मध्यप्रदेश के दतिया विधानसभा उपचुनाव में वोट ईवीएम में बंद हो चुके हैं, लेकिन मतदाताओं की खामोशी ने भाजपा और कांग्रेस की बेचैनी बढ़ा दी है. इस चुनाव की सबसे बड़ी राजनीतिक कहानी आरोपों, उम्मीदवारों या प्रचार के नारों में नहीं, बल्कि तीन आंकड़ों में छिपी है. 2018 के विधानसभा चुनाव में दतिया में 76.77 प्रतिशत मतदान हुआ था.
2023 में मतदान बढ़कर 80.2 प्रतिशत पहुंच गया और भाजपा के कद्दावर नेता नरोत्तम मिश्रा चुनाव हार गए. अब 2026 के उपचुनाव में मतदान गिरकर 71.44 प्रतिशत रह गया है.यानी पांच साल में पहले मतदान करीब साढ़े तीन प्रतिशत बढ़ा और फिर उपचुनाव में लगभग नौ प्रतिशत नीचे आ गया.
उपचुनाव में पुरुषों ने अधिक 74.09 प्रतिशत और महिलाओं ने अपेक्षाकृत कम 68.48 प्रतिशत मतदान किया. यह केवल चुनावी थकान है या दतिया की राजनीति में किसी बड़े बदलाव की आहट, इसका जवाब 3 अगस्त को मिलेगा.
घर बैठने वाला वोटर किसका था?
अब सवाल सीधा है. जो मतदाता इस बार घर से नहीं निकला, वह भाजपा का था या कांग्रेस का? मतदान का असली रहस्य कुल प्रतिशत से ज्यादा ग्रामीण और शहरी अंतर में है. दतिया के शहरी क्षेत्र में करीब 62 प्रतिशत मतदान हुआ, जबकि ग्रामीण इलाके में लगभग 78 प्रतिशत वोट पड़े. यानी शहर के मुकाबले गांवों में 16 प्रतिशत ज्यादा मतदान हुआ. यह अंतर दोनों दलों को अलग-अलग उम्मीद दे रहा है.

datia by election voter turnout urban vs rural voting trend bjp congress news
भाजपा के भीतर भाजपा और कांग्रेस के भीतर कांग्रेस की लड़ाई
भाजपा का विकास पर रहा फोकस
भाजपा प्रत्याशी आशुतोष तिवारी ने मतदान को भयमुक्त माहौल और विकास के मॉडल से जोड़ा. उन्होंने चुनाव प्रचार में मिले समर्थन को अपार आशीर्वाद बताया और कांग्रेस पर झूठ तथा षड्यंत्र की राजनीति करने का आरोप लगाया. तिवारी ने जीतू पटवारी पर भी तीखा हमला किया. उनका कहना था कि खुद बड़े अंतर से चुनाव हार चुके पटवारी को अपने व्यवहार में गंभीरता लानी चाहिए. भाजपा की रणनीति स्पष्ट थी. चुनाव को स्थानीय असंतोष से हटाकर विकास, कानून व्यवस्था और संगठन की ताकत के इर्द-गिर्द रखा जाए.

