साहित्य

V.S. Naipaul: पाकिस्तानी पत्रकार से वी एस नायपॉल ने की थी दूसरी शादी, जानिए उनके जीवन से जुड़ी 10 बातें

V.S. Naipaul: पाकिस्तानी पत्रकार से वी एस नायपॉल ने की थी दूसरी शादी, जानिए उनके जीवन से जुड़ी 10 बातें

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नोबेल पुरस्कार से सम्मानित और भारतीय मूल के प्रसिद्ध लेखक वी एस नायपॉल का निधन हो गया है. शनिवार को नायपॉल के परिवार ने उनके निधन की सूचना दी. उनकी पत्नी नादिरा नायपॉल ने कहा, 'उन्होंने रचनात्मकता और उद्यम से भरी जिंदगी जी.

 Book Review: आदि शंकराचार्य के जीवन और दर्शन का पुनर्पाठ

 Book Review: आदि शंकराचार्य के जीवन और दर्शन का पुनर्पाठ

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यूं तो आदि शंकराचार्य पर केंद्रित तमाम किताबें लिखी गई हैं, लेकिन लेखक, कूटनीतिज्ञ और राजनेता पवन कुमार वर्मा की हालिया किताब "आदि शंकराचार्य-हिंदू धर्म के महानतम विचारक" तमाम किताबों से अलग है. पवन कुमार वर्मा ने मूल किताब अंग्रेजी में - "Adi Shankaracharya : Hinduism's Greatest Thinker" के नाम से लिखी है और अंग्रेजी से हिंदी में इसका तर्जुमा धीरज कुमार ने किया है. यात्रा वृतांत शैली में लिखी गई यह किताब आदि शंकराचार्य के जीवन और दर्शन का व्यापक चित्रण है. 

'हसीनाबाद' : सपने और सच के बीच का फ़ासला

'हसीनाबाद' : सपने और सच के बीच का फ़ासला

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यह अंदाज़ा था कि गीताश्री जब उपन्यास लिखेंगी तो कोई स्त्री-गाथा उसके केंद्र में होगी. 'हसीनाबाद' को पढ़ते हुए इस स्तर पर उनसे निराशा नहीं होती. उनके उपन्यास के केंद्र में गोलमी नाम की एक युवा नृत्यांगना है जो 'सपने देखती नहीं बुनती है'.

Book Review: साए की तरह पीछा करने वाला एक अजनबी ऐसा भी...

Book Review: साए की तरह पीछा करने वाला एक अजनबी ऐसा भी...

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सोचिए यदि कोई ऐसा हो जो आपका सातों दिन चारों पहर पीछा करें तो आपको कैसा लगेगा. हमेशा डर बना रहेगा या फिर सुरक्षित रहने का एहसास होगा. इसी मजेदार अनुभव के लिए इस श्रंखला की तीनों किताब को पढ़ें.

उपन्यासकार सुरेंद्र मोहन पाठक से NDTV की खास मुलाकात

उपन्यासकार सुरेंद्र मोहन पाठक से NDTV की खास मुलाकात

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उपन्यासकार सुरेंद्र मोहन पाठक कहते हैं कि जब हिंदी के पाठक थे, अस्सी और नब्बे का दशक था, पल्प फिक्शन का बाजार था, हिंदी साहित्य जिसे गंभीर साहित्य कहते हैं उसके प्रकाशकों ने या पल्प के प्रकाशकों ने उनलोगो ने कोई ऐसी कोशिश नहीं कि हिंदी साहित्य का बाजार बने.

किताब-विताब - कहीं कुछ नहीं : जीवन के राग और खटराग की कहानियां

किताब-विताब - कहीं कुछ नहीं : जीवन के राग और खटराग की कहानियां

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क्या कहानियों को हमेशा बहुत सुगठित होना चाहिए- इस तरह कि कथा कभी भटकती न लगे और एक ही लय में बात पूरी हो जाए? ऐसे उस्ताद और माहिर क़िस्सागो होते हैं जो पाठकों को बिल्कुल वशीभूत कर अपने साथ लिए चलते हैं- अनुभव और रोमांच की अपनी रची हुई दुनिया की सैर कराते हैं. पाठक इन कहानियों के संसार से अभिभूत लौटता है.

