Jabalpur Bargi Dam Cruise Accident Cruise Driver Interview: बरगी डैम क्रूज़ हादसे ने कई परिवारों को हमेशा के लिए तोड़ दिया है और पूरे मध्यप्रदेश के सामने कई असहज सवाल खड़े कर दिए हैं. अब उस बदकिस्मत क्रूज़ के पायलट महेश पटेल ने पहली बार अपनी चुप्पी तोड़ी है. NDTV इंडिया से खास बातचीत में महेश पटेल ने हादसे में जान गंवाने वालों के परिवारों से हाथ जोड़कर माफी मांगी. लेकिन जब वह रोते हुए माफी मांग रहे थे और बार-बार इसे “प्राकृतिक आपदा” बता रहे थे, तब उनकी ही बातों ने सुरक्षा प्रोटोकॉल, लाइफ जैकेट, मौसम की चेतावनी, क्रू की संख्या और उस पूरी व्यवस्था पर नए और गंभीर सवाल खड़े कर दिए, जिसने एक टूरिस्ट क्रूज़ को खतरे के बीच पानी में उतरने दिया.
कहां मिला पायलट?
NDTV ने महेश पटेल को MPT रिसॉर्ट पर खोजा. यही वह जगह थी, जहां से पर्यटक उस क्रूज़ में सवार हुए थे, जो बाद में बरगी के पानी में डूब गया. पटेल ने NDTV से उसी रिसॉर्ट पर खड़े एक दूसरे क्रूज़ में बात की. यह क्रूज़ उसी बनावट और ढांचे का है, जिस तरह का क्रूज़ हादसे का शिकार हुआ था. फर्क सिर्फ इतना है कि यह क्रूज़ पिछले दो साल से खराब होने के कारण रिसॉर्ट पर खड़ा है. उसी बंद पड़े क्रूज़ पर खड़े होकर, जो डूबे हुए क्रूज़ की लगभग परछाईं जैसा दिखता है, महेश पटेल ने 30 अप्रैल की शाम की कहानी बताने की कोशिश की.

Jabalpur Bargi Dam Cruise Accident: हादसे के बाद दिखता क्रूज का हिस्सा
मध्यप्रदेश सरकार ने हादसे में लापरवाही के आरोप में क्रूज़ पायलट महेश पटेल, हेल्पर छोटेलाल गोंड और टिकट काउंटर प्रभारी ब्रिजेंद्र की सेवाएं तत्काल प्रभाव से समाप्त कर दी हैं. होटल मैकल रिसॉर्ट और बोट क्लब बरगी के मैनेजर सुनील मरावी को भी लापरवाही के आरोप में निलंबित किया गया है. लेकिन सबसे बड़ा सवाल अब भी वहीं है कि क्या यह सिर्फ एक व्यक्ति की गलती थी या यह हादसा निगरानी, तैयारी और बुनियादी सुरक्षा व्यवस्था की बड़ी नाकामी का नतीजा था?
हादसे की घटना को ऐसे किया याद
हादसे के बाद पहली बार बोलते हुए पटेल ने कहा कि जब क्रूज़ रवाना हुआ, तब मौसम सामान्य था. उन्होंने NDTV से कहा, “जब हम यहां से निकले, तब मौसम ठीक था. लेकिन जैसे ही हम उस जगह पहुंचे, तेज़ हवा चलने लगी. मैंने तुरंत नाव को वापस मोड़ा, लेकिन तूफान बहुत तेजी से बढ़ गया. लहरें डेक के ऊपर आने लगीं और पानी क्रूज़ के अंदर भरने लगा.”
यही एक वाक्य इस पूरी त्रासदी के केंद्र में है. अगर लाइफ जैकेट तब पहनाई जा रही थीं, जब पानी क्रूज़ के अंदर आ चुका था, तो यात्रियों को क्रूज़ के पानी में उतरने से पहले लाइफ जैकेट क्यों नहीं पहनाई गई? जब NDTV ने पूछा कि पर्यटकों को पहले लाइफ जैकेट क्यों नहीं दी गई, तो पटेल ने कहा, “लोग अक्सर जैकेट पहनने से मना कर देते हैं.”

Jabalpur Bargi Dam Cruise Accident: क्रूज का पायलट महेश पटेल
यही विरोधाभास इस हादसे को और गंभीर बना देता है. हादसे से बचे लोग कह रहे हैं कि चेतावनियों को अनसुना किया गया. पायलट कह रहा है कि कोई चेतावनी दी ही नहीं गई.
'15 साल का अनुभव, पहले ऐसी स्थिति कभी नहीं देखी'
पटेल ने कहा कि उन्हें नाव चलाने का करीब 15 साल का अनुभव है और पहले भी कई बार ऐसी स्थिति आई है जब नाव को बीच रास्ते से वापस मोड़ना पड़ा. उन्होंने कहा, “मैं लगभग 15 साल से क्रूज चला रहा हूं. कई बार ऐसा हुआ है कि हमें क्रूज़ वापस मोड़नी पड़ी, लेकिन चलती क्रूज़ में ऐसी स्थिति पहले कभी नहीं आई.”
पटेल ने यह भी दावा किया कि वह नाव छोड़ने वाले आखिरी व्यक्ति थे. उन्होंने कहा, “मैं सभी को बाहर निकालने के बाद सबसे आखिर में नाव से निकला. हालांकि मैं किसी को शारीरिक रूप से बचा नहीं पाया, लेकिन मेरा पूरा ध्यान इस बात पर था कि सभी लोग लाइफ जैकेट पहन लें. मैं खुद तैरकर बाहर आया.”

