मध्यप्रदेश कांग्रेस को इंदौर में उस समय बड़ा झटका लगा, जब पार्टी के पूर्व प्रदेश महासचिव और वरिष्ठ नेता राकेश सिंह यादव ने कांग्रेस की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा देने की घोषणा कर दी. इस्तीफे के साथ उन्होंने कांग्रेस के राष्ट्रीय और प्रदेश नेतृत्व पर तीखे आरोप भी लगाए. एक प्रेसवार्ता में यादव ने लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी, प्रदेश प्रभारी हरीश चौधरी और संगठन महासचिव के.सी. वेणुगोपाल को निशाने पर लिया. उन्होंने संगठन में फैसलों की प्रक्रिया, टिकट वितरण, नेतृत्व शैली और हाल के राजनीतिक विवादों को लेकर सवाल उठाए और दावा किया कि वर्तमान नेतृत्व के साथ काम करना उनके लिए संभव नहीं रह गया था.
तीन दशक से अधिक समय तक जुड़े रहे कांग्रेस से
इंदौर में आयोजित प्रेस वार्ता में राकेश सिंह यादव ने कहा कि वह पिछले 30 से 35 वर्षों से कांग्रेस संगठन से जुड़े रहे हैं. उन्होंने प्रदेश महासचिव, प्रदेश सचिव, प्रवक्ता सहित कई संगठनात्मक जिम्मेदारियां निभाईं. यादव ने कहा कि लंबे राजनीतिक जीवन में पहली बार उन्हें लगा कि पार्टी का प्रदेश नेतृत्व संगठन की गरिमा और कार्यकर्ताओं की अपेक्षाओं के अनुरूप काम नहीं कर रहा है.
राहुल गांधी पर साधा निशाना
राकेश सिंह यादव ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर भी तीखी टिप्पणी की. उन्होंने कहा कि राहुल गांधी ऐसे "धृतराष्ट्र" बन गए हैं जिन्होंने संगठन में अनेक "दुर्योधन" पैदा कर दिए हैं. यादव का आरोप था कि पार्टी नेतृत्व जमीनी कार्यकर्ताओं की बात सुनने के बजाय कुछ चुनिंदा नेताओं के आधार पर फैसले ले रहा है.
जीतू पटवारी पर लगाए गंभीर आरोप
यादव ने प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी पर भी गंभीर आरोप लगाए. उन्होंने दावा किया कि प्रदेश अध्यक्ष पद पर नियुक्ति पारदर्शी प्रक्रिया से नहीं हुई. साथ ही आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री पर लगाए गए कथित 500 करोड़ रुपये के जमीन घोटाले के आरोप पर्याप्त दस्तावेजों के बिना सार्वजनिक किए गए. यादव का कहना है कि जब उन्होंने पार्टी मंचों पर इन आरोपों के समर्थन में प्रमाण मांगे तो उन्हें संतोषजनक जवाब नहीं मिला.
हरीश चौधरी और के.सी. वेणुगोपाल पर भी उठाए सवाल
पूर्व प्रदेश महासचिव ने कांग्रेस के प्रदेश प्रभारी हरीश चौधरी और संगठन महासचिव के.सी. वेणुगोपाल पर भी सवाल खड़े किए. उन्होंने आरोप लगाया कि संगठन में कई फैसले पारदर्शी तरीके से नहीं लिए गए. साथ ही टिकट वितरण और संगठनात्मक नियुक्तियों को लेकर भी असंतोष जताया. हालांकि इन आरोपों पर संबंधित नेताओं की ओर से तत्काल कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई.
कारण बताओ नोटिस का भी किया जिक्र
राकेश सिंह यादव ने दावा किया कि प्रदेश नेतृत्व के निर्णयों पर सवाल उठाने के बाद उन्हें कारण बताओ नोटिस भेजा गया. उनका कहना है कि पार्टी के भीतर सवाल पूछने और अपनी बात रखने की गुंजाइश लगातार कम होती गई. उन्होंने इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता से जुड़ा विषय बताया. यादव ने कहा कि नोटिस मिलने से पहले ही उन्होंने कांग्रेस की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा देने का निर्णय ले लिया था.
चुनावी हार और संगठनात्मक फैसलों पर नाराजगी
प्रेस वार्ता के दौरान यादव ने मध्यप्रदेश में कांग्रेस की चुनावी पराजयों के लिए भी वर्तमान प्रदेश नेतृत्व को जिम्मेदार ठहराया. उन्होंने राज्यसभा चुनाव, संगठन संचालन और उम्मीदवार चयन प्रक्रिया को लेकर भी सवाल उठाए. इंदौर से जुड़े कुछ राजनीतिक घटनाक्रमों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि कई फैसलों का नुकसान पार्टी को भुगतना पड़ा है.
500 करोड़ जमीन विवाद का भी किया जिक्र
यादव ने मुख्यमंत्री मोहन यादव से जुड़े कथित 500 करोड़ रुपये के जमीन विवाद का उल्लेख करते हुए कहा कि इस मामले को लेकर पार्टी नेतृत्व ने पर्याप्त दस्तावेज सार्वजनिक नहीं किए. उनका आरोप है कि इस विषय पर तैयार की गई प्रस्तुति में तथ्यों का अभाव था. जब उन्होंने इस संबंध में सवाल उठाए तो संगठन की ओर से उनके खिलाफ कार्रवाई शुरू कर दी गई.
कांग्रेस में बढ़ी सियासी हलचल
राकेश सिंह यादव के इस्तीफे और लगाए गए आरोपों से प्रदेश कांग्रेस की राजनीति में नई चर्चा शुरू हो गई है. हालांकि आरोपों की पुष्टि स्वतंत्र रूप से नहीं हुई है, लेकिन एक वरिष्ठ नेता के इस्तीफे और नेतृत्व पर लगाए गए आरोप आने वाले दिनों में प्रदेश कांग्रेस की आंतरिक राजनीति को प्रभावित कर सकते हैं. अब निगाहें इस बात पर हैं कि कांग्रेस नेतृत्व इन आरोपों पर क्या प्रतिक्रिया देता है और संगठन इस घटनाक्रम को किस तरह संभालता है.
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