Book Review: श्रीलाल शुक्ल की 'राग दरबारी' का नया वर्जन है 'मदारीपुर जंक्शन'

Book Review: श्रीलाल शुक्ल की 'राग दरबारी' का नया वर्जन है 'मदारीपुर जंक्शन'

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किसी भी कृति यानी रचना की सफलता पाठकों, दर्शकों और श्रोताओं की प्रतिक्रिया के आधार पर तय होती है. किताबों-उपन्यासों की सफलता अब न सिर्फ समीक्षाएं तय करती हैं, बल्कि बेस्ट सेलिंग कैटेगरी होना भी उसका मानक बन गया है. हालांकि, कुछ किताबें ऐसी होती हैं कि जो समीक्षा के इतर पाठक उससे अपने आप को इस कदर कनेक्ट करता है, कि न वह सिर्फ उसे पढ़ता है, बल्कि कईयों को सजेस्ट भी करता है. इसी कड़ी में आज पेश है एक किताब- 'मदारीपुर जंक्शन'. बालेंदु द्विवेदी की रचना 'मदारीपुर जंक्शन' किताब न सिर्फ समीक्षा की कसौटी पर खड़ी उतरती है, बल्कि पाठकों को भी गांव और इंडिया से इतर भारत के परिदृश्य को समझाने में मददगार साबित होती है. 

छबीला रंगबाज़ का शहर : हमारे समय में कथा-लेखन की अलग लकीर

छबीला रंगबाज़ का शहर : हमारे समय में कथा-लेखन की अलग लकीर

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अपने पहले कहानी संग्रह 'छबीला रंगबाज़ का शहर' के साथ प्रवीण कुमार ने हिंदी के समकालीन कथा-संसार में एक अलग तरह की दस्तक दी है. हिंदी में प्रचलित कथा लेखन में वे दिलचस्प ढंग से तोड़फोड़ करते दिखाई पड़ते हैं.

मेटा 2018 : रंगकर्मी और फिल्म डायरेक्टर विजया मेहता को दिया जाएगा लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड

मेटा 2018 : रंगकर्मी और फिल्म डायरेक्टर विजया मेहता को दिया जाएगा लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड

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महिन्द्रा द्वारा आयोजित किए जाने वाले सालाना महिन्द्रा एक्सिलेंस इन थिएटर अवार्ड्स (मेटा) में ‘मेटा 2018’ का लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड प्रसिद्ध रंगकर्मी, अभिनेता और फ़िल्म निर्देशक विजया मेहता को दिया जाएगा.

नहीं रहे ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित मशहूर कवि केदारनाथ सिंह, साहित्य जगत में शोक की लहर

नहीं रहे ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित मशहूर कवि केदारनाथ सिंह, साहित्य जगत में शोक की लहर

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हिन्दी की समकालीन कविता और आलोचना के सशक्त हस्ताक्षर और अज्ञेय द्वारा संपादित ‘तीसरा सप्तक’ के प्रमुख कवि डॉ. केदारनाथ सिंह का आज यहां निधन हो गया. केदारनाथ सिंह 84 वर्ष के थे.  उनके परिवार में एक पुत्र और पांच पुत्रियां हैं. पारिवारिक सूत्रों ने बताया कि डॉ. केदारनाथ सिंह को करीब डेढ़ माह पहले कोलकाता में निमोनिया हो गया था. इसके बाद से वह बीमार चल रहे थे. पेट के संक्रमण के चलते उनका आज रात करीब पौने नौ बजे एम्स में निधन हो गया.

उच्च शिक्षा में शोध पर दिया जाए जोर

उच्च शिक्षा में शोध पर दिया जाए जोर

आज भारत में बड़ी मात्रा में बेरोजगारी है, जिसके कारण कई बार सामाजिक तनाव भी पैदा हो जाता है. आज तकनीक रोज बदल रही है, हमें बदलती तकनीक के साथ चलना होगा नहीं तो हम पिछड़ जाएंगे.

थिएटर ओलंपिक्स : पहले सप्ताह दो विदेशी नाट्य प्रस्तुतियां रहीं चर्चा में

थिएटर ओलंपिक्स : पहले सप्ताह दो विदेशी नाट्य प्रस्तुतियां रहीं चर्चा में

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भारत में पहली बार आयोजित और विश्व के आठवें थिएटर ओलंपिक्स का इस रविवार दिल्ली में पहला सप्ताह बीता. दिल्ली के अलावा चेन्नई में 18 फरवरी, तिरुअनंतपुरम में 22 फरवरी और भुवनेश्वर में 24 फ़रवरी को थिएटर ओलंपिक्स का उद्घाटन हो चुका है. इस सप्ताह में यह कोलकाता, बैंगलुरु और पटना में शुरु हो जाएगा.

किताब-विताब : 'जग दर्शन का मेला', एक छूटती हुई विधा की ज़रूरी याद

किताब-विताब : 'जग दर्शन का मेला', एक छूटती हुई विधा की ज़रूरी याद

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शिवरतन थानवी की यह किताब 'जग दर्शन का मेला' अलग-अलग छिटपुट समयों में लिखी गई उनकी डायरियों और टिप्पणियों से बनती हैं. इन टिप्पणियों के बीच हमें राजस्थान की शैक्षिक पहल के सूत्र भी मिलते हैं और उसके सामाजिक पर्यावरण के भी. शिवरतन थानवी बीच-बीच में साहित्यिक कृतियों पर भी टिप्पणी करते चलते हैं, व्यक्तित्वों पर भी और आयोजनों पर भी.