Jabalpur Bargi Dam Cruise Accident: क्रूज
ऐसी त्रासदी में यह दावा कि पायलट नाव छोड़ने से पहले सभी को बाहर निकाल चुका था, अब जांच का अहम हिस्सा होना चाहिए.
'हर दो साल में जारी होता है लाइसेंस, MPT कराता है ट्रेनिंग'
पटेल ने कहा कि वह इसी तरह का क्रूज़ 2006 से चला रहे हैं और उनके पास गोवा से जारी वैध लाइसेंस है. उन्होंने कहा, “मेरे पास गोवा से जारी वैध लाइसेंस है. हर दो साल में हमारी अनिवार्य ट्रेनिंग होती है, जिसमें लाइफ सेविंग तकनीक भी शामिल होती है. मेरे पास उस ट्रेनिंग के जरूरी सर्टिफिकेट भी हैं. इसके अलावा मुझे डीजल इंजन की तकनीकी जानकारी भी है.”
लेकिन अगर ट्रेनिंग थी, तो इमरजेंसी रिस्पॉन्स इतना कमजोर क्यों दिखा? अगर लाइफ सेविंग ड्रिल ट्रेनिंग का हिस्सा थी, तो शुरुआत से ही लाइफ जैकेट अनिवार्य क्यों नहीं थी? अगर क्रूज़ संचालन का तय पैटर्न था, तो उस दिन क्रू कम लोगों के साथ क्यों चल रहा था?

Jabalpur Bargi Dam Cruise Accident: क्रूज के अंदर की तस्वीर
क्रू कम था, फिर क्यों चलाया क्रूज?
पटेल ने माना कि उस दिन क्रू कम था. उन्होंने कहा, “हमारे क्रू में आमतौर पर तीन लोग होते हैं, एक पायलट और दो असिस्टेंट. लेकिन उस दिन सिर्फ मैं और एक असिस्टेंट थे.” यह स्वीकारोक्ति जांच की सबसे अहम बातों में से एक हो सकती है. एक टूरिस्ट क्रूज़, जिसमें परिवार, बच्चे और बुजुर्ग यात्री सवार थे, वह कथित तौर पर तीन की जगह सिर्फ दो क्रू मेंबर्स के सहारे चल रहा था. जब अफरा-तफरी मची, जब पानी क्रूज़ में घुसने लगा, जब यात्रियों को लाइफ जैकेट चाहिए थी, जब लोगों को निर्देशों की जरूरत थी, जब नाव को नियंत्रित करना था और जब मदद के लिए फोन करना था, तब क्या क्रू पर्याप्त था?
इसके बाद NDTV ने उन्हें वीडियो फुटेज दिखाते हुए पूछा कि तेज़ हवा चलने के बाद ही लाइफ जैकेट क्यों बांटी गईं. पटेल ने जवाब दिया, “लहरें तेज़ थीं, लेकिन लोग तब भी आनंद ले रहे थे. मैं क्या करता? जो वीडियो आप दिखा रहे हैं, उसमें नाव अभी हिलती हुई नहीं दिख रही है.”
'200 मीटर पहले खाेया कंट्रोल'
NDTV ने उनसे आगे पूछा कि फुटेज में नाव हिलती दिख रही है, पानी अंदर आने लगा था और लोग चीख रहे थे. इसके बाद पटेल NDTV को उस बंद पड़े क्रूज़ के क्रू केबिन में ले गए और उसी तरह के क्रूज़ के कंट्रोल समझाने लगे, जैसा हादसे में डूबा था. उन्होंने कहा, “मैं दो कंट्रोल से ऑपरेट करता हूं.” उन्होंने बताया कि एक कंट्रोल रिवर्स के लिए होता है और दूसरा आगे बढ़ने के लिए.
इसके बावजूद पटेल ने कहा कि वह खुद को दोषी नहीं मानते. जब NDTV ने पूछा कि क्या उन्हें पछतावा है, तो उन्होंने कहा, “यह प्रकृति का कहर था. मेरी जरा भी गलती नहीं है. मेरा एक ही इरादा था कि सभी मेहमान सुरक्षित अपने गंतव्य तक पहुंचें.”

