- पश्चिम बंगाल में चुनाव आयोग ने अतिरिक्त मतगणना पर्यवेक्षक और पुलिस पर्यवेक्षकों की तैनाती की है
- सुप्रीम कोर्ट ने टीएमसी की याचिका पर सुनवाई करते हुए चुनाव आयोग के फैसले में दखल देने से इनकार किया
- कोर्ट ने स्पष्ट किया कि चुनाव आयोग को काउंटिंग सुपरवाइजर नियुक्त करने का पूरा अधिकार प्राप्त है
पश्चिम बंगाल समेत तमाम 5 राज्यों के चुनावी नतीजे सोमवार को आने वाले हैं. इसे लेकर तमाम तरह की तैयारियों को अंतिम रूप दिया जा रहा है. जरूरत के हिसाब से अतिरिक्त मतगणना पर्यवेक्षक और पुलिस पर्यवेक्षकों की तैनाती की जा रही है. चुनाव आयोग ने इस क्रम में पश्चिम बंगाल में 165 अतिरिक्त मतगणना पर्यवेक्षक और 77 पुलिस पर्यवेक्षकों की तैनाती की है. कहा जा रहा है कि जिन नए पर्यवेक्षकों की तैनाती की गई है उनका काम मतगणना की प्रक्रिया पर नजर रखने के साथ-साथ किसी भी संभावित गड़बड़ी होने से रोकना होगा.
चुनाव आयोग का ये फैसला उस वक्ता आया है जब शनिवार को ही सुप्रीम कोर्ट ने टीएमसी की एक याचिका पर सुनवाई करते हुए उस मामले में दखल देने से इनकार कर दिया था. आपको बता दें कि ये मामला चुनाव आयोग के उस फैसले से जुड़ा है जिसके तहत केंद्रीय कर्मचारियों को काउंटिंग सुपरवाइजर नियुक्त करने की बात कही गई है. टीएमसी ने चुनाव आयोग के इसी फैसले को पहले कलकत्ता हाईकोर्ट और बाद में सुप्रीम कोर्ट में चैलेंज किया था. इस मामले में ममता बनर्जी की पार्टी से शीर्ष अदालत ने कहा कि हम चुनाव आयोग के फैसले के खिलाफ नहीं जाएंगे और इसपर कोई आदेश जारी नहीं करेंगे. कोर्ट ने साफ कहा कि चुनाव आयोग को अपना अधिकारी चुनने का पूरा अधिकार है. शीर्ष अदालत ने कहा कि हम उनके काम में कोई दखल नहीं देंगे. बता दें कि टीएसी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल पैरवी कर रहे थे. कोर्ट ने आगे कहा कि केंद्र सरकार के कर्मचारी के साथ एक राज्य सरकार के कर्मचारी की भी तैनाती की जाएगी.
सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?
केंद्रीय कर्मचारियों को काउंटिंग सुपरवाइजर नियुक्त करने के फैसले के खिलाफ पहुंची टीएमसी को सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि किसी आदेश की जरूरत नहीं है. सर्कुलर का पूरी तरह से पालन होगा. इलेक्शन कमीशन को अधिकारी चुनने का हक है. चुनाव आयोग अपने कर्मचारी पर खुद नियंत्रण कर सकता है. सुप्रीम कोर्ट ने इसके साथ इस मामले पर दखल देने से इनकार कर दिया है. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि कर्मचारियों की तैनाती नियमों के खिलाफ नहीं है. चुनाव आयोग का सर्कुलर ही लागू होगा.
इस सुनवाई के दौरान जस्टिस जे. बागची ने कहा कि केवल एक ही पूल से चयन करना गलत नहीं कहा जा सकता. कपिल सिब्बल ने जवाब देते हुए कहा कि चयन राज्य सरकार और केंद्र सरकार के कर्मचारियों में से यादृच्छिक (रैंडम) तरीके से होना चाहिए. तब जस्टिस बागची ने कहा कि काउंटिंग सुपरवाइजर और काउंटिंग असिस्टेंट में से कम से कम एक केंद्र सरकार का कर्मचारी होना चाहिए. कपिल सिब्बल ने तब कहा कि तो फिर दूसरा राज्य सरकार का होना चाहिए, लेकिन यहां तो राज्य सरकार का कोई प्रतिनिधि नहीं है. सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने कहा कि यहां एक और गलतफहमी यह है कि राज्य सरकार और केंद्र सरकार के कर्मचारी अलग‑अलग माने जा रहे हैं, जबकि वे सभी सरकारी कर्मचारी ही हैं.
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