किताब-विताब : 'खोखला पहाड़'- यह तिब्बत की तकलीफ़ है

किताब-विताब : 'खोखला पहाड़'- यह तिब्बत की तकलीफ़ है

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समकालीन चीनी लेखकों में महत्वपूर्ण स्थान रखने वाले आ लाए मूलतः तिब्बती लेखक हैं. उनको पढ़ते हुए तिब्बत का लेखक होने की कुछ मुश्किलें और विडंबनाएं समझ में आती हैं. आ लाए की परवरिश उस चीन या तिब्बत में हुई, जहां सांस्कृतिक क्रांति की आंधी पुराने सारे मूल्यतंत्र को तहस-नहस कर देने पर आमादा थी. वह पुरानी आस्थाओं को ध्वस्त कर रही थी, पुराने ज्ञान को संदेह से देख रही थी और एक ऐसी दुनिया बनाना चाहती थी जिसमें किसानों और मजदूरों का वर्चस्व हो.

किताब-विताब : प्रसिद्धि के 'रपटीले राजपथ' पर भटकी कथा

किताब-विताब : प्रसिद्धि के 'रपटीले राजपथ' पर भटकी कथा

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युवा कथाकार इंदिरा दांगी के पास समर्थ, समृद्ध और संवेदनशील भाषा है. किसी भी स्थिति को वे बहुत वास्तविकता के साथ रचने की क्षमता रखती हैं. उनकी कई कहानियां अपने असंभव लगते अंतों के बावजूद इसी वजह से विश्वसनीय और सशक्त बन पड़ी हैं.

दर्शकों के मन में बस गईं साल 2017 की यह पांच यादगार नाट्य प्रस्तुतियां

दर्शकों के मन में बस गईं साल 2017 की यह पांच यादगार नाट्य प्रस्तुतियां

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साल 2017 बीतने को है और साल 2018 दस्तक दे रहा है. इस साल देश-दुनिया के साथ-साथ राजधानी दिल्ली में भी रंगमंचीय अभिव्यक्तियां विवध रंगों के साथ दर्शकों के सामने आईं. कुछ यादगार नाट्य प्रदर्शनों ने सफलता के झंडे गाड़े और प्रेक्षकों के मन में अमिट छाप छोड़ गए.

मिर्ज़ा  ग़ालिब: उर्दू-फारसी के इस महान शायर के बारे में जान‍िए 7 बातें

मिर्ज़ा ग़ालिब: उर्दू-फारसी के इस महान शायर के बारे में जान‍िए 7 बातें

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उर्दू और फारसी भाषा के मशहूर शायर मिर्ज़ा ग़ालिब का आज जन्‍मदिन है. उनका असली नाम मिर्जा असदुल्‍लाह बेग खान था. वो ग़ालिब नाम से शायरी लिखा करते थे और धीरे-धीरे दुनिया उन्‍हें इसी नाम से जानने लगी.

साहित्य के क्षेत्र में देश का सर्वोच्च सम्मान ज्ञानपीठ पुरस्कार लेखिका कृष्णा सोबती

साहित्य के क्षेत्र में देश का सर्वोच्च सम्मान ज्ञानपीठ पुरस्कार लेखिका कृष्णा सोबती

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साहित्य के क्षेत्र में दिया जाने देश का सर्वोच्च सम्मान ज्ञानपीठ पुरस्कार वर्ष 2017 के लिए हिन्दी की लब्धप्रतिष्ठित लेखिका कृष्णा सोबती को प्रदान किया जायेगा.

पीएम मोदी की कविताएं अब मलयाली में भी, काव्य संग्रह का विमोचन हुआ

पीएम मोदी की कविताएं अब मलयाली में भी, काव्य संग्रह का विमोचन हुआ

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अब केरल के लोग भी पीएम नरेंद्र मोदी के साहित्य कौशल से रूबरू हो सकेंगे. उनकी चुनिंदा कविताओं का संग्रह ‘आंख आ धन्य छे’ के मलयाली संस्करण का सोमवार को तिरुवनंतपुरम में एक कार्यक्रम में विमोचन किया गया.

जानिए क्या है बायोलॉजिकल क्लॉक, जिसके लिए 3 वैज्ञानिकों को मिलेगा नोबेल

जानिए क्या है बायोलॉजिकल क्लॉक, जिसके लिए 3 वैज्ञानिकों को मिलेगा नोबेल

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तीन वैज्ञानिकों ने इसका पता लगाया है कि क्यों वो लोग जो ज्यादा लंबा सफर करते हैं अलग-अलग टाइम जोन में जाने से परेशान हो जाते हैं. उन्हें नींद नहीं आती और सेहत को लेकर उन्हें परेशानियां क्यों होने लगती हैं. आइए जानते हैं आखिर क्या है ये बायोलॉजिकल क्लॉक.

 
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