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गृह मंत्री शाह ने पूर्व कांग्रेस सरकार पर लगाया नक्सलवाद को बढ़ावा देने का आरोप, कहा- हम कर रहे सफाया

रायपुर में ऑर्गनाइज़र कॉनक्लेव के दौरान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने पूर्व कांग्रेस सरकार पर माओवादियों को संरक्षण देने का गंभीर आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि भूपेश बघेल के कार्यकाल में माओवादी आतंक को बढ़ावा मिला.

गृह मंत्री शाह ने पूर्व कांग्रेस सरकार पर लगाया नक्सलवाद को बढ़ावा देने का आरोप, कहा- हम कर रहे सफाया

Amit Shah Statement: छत्तीसगढ़ की राजनीति में एक बार फिर माओवाद और शासन की भूमिका को लेकर बड़ा बयान सामने आया है. केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने रायपुर में आयोजित ऑर्गनाइज़र के कॉनक्लेव में साफ शब्दों में कहा कि पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में माओवादी गतिविधियों को संरक्षण मिला. अमित शाह के इस बयान ने न सिर्फ छत्तीसगढ़ की सियासत को गरमा दिया, बल्कि बीते वर्षों के शासन और सुरक्षा नीति पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं.

भूपेश बघेल सरकार पर सीधा आरोप

रायपुर में आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए अमित शाह ने कहा कि वे भूपेश बघेल के मुख्यमंत्री रहते हुए भी केंद्रीय गृह मंत्री थे. उन्होंने पूरी जिम्मेदारी के साथ यह दावा किया कि उस समय की सरकार ने माओवादी आतंक को प्रश्रय दिया. शाह ने कहा कि उन्हें यह समझ नहीं आता कि कोई चुनी हुई सरकार हथियारबंद समूहों को कैसे संरक्षण दे सकती है. उनके अनुसार, यह न केवल शासन की कमजोरी को दर्शाता है, बल्कि आम नागरिकों की सुरक्षा के साथ भी खिलवाड़ है.

छत्तीसगढ़ @25 कार्यक्रम में विकास की बात

छत्तीसगढ़ राज्य स्थापना के 25 वर्ष पूरे होने के अवसर पर आयोजित ‘छत्तीसगढ़ @25 : शिफ्टिंग द लेंस' कार्यक्रम में अमित शाह ने राज्य की विकास यात्रा पर विस्तार से बात की. उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ आज केवल खुद आगे नहीं बढ़ रहा, बल्कि ‘नए भारत' के निर्माण में भी अहम भूमिका निभा रहा है. विकसित भारत @2047 की दिशा में छत्तीसगढ़ एक मजबूत स्तंभ बनकर उभर रहा है.

‘विकसित छत्तीसगढ़' सिर्फ नारा नहीं

केंद्रीय गृह मंत्री ने कहा कि “विकसित छत्तीसगढ़” कोई खोखला नारा नहीं है. यह 25 वर्षों की सोच, स्पष्ट विचारधारा और सुशासन की निरंतर यात्रा का परिणाम है. उन्होंने कहा कि कभी छोटे राज्यों को लेकर संदेह जताया जाता था, लेकिन छत्तीसगढ़, झारखंड और उत्तराखंड ने यह साबित कर दिया कि अगर शासन की दिशा साफ हो, तो छोटे राज्य भी बड़े विकास मॉडल बन सकते हैं.

छोटे राज्यों पर पुराने सवाल और आज की हकीकत

अमित शाह ने याद दिलाया कि जब छत्तीसगढ़, झारखंड और उत्तराखंड के गठन के लिए आंदोलन चल रहे थे, तब कांग्रेस की सरकार थी. उस समय कहा जाता था कि ये छोटे राज्य कैसे टिकेंगे, संसाधन कहां से आएंगे और विकास कैसे होगा. उन्होंने बताया कि उस दौर में छत्तीसगढ़ भोपाल से 500 किलोमीटर से ज्यादा दूर था और संयुक्त मध्यप्रदेश की प्रशासनिक संरचना ऐसी थी कि इस क्षेत्र के साथ न्याय करना मुश्किल था. यह किसी मुख्यमंत्री की नाकामी नहीं, बल्कि व्यवस्था की सीमा थी.

अटल बिहारी वाजपेयी का ऐतिहासिक फैसला

शाह ने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने छोटे राज्यों के गठन का ऐतिहासिक और दूरदर्शी फैसला लिया. उन्होंने स्पष्ट किया कि यह कोई प्रयोग नहीं था, बल्कि जनता की आकांक्षाओं को पूरा करने का निर्णय था. इसी सोच के तहत मध्यप्रदेश से छत्तीसगढ़, बिहार से झारखंड और उत्तरप्रदेश से उत्तराखंड का गठन हुआ.

