Premanand Maharaj: भारतीय समाज में संतों का काफी ज्यादा आदर होता है और उनके चाहने वालों की संख्या भी लाखों-करोड़ों में होती है. कई ऐसे संत हैं, जिनका आशीर्वाद लेने के लिए लोगों की भीड़ जुटती है और गरीब से लेकर अमीर तक, सभी लाइन में खड़े रहते हैं. प्रेमानंद महाराज भी ऐसे ही संतों में शामिल हैं, जिनकी एक झलक पाने के लिए भक्त घंटों तक खड़े रहते हैं. पिछले कुछ दिनों से प्रेमानंद महाराज अपनी सेहत को लेकर चर्चा में हैं, उनकी सेहत बिगड़ने के चलते तमाम भक्त चिंता में हैं. ऐसे में आज हम आपको प्रेमानंद महाराज का असली नाम बताएंगे और ये भी बताएंगे कि वो कैसे कृष्ण भक्त बने.
क्या है प्रेमानंद महाराज का असली नाम?
प्रेमानंद महाराज को पहले अनिरुद्ध कुमार पांडेय के रूप में लोग जानते थे, लेकिन जब उन्होंने कृष्ण और राधा की भक्ति में अपना जीवन लगा दिया तो लोग उन्हें प्रेमानंद महाराज के नाम से जानने लगे. प्रेमानंद महाराज का असली नाम आज काफी कम लोग जानते हैं, उनकी आवाज सुनते ही लोगों के मुंह से सिर्फ प्रेमानंद महाराज का नाम ही निकलता है. उन्हें प्रेमानंद गोविंद शरण जी महाराज के नाम से लोग जानते हैं.
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कैसे संन्यासी बन गए प्रेमानंद महाराज?
अनिरुद्ध कुमार पांडेय को बचपन से ही पूजा-पाठ में रुचि थी. वो गीता का पाठ करते थे और भगवान की भक्ति में डूब जाते थे. इसके बाद उन्होंने संन्यास की तरफ रुख कर लिया और बिना किसी को बताए घर से निकल गए. यहां से अनिरुद्ध कुमार पांडेय वाराणसी पहुंचे, जहां वो कई संतों के साथ मिलकर पूजा और ध्यान करने लगे.
ऐसे बदल गया जीवन
अनिरुद्ध कुमार पांडेय के मन में अचानक एक दिन विचार आया कि वो एक बार वृंदावन जरूर जाएंगे. इससे ठीक पहले उन्होंने रासलीला देखी और यहीं से उनका जीवन बदलने लगा. पहली बार उनके मन में राधा-कृष्ण की भक्ति जागी और वो सीधे वृंदावन पहुंच गए. यहां उनकी मुलाकात राधा वल्लभ संप्रदाय से हुई और वो उनके साथ जुड़कर भक्ति के गीत गाने लगे. मोहित गोस्वामी जी से दीक्षा लेने के बाद वो एक रसिक संत बन गए.
इसके बाद अनिरुद्ध कुमार पांडेय राधा-कृष्ण भक्ति का प्रचार करने लगे और लोगों को उनकी बातें अच्छी लगने लगी. उनकी सादगी भरी वाणी में एक गजब का जादू था, जिसने आम लोगों के साथ कई बड़ी हस्तियों को भी प्रभावित किया. धीरे-धीरे लोग उन्हें प्रेमानंद महाराज के रूप में जानने लगे और आज हजारों लोग उनके दर्शन करने आते हैं.
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