मध्यप्रदेश कांग्रेस में एक बार फिर अंदरूनी खींचतान खुलकर सामने आ गई है. प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी और पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह के हालिया बयानों के बाद पार्टी के भीतर बयानबाजी का दौर तेज हो गया है. कांग्रेस की प्रदेश महासचिव निधि चतुर्वेदी ने सोशल मीडिया के जरिए दिग्विजय सिंह पर सीधा हमला बोलते हुए उन पर संगठन को नुकसान पहुंचाने का आरोप लगाया है. वहीं पूर्व केंद्रीय मंत्री अरुण यादव ने मामले में कांग्रेस नेता राहुल गांधी से हस्तक्षेप की मांग की है. इस बीच नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने दिग्विजय सिंह से मुलाकात की, जबकि वरिष्ठ कांग्रेस नेता पीसी शर्मा विवाद को कमतर बताते हुए इसे ‘बाप-बेटे की लड़ाई' करार दे रहे हैं. घटनाक्रम ने प्रदेश कांग्रेस की एकजुटता पर सवाल खड़े कर दिए हैं.
दिग्विजय और पटवारी के बयानों से बढ़ा विवाद
कांग्रेस के भीतर चल रही खींचतान उस समय सुर्खियों में आ गई जब प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी और पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह के अलग-अलग बयानों को लेकर पार्टी के भीतर बहस शुरू हो गई. मामला धीरे-धीरे व्यक्तिगत प्रतिक्रियाओं और संगठनात्मक असहमति तक पहुंच गया, जिसके बाद कांग्रेस नेताओं के बीच खुलकर बयानबाजी सामने आने लगी.
निधि चतुर्वेदी का दिग्विजय सिंह पर तीखा हमला
कांग्रेस प्रदेश महासचिव निधि चतुर्वेदी ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए दिग्विजय सिंह की भूमिका पर सवाल उठाए. उन्होंने अपनी पोस्ट में पूछा कि आखिर मध्यप्रदेश कांग्रेस दिग्विजय सिंह के "नागपाश" से कब मुक्त होगी. उन्होंने आरोप लगाया कि यदि किसी मुद्दे पर प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी से मतभेद थे, तो उन्हें पार्टी मंच पर या व्यक्तिगत स्तर पर उठाया जाना चाहिए था. निधि ने कहा कि सार्वजनिक मंच से प्रदेश अध्यक्ष को कटघरे में खड़ा करना संगठनात्मक अनुशासन के खिलाफ है.
‘पुत्र मोह' और संगठन को नुकसान पहुंचाने का आरोप
निधि चतुर्वेदी ने अपने बयान में दिग्विजय सिंह पर अपने पुत्र जयवर्धन सिंह को प्रदेश की राजनीति में आगे बढ़ाने के लिए संगठनात्मक हितों की अनदेखी करने का भी आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि ऐसी सार्वजनिक बयानबाजी से कांग्रेस कमजोर होती है और इसका राजनीतिक लाभ भाजपा को मिलता है. उन्होंने 2020 में कमलनाथ सरकार गिरने, 2023 विधानसभा चुनाव और 2024 लोकसभा चुनाव में कांग्रेस की हार का भी उल्लेख किया.
राहुल गांधी की टिप्पणी का हवाला
निधि चतुर्वेदी ने राहुल गांधी की 'स्लीपर सेल' संबंधी टिप्पणी का उल्लेख करते हुए पार्टी नेतृत्व से संगठन के खिलाफ काम करने वाले नेताओं पर कार्रवाई की मांग की. उन्होंने कांग्रेस हाईकमान से दिग्विजय सिंह के खिलाफ अनुशासनात्मक कदम उठाने की अपील भी की.
माननीय राहुल गांधी जी, मध्यप्रदेश में आंतरिक संघर्ष और असफलताओं सहित अन्य समस्याओं से जूझ रही भारतीय जनता पार्टी और उसकी सरकार से जब इस दौर में भी पार्टी संगठन का वास्तविक निष्ठावान कार्यकर्ता वैचारिक और सतही तौर पर संघर्ष कर रहा है उस दौर में कतिपय लोग एक मिलीजुली साजिश के तहत…
— Arun Subhashchandra Yadav (@MPArunYadav) July 1, 2026
अरुण यादव ने मांगा राहुल गांधी का हस्तक्षेप
पार्टी के भीतर बढ़ते विवाद के बीच कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अरुण यादव ने भी मामले में राहुल गांधी के हस्तक्षेप की जरूरत बताई है. उनका मानना है कि सार्वजनिक बयानबाजी से पार्टी की छवि प्रभावित होती है और संगठनात्मक मुद्दों का समाधान पार्टी मंच पर होना चाहिए.
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व मुख्यमंत्री माननीय श्री दिग्विजय सिंह जी से उनके भोपाल स्थित निवास पर आत्मीय मुलाकात हुई।
— Umang Singhar (@UmangSinghar) July 1, 2026
इस अवसर पर प्रदेश के समसामयिक राजनीतिक परिदृश्य, संगठन को सशक्त बनाने तथा जनहित से जुड़े विभिन्न महत्वपूर्ण मुद्दों पर सार्थक एवं विस्तृत चर्चा हुई।
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उमंग सिंघार की दिग्विजय से मुलाकात
विवाद के बीच नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने दिग्विजय सिंह से मुलाकात की. राजनीतिक गलियारों में इस मुलाकात को कांग्रेस के भीतर जारी घटनाक्रम से जोड़कर देखा जा रहा है. हालांकि इस मुलाकात को लेकर आधिकारिक तौर पर कोई विस्तृत टिप्पणी सामने नहीं आई है.
पीसी शर्मा ने किया बचाव
पूर्व मंत्री पीसी शर्मा ने विवाद को ज्यादा महत्व देने से इनकार किया. उन्होंने कहा कि दिग्विजय सिंह और जीतू पटवारी के बीच किसी प्रकार का गंभीर टकराव नहीं है और यह परिवार के भीतर की बात जैसी स्थिति है. पीसी शर्मा ने कहा, "बाप-बेटे आपस में मामला सुलझा लेंगे, दूसरे लोगों को बीच में आने की जरूरत नहीं है."
'स्लीपर सेल' पर भी दिया जवाब
पीसी शर्मा ने स्लीपर सेल की चर्चा पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि जो लोग कांग्रेस उम्मीदवारों के खिलाफ चुनाव लड़ते हैं और बाद में पद हासिल कर लेते हैं, उन्हें पहले आत्ममंथन करना चाहिए. उन्होंने इशारों में पार्टी के भीतर मौजूद असंतोष और अवसरवाद पर भी सवाल उठाए.
कांग्रेस के लिए चुनौती बनी आंतरिक एकजुटता
प्रदेश कांग्रेस लंबे समय से गुटबाजी और नेतृत्व संबंधी चर्चाओं से जूझती रही है. चुनावी हार के बाद संगठन को मजबूत करने की कोशिशों के बीच सार्वजनिक बयानबाजी ने एक बार फिर पार्टी की आंतरिक स्थिति को चर्चा में ला दिया है. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि विवाद जल्द नहीं सुलझा तो इसका असर संगठनात्मक गतिविधियों और भविष्य की चुनावी रणनीति पर पड़ सकता है.
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