़ (खण्डवा) से अलग होकर बुरहानपुर नया जिला बना, मगर इसके 'बनाना सिटी' बनने की कहानी 71 साल पुरानी है. ताप्ती नदी के किनारे बसा बुरहानपुर, महाराष्ट्र के जलगांव की वजह से केला उत्पादन की सबसे बड़ी मंडी बना.
कृषि विज्ञान केंद्र, बुरहानपुर के अध्यक्ष, केला कारोबारी और पिछले चार दशकों से केले की खेती कर रहे हमीद काजी ने बताया कि 1955 तक बुरहानपुर में केवल संतरा व कपास की खेती हुआ करती थी. उस समय महाराष्ट्र के जलगांव जिले के शेंदूर्णी के रहने वाले किसानों ने बुरहानपुर में केले की खेती करने की शुरुआत की. जलगांव से बुरहानपुर की दूरी 95 किलोमीटर है.
हमीद काजी के पिता वहाबुद्दीन समेत कई किसानों का उस वक्त मानना था कि बुरहानपुर की आबो-हवा (जलवायु) केला उत्पादन के बेहद अनुकूल है. यहां न केवल उपजाऊ काली मिट्टी है, बल्कि पानी भी प्रचुर मात्रा में उपलब्ध है. इसी दूरदर्शी सोच के साथ किसान शेंदूर्णी से केले के पौधे/बीज लेकर बैलगाड़ियों के जरिए यहां आए और बुरहानपुर जिले के किसानों को केला उत्पादन के लिए प्रोत्साहित किया.

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बुनहारपुर में 18,640 किसान कर रहे केले की खेती
देश के अन्य राज्यों को बुरहानपुर ने सिखाया केला उगाना
बुरहानपुर में 1955 के आसपास शुरू हुआ केला उत्पादन का सिलसिला साल 2026 में जीआई टैग मिलने तक अनवरत जारी है. एक समय ऐसा आया जब बुरहानपुर देश का सबसे बड़ा केला उत्पादक जिला बन गया. सीजन के दिनों में यहां से रोजाना उत्तर भारत व देश के अन्य प्रांतों में 800 से लेकर 1 हजार ट्रक केला भेजा जाने लगा. इसके बाद यहीं से केले के पौधे बिहार, उत्तर प्रदेश व अन्य प्रदेशों में गए, जिसके बाद वहां भी केले का उत्पादन शुरू हुआ.
बुरहानपुर की काली मिट्टी में उगने वाले केले की मिठास और क्वालिटी लाजवाब है. इसी कारण बुरहानपुर के केले की मांग उत्तर भारत, पंजाब और कश्मीर के साथ-साथ खाड़ी के देशों में भी बहुत ज्यादा है.

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क्या है बुरहानपुर के केले की खासियत और कौन-सी हैं प्रमुख किस्में?
अगर केले की किस्मों की करें, तो बुरहानपुर जिले में सबसे प्रचलित 'जी 9 टिश्यु कल्चर' और 'वसई' किस्म के केले का उत्पादन किया जाता है. एक सामान्य किसान 12 से 15 महीने की खेती में प्रति एकड़ 10 से 15 टन केले का उत्पादन करता है, जबकि एक उत्कृष्ट (आधुनिक) किसान इसी अवधि में प्रति एकड़ 20 से 30 टन तक उत्पादन ले लेता है.
किन देशों में एक्सपोर्ट होता है बुरहानपुर का केला?
किसान राजेंद्र चौकसे ने बताया कि बुरहानपुर के केले की जम्मू-कश्मीर, पंजाब, हरियाणा से लेकर पूरे उत्तर भारत में भारी डिमांड है. इसके साथ ही यह केला खाड़ी के लगभग सभी देशों जैसे सऊदी अरब, इराक, ईरान, बहरीन, ओमान और दुबई में एक्सपोर्ट होता है. पाकिस्तान में भी एक दशक पहले तक नियमित रूप से बुरहानपुर का केला एक्सपोर्ट होता था, लेकिन भारत-पाकिस्तान के आपसी संबंधों के कारण फिलहाल वहां प्रत्यक्ष रूप से एक्सपोर्ट बंद है.

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पाकिस्तान ने मंगाया करोड़ों का केला
वेबसाइट mptradeportal.org के अनुसार, बुरहानपुर का 'ग्रैंड नैने' किस्म का केला अपनी बेहतरीन गुणवत्ता के लिए जाना जाता है और यहां के किसान खाड़ी देशों को बड़े पैमाने पर इसका निर्यात कर रहे हैं. भारत से पाकिस्तान जाने वाले इस निर्यात ग्राफ में बुरहानपुर जैसे प्रमुख केला उत्पादक जिलों की बड़ी भूमिका मानी जा रही है.
वित्तीय वर्ष 2021-22 में भारत से पाकिस्तान को केवल 4 करोड़ रुपये के केले का निर्यात किया गया था. लेकिन अगले ही वित्तीय वर्ष (2022-23) में यह आंकड़ा ढाई गुना से भी ज्यादा बढ़कर सीधे 14 करोड़ रुपये पर पहुंच गया.
भुसावली नाम से मशहूर कमानी केला और इसके कुरकुरे चिप्स
वेबसाइट Burhanpur.nic.in के अनुसार, बुरहानपुर का 'कमानी केला' स्वाद के मामले में बेजोड़ है. इसकी लोडिंग नजदीकी भुसावल जंक्शन (महाराष्ट्र) से होने के कारण इसे देशभर में 'भुसावली केला' के नाम से पहचान मिली है.
कमानी केले की जितनी मांग है, उतने ही चाव से बुरहानपुर में इसके विशेष चिप्स खाए जाते हैं. ये चिप्स 2 से 4 इंच तक लंबे, बेहद पतले और लाजवाब कुरकुरे होते हैं. बुरहानपुर के बाजारों, मुख्य सड़कों और पर्यटन स्थलों पर ताजे और गरमागरम मिलने वाले ये चिप्स मुख्य रूप से लाल मिर्च, काली मिर्च और हल्दी-नमक फ्लेवर में मिलते हैं. बुरहानपुर आने वाले सैलानियों के लिए ऐतिहासिक इमारतों को देखने के साथ-साथ इन पौष्टिक और स्वादिष्ट केले के चिप्स का स्वाद लेना एक जरूरी और यादगार अनुभव बन चुका है.
(साथ में शारिक अख्तर दुर्रानी का इनपुट)
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