राज्य विभाजन: भाजपा और कांग्रेस का फर्क

अमित शाह ने राज्य विभाजन के उदाहरण देते हुए कहा कि अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व में हुए विभाजन शांतिपूर्ण रहे. आज मध्यप्रदेश-छत्तीसगढ़, बिहार-झारखंड और उत्तरप्रदेश-उत्तराखंड एक-दूसरे के पूरक बनकर देश के विकास में योगदान दे रहे हैं. इसके उलट, कांग्रेस शासन में आंध्रप्रदेश-तेलंगाना विभाजन के दौरान संसद में हालात बिगड़े और दोनों राज्यों के बीच कड़वाहट लंबे समय तक बनी रही.

25 वर्षों में छत्तीसगढ़ की बदली तस्वीर

केंद्रीय गृह मंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ ने अपने 25 वर्षों में बड़ा बदलाव देखा है. कभी ‘बीमारू' राज्यों में गिने जाने वाले मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ आज विकसित राज्यों की कतार में खड़े हैं. उन्होंने बताया कि इन 25 वर्षों में से करीब 18 साल भाजपा और 7 साल कांग्रेस की सरकार रही. कुल मिलाकर राज्य ने बीमारू स्थिति से निकलकर विकास की मजबूत राह पकड़ी है.

आर्थिक प्रगति के ठोस आंकड़े

अमित शाह ने आर्थिक आंकड़ों का जिक्र करते हुए कहा कि 25 वर्षों में छत्तीसगढ़ का वार्षिक बजट 30 गुना बढ़ा है. प्रति व्यक्ति आय में 17 गुना और जीएसडीपी में 25 गुना वृद्धि हुई है. उन्होंने कहा कि राज्य की अर्थव्यवस्था से जुड़े सभी 16 प्रमुख संकेतकों में उल्लेखनीय सुधार हुआ है.

कृषि, स्वास्थ्य और शिक्षा में सुधार

उन्होंने बताया कि राज्य में सिंचाई क्षमता दोगुनी हुई है. खरीफ फसलों का उत्पादन तीन गुना और रबी फसलों का उत्पादन लगभग छह गुना बढ़ा है. स्वास्थ्य और शिक्षा के क्षेत्र में भी बड़ा सुधार हुआ है. जिला अस्पतालों की संख्या 7 से बढ़कर 30 हो गई है, मेडिकल कॉलेज 1 से बढ़कर 16 हो गए हैं और आंगनबाड़ी भवनों में 18 गुना वृद्धि हुई है.

कुपोषण और मृत्यु दर में कमी

अमित शाह ने कहा कि कुपोषण से होने वाली मृत्यु दर 61 से घटकर 15 रह गई है. मातृ मृत्यु दर 365 से घटकर 146 और शिशु मृत्यु दर 79 से घटकर 37 पर आ गई है. ये आंकड़े बताते हैं कि स्वास्थ्य सेवाओं में कितना सुधार हुआ है.

आदिवासी कल्याण में छत्तीसगढ़ आगे

आदिवासी कल्याण पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ की साक्षरता दर 65 प्रतिशत से बढ़कर 80 प्रतिशत हो गई है. जहां पहले एक भी एकलव्य आवासीय विद्यालय नहीं था, आज 75 संचालित हो रहे हैं. छात्रावासों में पढ़ने वाले बच्चों की संख्या भी तीन गुना बढ़ी है. अमित शाह ने कहा कि आदिवासी कल्याण के मामले में छत्तीसगढ़ देश में अग्रणी है.

माओवाद: विकास नहीं, विचारधारा की चुनौती

माओवादी समस्या पर बात करते हुए केंद्रीय गृह मंत्री ने कहा कि यह सिर्फ विकास या कानून-व्यवस्था का मुद्दा नहीं है, बल्कि पूरी तरह विचारधारा से जुड़ी चुनौती है. उन्होंने साफ कहा कि बंदूक के जरिए किसी समस्या का समाधान भारतीय संविधान की आत्मा के खिलाफ है.

आत्मसमर्पण की अपील और 2026 का लक्ष्य

अमित शाह ने दोहराया कि सरकार किसी पर गोली नहीं चलाना चाहती. हथियार छोड़ने वालों के लिए सरकार ने सम्मान का रास्ता खोल रखा है. उन्होंने आदिवासी युवाओं से अपील की कि वे आत्मसमर्पण कर मुख्यधारा में लौटें. साथ ही उन्होंने भरोसा जताया कि केंद्र और राज्य सरकार मिलकर 31 मार्च 2026 से पहले देश को माओवादी समस्या से पूरी तरह मुक्त करने के लक्ष्य की ओर तेजी से बढ़ रही हैं.

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ज़ुल्फ़िकार अली
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