जब भी किसी सिरप या लिक्विड दवा की बोतल पर Contains Alcohol लिखा दिखता है तो लोगों के मन में सवाल उठता है कि आखिर दवा में एल्कोहल क्यों मिलाया जाता है? क्या इससे नशा होता है? क्या यह शरीर के लिए नुकसानदायक है? दरअसल, दवाओं में मिलाया जाने वाला एल्कोहल शराब पीने के उद्देश्य से नहीं, बल्कि दवा को प्रभावी और सुरक्षित बनाए रखने के लिए उपयोग किया जाता है. इस लेख में जानें दवा में एल्कोहल मिलाने से जुड़े हर सवाल का जवाब.
केंद्र सरकार का फैसला, बिना डॉक्टर के प्रिस्क्रिप्शन के नहीं मिलेगी ये दवाएं
केंद्र सरकार ने दवाओं के दुरुपयोग पर रोक लगाने के लिए बड़ा कदम उठाया है. अब 12% से अधिक एथिल एल्कोहल (Ethyl Alcohol) वाली ओरल दवाएं बिना डॉक्टर के प्रिस्क्रिप्शन यानी पर्चे के नहीं बेची जा सकेंगी. सरकार ने ऐसी दवाओं को Schedule H1 श्रेणी में शामिल किया है. इसका मतलब है कि इन दवाओं की बिक्री केवल डॉक्टर के वैध पर्चे पर होगी और मेडिकल स्टोर संचालकों को इनके स्टॉक और बिक्री का रिकॉर्ड भी निर्धारित नियमों के अनुसार रखना होगा. इस फैसले का उद्देश्य दवाओं के गलत इस्तेमाल और दुरुपयोग को रोकना है.

दवाओं में किस तरह का एल्कोहल मिलाया जाता है
दवाओं में आमतौर पर एथिल एल्कोहल (Ethanol/Ethyl Alcohol) का उपयोग किया जाता है. यह औषधीय गुणवत्ता (Pharmaceutical Grade) का एथेनॉल होता है, जिसे दवा बनाने के लिए निर्धारित मानकों के अनुसार इस्तेमाल किया जाता है. वहीं, मेथिल एल्कोहल (Methanol) का उपयोग दवाओं में नहीं किया जाता, क्योंकि यह अत्यधिक विषैला होता है और स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा पैदा कर सकता है.
दवाओं में एल्कोहल मिलाने की जरूरत क्यों है
दवा के तत्वों को घोलने के लिए
कई दवाओं के सक्रिय तत्व (Active Ingredients) केवल पानी में पूरी तरह नहीं घुलते. ऐसे में एथिल एल्कोहल सॉल्वेंट (Solvent) या को-सॉल्वेंट (Co-solvent) के रूप में काम करता है, जिससे सभी तत्व अच्छी तरह घुलकर पूरे सिरप या लिक्विड दवा में समान रूप से मिल जाते हैं.
दवा को लंबे समय तक सुरक्षित रखने के लिए
एथिल एल्कोहल एक प्रभावी प्रिजर्वेटिव (Preservative) भी है. यह कई प्रकार के बैक्टीरिया, फंगस और अन्य सूक्ष्मजीवों की वृद्धि को नियंत्रित करने में मदद करता है, जिससे दवा जल्दी खराब नहीं होती और उसकी गुणवत्ता बनी रहती है.
दवा की स्थिरता (Stability) बनाए रखने के लिए
कुछ लिक्विड दवाओं में एथिल एल्कोहल दवा के विभिन्न घटकों और फ्लेवरिंग एजेंट्स को स्थिर बनाए रखने में मदद करता है. इससे दवा की गुणवत्ता और प्रभाव लंबे समय तक बनी रहती है.
दवा के प्रभावी फॉर्मूलेशन में मदद
कुछ दवाओं में एथिल एल्कोहल सक्रिय तत्वों की घुलनशीलता (Solubility) बढ़ाने में मदद करता है, जिससे दवा का फॉर्मूलेशन अधिक प्रभावी बनता है. हालांकि, यह हर दवा पर लागू नहीं होता.
क्या दवा में मौजूद एल्कोहल से नशा हो सकता है?
डॉक्टर द्वारा बताई गई मात्रा में दवा लेने पर सामान्य परिस्थितियों में इससे नशा नहीं होता. दवा में मौजूद एथिल एल्कोहल का उपयोग चिकित्सकीय उद्देश्य से सीमित मात्रा में किया जाता है.
हालांकि, यदि कोई व्यक्ति ऐसी दवाओं का जरूरत से ज्यादा सेवन करता है या जानबूझकर उनका दुरुपयोग करता है, तो इससे नशे जैसे प्रभाव, चक्कर आना, अत्यधिक नींद, बेहोशी या अन्य गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं. यही वजह है कि सरकार ने 12% से अधिक एथिल एल्कोहल वाली कुछ ओरल दवाओं की बिक्री पर सख्त नियम लागू किए हैं.
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