- TMC ने चुनाव आयोग के काउंटिंग सुपरवाइजर नियुक्ति के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है
- कलकत्ता हाईकोर्ट ने तृणमूल कांग्रेस को राहत देने से इनकार कर दिया था, जिसके खिलाफ याचिका सुप्रीम कोर्ट में गई
- कपिल सिब्बल ने चुनाव आयोग के फैसले को चुनाव की निष्पक्षता प्रभावित करने वाला बताया और सवाल उठाया है
केंद्र सरकार और केंद्रीय कर्मचारियों को काउंटिंग सुपरवाइजर नियुक्त करने के चुनाव आयोग के फैसले के खिलाफ टीएमसी सुप्रीम कोर्ट पहुंची है. शीर्ष अदालत में सुनवाई शुरू हो चुकी है. इससे पहले कलकत्ता हाईकोर्ट ने गुरुवार को राहत देने से इनकार कर दिया था. याचिका कलकत्ता हाईकोर्ट के उस आदेश के खिलाफ दायर की गई है, जिसमें कोर्ट ने तृणमूल कांग्रेस को राहत देने से इनकार कर दिया था. आइए जानते हैं कोर्ट में इस मामले पर क्या-क्या दलीलें चल रही हैं.
'चुनाव आयोग को कहां से आशंका हो गई?'
चुनाव आयोग के PSU कर्मचारियों को काउंटिंग सुपरवाइजर नियुक्त करने के फैसले के खिलाफ टीएमसी की ओर से कपिल सिब्बल ममता सरकार का पक्ष रख रहे हैं. तृणमूल कांग्रेस के वकील कपिल सिब्बल ने कहा कि ऐसी चीजें पहले नहीं हुईं. चुनाव आयोग को कहां से आशंका हो गई? कपिल सिब्बल ने कहा कि सर्कुलर में खुद ही कहा गया है कि राज्य सरकार के नोमिनी होने चाहिए,लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया. सिब्बल ने कहा कि इस बात की आशंका है कि आयोग के इस कदम से चुनाव की निष्पक्षता प्रभावित होगी.
'डर है कि हर एक बूथ में दिक्कत होगी....'
कपिल सिब्बल ने कहा कि यह सर्कुलर DEO को जारी किया गया है और हमें 29 अप्रैल को पता चला. इसके उलट, पहले से नोटिस दिया गया है.उनका कहना है कि उन्हें डर है कि हर एक बूथ में दिक्कत होगी. एक सेंट्रल गवर्नमेंट नॉमिनी है और अब उन्हें एक और चाहिए.सर्कुलर में कहा गया है कि स्टेट गवर्नमेंट नॉमिनी की जरूरत है लेकिन वे उसे अपॉइंट नहीं करेंगे. आर्टिकल 324 इस बारे में नहीं है कि आप जो चाहें और जैसा चाहें करें.
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