Jabalpur Bargi Dam Cruise Accident: हादसे के बाद क्रूज का हिस्सा
यह जवाब बहुत कुछ कहता है. एक तरफ पटेल बार-बार हाथ जोड़कर माफी मांग रहे थे. दूसरी तरफ वह कह रहे थे कि उनकी गलती नहीं है. वह पीड़ितों के लिए रो रहे थे, लेकिन हादसे को प्रकृति पर डाल रहे थे. वह कह रहे थे कि उन्होंने ट्रेनिंग ली थी, लेकिन यह भी कह रहे थे कि वह कुछ नहीं कर सके. वह कह रहे थे कि लाइफ जैकेट मौजूद थीं, लेकिन मान रहे थे कि यात्री उन्हें पहने हुए नहीं थे. वह कह रहे थे कि क्रू में सामान्यतः तीन लोग होते हैं, लेकिन उस दिन दो ही लोग थे. उनके हर जवाब के साथ एक नया सवाल खड़ा होता गया.
'मौसम की जानकारी के बारे में हमें नहीं बताया गया था'
मौसम की चेतावनी भी इस हादसे का अहम पहलू है. जब NDTV ने पूछा कि क्या उन्हें पता था कि क्रूज़ शुरू होते समय ऑरेंज अलर्ट लागू था, तो पटेल ने कहा, “नहीं, हमें मौसम की स्थिति के बारे में नहीं बताया गया था. हादसा क्रूज़ शुरू होने के लगभग आधे घंटे बाद हुआ.”
पटेल ने यह भी बताया कि ज्यादा भीड़ वाले दिनों में क्रूज़ पांच से छह राउंड लगाता था और हर राउंड करीब 45 मिनट का होता था. यह जानकारी भी महत्वपूर्ण है. क्या ज्यादा राउंड लगाने का दबाव सुरक्षा फैसलों पर असर डाल रहा था? क्या हर ट्रिप से पहले मौसम की स्थिति जांची जा रही थी? क्या यात्रियों को बोर्डिंग से पहले सुरक्षा निर्देश दिए जाते थे? लाइफ जैकेट अनिवार्य थी या यात्री की इच्छा पर छोड़ी गई थी? क्षमता की निगरानी हो रही थी या नहीं? इमरजेंसी ड्रिल वास्तविक थी या सिर्फ कागज पर?

Jabalpur Bargi Dam Cruise Accident: माफी मांगते हुए पटेल
'नौकरी ही सहारा थी, अब मैं क्या करूं?'
सेवा समाप्त किए जाने के सवाल पर पटेल टूट गए. उनकी आंखें भर आईं. उन्होंने कहा, “मुझे 27 हजार रुपये महीने की तनख्वाह मिलती थी. मेरे दो बच्चे हैं. अब मैं क्या करूं? मेरी बुजुर्ग मां है. पिता का निधन हो चुका है. हमारे पास खेती की जमीन नहीं है. यह नौकरी ही मेरे परिवार का एकमात्र सहारा थी.”
इसके बाद उनका सबसे भावुक निवेदन सामने आया. उन्होंने कहा, “मैं शब्दों में अपना दुख और पीड़ा नहीं बता सकता. खाने की इच्छा खत्म हो गई है और नींद पूरी तरह गायब है. मैं सभी से माफी मांगता हूं. यह मेरी गलती नहीं थी. मैं जितना संभव हो, उतना आप सबसे क्षमा चाहता हूं. मैंने अपनी पूरी ताकत लगा दी थी कि सभी सुरक्षित रहें.” एक समय पटेल ने हाथ जोड़कर कहा, “मैं सबके पैरों में गिरकर माफी मांगता हूं.” उनकी आंखें भर आईं और उन्होंने फिर कहा, “मैं एक बार फिर सबके पैरों में गिरकर माफी मांगता हूं.”

Jabalpur Bargi Dam Cruise Accident: बरगी क्रूज हादसा
CM का एक्शन, जांच के आदेश
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने हादसे की विस्तृत जांच के लिए उच्च स्तरीय जांच समिति बनाने की घोषणा की है. इस समिति में होमगार्ड और सिविल डिफेंस के डायरेक्टर जनरल, मध्यप्रदेश सरकार के एक सचिव और जबलपुर संभाग के आयुक्त शामिल हैं. समिति हादसे के कारणों, क्रूज़ संचालन से जुड़े नियमों और उन परिस्थितियों की जांच करेगी, जिनकी वजह से यह त्रासदी हुई. मुख्यमंत्री ने कहा है कि दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी और भविष्य में ऐसे हादसे रोकने के लिए पर्यटन विभाग के माध्यम से क्रूज़ संचालन का स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर तैयार किया जाएगा.
प्रकृति का कहर या लापरवाही
महेश पटेल कह रहे हैं कि यह प्रकृति का कहर था. हादसे से बचे लोग आरोप लगा रहे हैं कि चेतावनियों को अनसुना किया गया. सरकार इसे लापरवाही मानते हुए कार्रवाई कर चुकी है. अब जांच तय करेगी कि जिम्मेदारी किसकी थी. लेकिन एक बात साफ है कि खुशी की सैर मौत की सवारी में इसलिए बदली क्योंकि सुरक्षा या तो देर से आई, या कमजोर थी, या संयोग के भरोसे छोड़ दी गई थी. बरगी में तूफान कुछ मिनटों का था, लेकिन उसने जो सवाल छोड़े हैं, वे इतनी जल्दी शांत नहीं होंगे.
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