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चुनावी कड़वाहट के बीच ट्रेन में आमने-सामने बैठे बीजेपी-कांग्रेस के 'कप्तान', दतिया से आई दिलचस्प तस्वीर

दतिया उपचुनाव के प्रचार के बीच बीजेपी और कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष एक ही ट्रेन में सफर करते मिले, जिससे सियासी पारा चढ़ गया है. एक तरफ कांग्रेस अपने 'विजयपुर मॉडल' के साथ मैदान में है, तो दूसरी तरफ बीजेपी नरोत्तम मिश्रा के नेतृत्व में संगठन के दम पर ताल ठोक रही है.

चुनावी कड़वाहट के बीच ट्रेन में आमने-सामने बैठे बीजेपी-कांग्रेस के 'कप्तान', दतिया से आई दिलचस्प तस्वीर

मध्य प्रदेश की दतिया विधानसभा सीट पर हो रहे उपचुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मियां चरम पर है. बीजेपी और कांग्रेस, दोनों ही दलों ने इस सीट को जीतने के लिए अपनी पूरी ताकत झोंक दी है. हालांकि इस चुनावी गहमा-गहमी के बीच एक बेहद दिलचस्प सियासी तस्वीर सामने आई है, जहां दोनों धुर विरोधी दलों के प्रदेश अध्यक्ष एक ही ट्रेन में आमने-सामने बैठकर सफर करते नजर आए. दतिया दौरे के दौरान ट्रेन में हुई इस मुलाकात और उनके बीच हुई चर्चा ने प्रदेश के सियासी गलियारों में नई हलचल पैदा कर दी है.

एक ही ट्रेन से पहुंचे दतिया, सफर के दौरान हुई मुलाकात

जानकारी के मुताबिक, दतिया में चुनाव प्रचार की कमान संभालने के लिए बीजेपी और कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष एक ही ट्रेन से रवाना हुए थे. सफर के दौरान जब दोनों नेताओं का आमना-सामना हुआ, तो कटुता से परे एक शिष्टाचार की तस्वीर देखने को मिली. उपचुनाव की भारी सरगर्मियों और एक-दूसरे के खिलाफ जारी तीखी बयानबाजी के बीच दोनों नेताओं ने एक साथ बैठकर काफी देर तक बातचीत की. माना जा रहा है कि इस अनौपचारिक मुलाकात के दौरान मध्य प्रदेश की मौजूदा राजनीति और दतिया उपचुनाव के समीकरणों को लेकर दोनों के बीच चर्चा हुई है.

दोनों अध्यक्षों ने खुद संभाला चुनावी मोर्चा

देखा जाए तो दतिया उपचुनाव दोनों ही पार्टियों के लिए नाक का सवाल बन चुका है, यही वजह है कि दोनों अध्यक्षों ने खुद ग्राउंड जीरो पर जाकर मोर्चा संभाल लिया है. एक तरफ जहां सत्ताधारी दल बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष संगठन को मजबूत करने और सरकार की योजनाओं के दम पर इस किले को सुरक्षित रखने की रणनीति बना रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अपनी खोई हुई जमीन वापस पाने के लिए कार्यकर्ताओं में जोश भरने पहुंचे हैं. दोनों नेताओं के दतिया में डेरा डालने से चुनावी अभियान अब और आक्रामक होने की उम्मीद है.
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कांग्रेस ने उतारा 'विजयपुर मॉडल', नरोत्तम मिश्रा बने सियासी केंद्र

बता दें कि दतिया के इस चुनावी रण को जीतने के लिए कांग्रेस ने विजयपुर उपचुनाव में जीत दिलाने वाले अपने 'माइक्रो मैनेजमेंट फॉर्मूले' को यहां भी लागू कर दिया है. पार्टी ने पूरे दतिया क्षेत्र को 5 क्लस्टर और 7-8 सेक्टरों में बांटकर करीब 200 बूथों पर सीधा माइक्रो मैनेजमेंट करने के लिए 40 दिग्गज नेताओं की 'सुपर-40' टीम मैदान में उतारी है. वहीं दूसरी तरफ, बीजेपी ने पूर्व गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा को चुनाव संचालन समिति का प्रमुख बनाकर साफ संकेत दे दिया है कि इस उपचुनाव में संगठन की कमान उनके हाथ में रहेगी. ऐसे में यह मुकाबला सिर्फ कांग्रेस और बीजेपी के बीच नहीं, बल्कि नरोत्तम मिश्रा की राजनीतिक साख की भी बड़ी परीक्षा माना जा रहा है.

संगठन बनाम माइक्रो मैनेजमेंट की जोरदार टक्कर

दतिया के इस दंगल में जहां कांग्रेस अपने विजयपुर मॉडल, बूथ मैनेजमेंट और जातीय समीकरणों के भरोसे मैदान मारना चाहती है, वहीं बीजेपी अपने मजबूत कैडर, बूथ स्तर तक फैले संगठन और नरोत्तम मिश्रा के प्रभाव के दम पर पलटवार करने की तैयारी में है. स्थानीय मुद्दों से ज्यादा यह चुनाव अब संगठनात्मक ताकत और चुनावी मैनेजमेंट की जंग में तब्दील हो चुका है. अब देखना दिलचस्प होगा कि ट्रेन के सफर से शुरू हुई यह सियासी जंग दतिया की जमीन पर क्या रंग लाती है और जनता किसे अपना प्रतिनिधि चुनती है. 
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