datia by election: मतदान करते भाजपा के कद्दावर नेता नरोत्तम मिश्रा.
नरोत्तम मिश्रा का दावा- आशुतोष जीतेंगे और कमल खिलेगा
पूर्व गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा ने भी कांग्रेस की शिकायतों को हार से पहले की हताशा बताया. उन्होंने कहा कि कांग्रेस हारती है तो आरोप लगाती है. मिश्रा ने पुराने दतिया की याद दिलाते हुए कहा कि एक दौर में यहां गैंगवार होती थी, लेकिन भाजपा सरकार में माहौल बदला और विकास हुआ. उनका दावा बिल्कुल सीधा था. आशुतोष तिवारी जीतेंगे और कमल खिलेगा.
कांग्रेस कार्यकर्ताओं को ले गई पुलिस
जिला निर्वाचन अधिकारी वानखेडे ने आरोपों का जवाब दिया
जिला निर्वाचन अधिकारी स्वप्निल वानखेडे ने बूथ कैप्चरिंग की संभावना को खारिज किया. उन्होंने कहा कि सभी 291 मतदान केंद्रों पर शांतिपूर्ण मतदान हुआ और हर केंद्र पर सीसीटीवी कैमरों से निगरानी की गई.उनके मुताबिक शिकायत मिलने पर रामसागर में तत्काल टीम भेजी गई. मतदान केंद्र के अंदर से किसी एजेंट को उठाने की बात सामने नहीं आई. बाहर अनावश्यक रूप से मौजूद लोगों को शांतिपूर्ण मतदान के लिए हटाया गया. बिना नंबर की गाड़ियों पर उनका कहना था कि दो हजार पुलिसकर्मियों की तैनाती के लिए कम समय में निजी वाहनों का अधिग्रहण किया गया था. प्रशासन चुनाव को शांतिपूर्ण बता रहा है. कांग्रेस सवाल उठा रही है. भाजपा आरोपों को संभावित हार की भूमिका बता रही है. अब यही आरोप मतगणना के बाद जीत या हार के नए तर्क बनेंगे.
कांग्रेस नेता अवधेश नायक का छलका दर्द
पूर्व विधायक भारती का बड़ा बयान
पूर्व विधायक राजेंद्र भारती ने मतदान के दिन सबसे विस्फोटक राजनीतिक बयान दिया. उन्होंने नरोत्तम मिश्रा पर बेहद विवादास्पद टिप्पणी करते हुए दावा किया कि 2023 में उन्होंने ऐसे व्यक्ति को हराया था, जिसने खुद को दतिया का सबसे बड़ा गुंडा बताया था. भारती के आरोप पर नरोत्तम मिश्रा की प्रतिक्रिया सामने नहीं आई. लेकिन भारती का सबसे बड़ा राजनीतिक दावा यह था कि यह चुनाव भाजपा बनाम कांग्रेस नहीं, बल्कि भाजपा बनाम भाजपा है. उनके मुताबिक असली मुकाबला नरोत्तम मिश्रा और मुख्यमंत्री के बीच है. इस बयान ने भाजपा की अंदरूनी राजनीति को चुनावी चर्चा के केंद्र में ला दिया. उम्मीदवार आशुतोष तिवारी हैं, लेकिन चुनाव नरोत्तम मिश्रा की प्रतिष्ठा और राजनीतिक भविष्य से भी जुड़ा हुआ है.
भारती ने अपनी ही पार्टी के प्रत्याशी पर कसा तंज
भारती ने अपनी पार्टी के प्रत्याशी घनश्याम सिंह पर भी तंज कसा. उन्होंने कहा कि मैदान किसी और ने तैयार किया और अब उस पर घनश्याम सिंह खेल रहे हैं. उन्होंने सेवढ़ा में उनकी पिछली हारों का भी उल्लेख किया. यानी कांग्रेस जिस नेता की 2023 की जीत को अपना आधार बना सकती थी, वही नेता इस बार अपने प्रत्याशी की ताकत पर सवाल उठा रहा है.
सबसे अधिक मतदान सत्ता के खिलाफ

datia by election: आशुतोष तिवारी या घनश्याम सिंह कौन मारेगा उपुचनाव की बाजी?
तो भाजपा को हो सकता है लाभ
2026 के उपचुनाव में मतदान 71.44 प्रतिशत है. लगभग नौ प्रतिशत की गिरावट का अर्थ हजारों मतदाताओं का बूथ तक नहीं पहुंचना है. यदि इनमें बड़ी संख्या 2023 में कांग्रेस के साथ जुड़े अतिरिक्त मतदाताओं की थी, तो भाजपा को लाभ हो सकता है. लेकिन यदि शहर में भाजपा समर्थक मतदाता उदासीन रहा और गांवों में कांग्रेस का वोट एकजुट होकर निकला, तो 78 प्रतिशत ग्रामीण मतदान भाजपा की गणना बिगाड़ सकता है.
मजबूत नेता को हार का सामना करना पड़ा
शहर शांत रहा, गांव का वोटर बाहर निकला
इस बार शहर अपेक्षाकृत शांत रहा. गांव बड़ी संख्या में बाहर निकले. कांग्रेस ने फर्जी मतदान और दबाव के आरोप लगाए. भाजपा ने इसे हार की हताशा बताया. टिकट से वंचित नेता भावुक हुए. पूर्व विधायक ने अपनी ही पार्टी के उम्मीदवार और भाजपा दोनों पर हमला किया. इसलिए दतिया का फैसला केवल आशुतोष तिवारी और घनश्याम सिंह में से एक को चुनने का फैसला नहीं है. यह नरोत्तम मिश्रा की राजनीतिक प्रासंगिकता की परीक्षा है. यह राजेंद्र भारती के प्रभाव का परीक्षण है. यह कांग्रेस संगठन की एकजुटता का सवाल है. यह मुख्यमंत्री के नेतृत्व में भाजपा की चुनावी पकड़ का पैमाना है.
3 अगस्त को सामने आएगा विजेता का नाम
3 अगस्त को ईवीएम खुलेगी तो केवल विजेता का नाम नहीं निकलेगा. यह भी पता चलेगा कि 2018 के 76.77 प्रतिशत, 2023 के 80.2 प्रतिशत और 2026 के 71.44 प्रतिशत के बीच दतिया के मतदाता ने अपनी राजनीति किस ओर मोड़ी है. फिलहाल भाजपा कह रही है कि उसका मतदाता अनुशासित होकर बूथ तक पहुंचा. कांग्रेस मान रही है कि गांवों ने चुपचाप बदलाव के लिए वोट दिया. लेकिन, दतिया का सबसे बड़ा रहस्य उन मतदाताओं के पास है, जो इस बार मतदान केंद्र तक नहीं पहुंचे. संभव है कि चुनाव का विजेता ईवीएम में पड़े वोटों से कम और नहीं पड़े वोटों से ज्यादा तय हो.
दतिया उपचुनाव: 71.44% वोटिंग के साथ थमी दिग्गजों की सांसें, 2023 के मुकाबले इतना गिरा वोट प्रतिशत
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं