दुनिया के 7 अजूबों में शामिल ताजमहल एक बार फिर कानूनी और ऐतिहासिक बहस के केंद्र में है. इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक याचिका पर सुनवाई करते हुए केंद्र सरकार और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है. याचिका में दावा किया गया है कि ताजमहल मूल रूप से 'तेजो महालय' नाम का एक प्राचीन शिव मंदिर था और इसकी वैज्ञानिक व भौतिक जांच कराई जानी चाहिए. फिलहाल हाईकोर्ट ने इन दावों पर कोई फैसला नहीं दिया है और केवल संबंधित पक्षों से जवाब मांगा है. पर ये पूरा मामला क्या है, 10 प्वाइंट में समझें.
1. ताजमहल परिसर के भीतर ‘भगवान श्री अग्रेश्वर महादेव नागनाथेश्वर विराजमान तेजो महालय' मंदिर होने का दावा करते हुए एक याचिका दाखिल की गई. इलाहाबाद हाईकोर्ट ने याचिका स्वीकार करते हुए केंद्र सरकार, ASI और अन्य पक्षों से जवाब मांगा है.
2. याचिकाकर्ताओं का कहना है कि ताजमहल वास्तव में 'तेजो महालय' नाम का प्राचीन शिव मंदिर था, जिसे बाद में मुगल काल में मकबरे का स्वरूप दिया गया. याचिकाकर्ताओं का कहना है कि शाहजहां ने नई इमारत नहीं बनवाई, बल्कि पहले से मौजूद संरचना में बदलाव कराया.
3. इस याचिका के माध्यम से मांग की गई है कि आगरा की ट्रायल कोर्ट और एडिशनल डिस्ट्रिक्ट जज की ओर से पारित किए गए पुराने आदेशों को पूरी तरह से रद्द किया जाए. जिनमें विवादित परिसर का वैज्ञानिक या एडवोकेट कमिश्नर के जरिए सर्वे कराने की मांग को खारिज कर दिया गया था.
4. याचिका में ताजमहल परिसर का वैज्ञानिक, भौतिक और वास्तु सर्वेक्षण कराने की मांग की गई है. दावा है कि इससे परिसर में मौजूद संभावित धार्मिक प्रतीकों और मूल संरचना की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी. याचिकाकर्ताओं का कहना है कि ताजमहल में घंटियों जैसी नक्काशी मौजूद है, जो मंदिरों में आमतौर पर देखने को मिलती है. इमारत के शीर्ष और अन्य हिस्सों में कलश जैसे प्रतीक दिखाई देते हैं, जिन्हें हिंदू मंदिरों की पहचान माना जाता है.
5. याचिकाकर्ताओं ने अपनी दलीलों के समर्थन में 109 ऐतिहासिक और वास्तु संबंधी बिंदुओं का उल्लेख किया है, जो ये दर्शाते हैं कि यहां हिंदू मंदिर था. हालांकि इन दावों की सत्यता पर अभी अदालत ने कोई टिप्पणी नहीं की है.
6. याचिकाकर्ताओं का दावा है कि ताजमहल की अष्टकोणीय संरचना प्राचीन हिंदू मंदिर वास्तुकला से मेल खाती है. याचिकाकर्ताओं ने कहा है कि बंद कमरों का वैज्ञानिक सर्वे कराया जाए ताकि यह पता चल सके कि वहां कोई प्राचीन अवशेष मौजूद हैं या नहीं.
7. हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार और ASI को काउंटर एफिडेविट दाखिल करने का निर्देश दिया है. मामले की अगली सुनवाई में दोनों पक्ष अपना आधिकारिक पक्ष रखेंगे.
8. ताजमहल को 'तेजो महालय' बताने का दावा कई वर्षों से समय-समय पर उठता रहा है. इससे जुड़े विभिन्न मुकदमे पहले भी अदालतों में दायर हुए हैं, लेकिन अब तक किसी अदालत ने इस दावे को स्थापित तथ्य के रूप में स्वीकार नहीं किया है.
9. यह समझना जरूरी है कि हाईकोर्ट ने अभी केवल नोटिस जारी किया है. अदालत ने यह नहीं कहा है कि ताजमहल मंदिर था या नहीं. मामले पर अंतिम निर्णय सुनवाई और सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद ही होगा.
10. यह मामला केवल इतिहास का नहीं, बल्कि पुरातत्व, सांस्कृतिक विरासत और कानूनी प्रक्रिया से भी जुड़ा है. इसलिए अंतिम निष्कर्ष अदालत के फैसले और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही तय होगा.
नोट-
उपरोक्त बिंदु याचिकाकर्ताओं के दावे हैं. भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI), केंद्र सरकार या इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अभी तक इन दावों की पुष्टि नहीं की है. मामला न्यायालय में विचाराधीन है.
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