भारत में अधिकतर बुज़ुर्ग माता-पिता अपने बच्चों या पोते-पोतियों के साथ एक ही छत के नीचे रहना पसंद करते हैं. बुज़ुर्ग माता-पिता को उम्मीद होती है कि उनके बच्चे उनका ध्यान रखेंगे. लेकिन जो आंकड़े हैं, वो चौंकाने वाले हैं. देश में 40 प्रतिशत बुज़ुर्गों की हालत खराब है और कई ऐसे हैं जिनकी कोई इनकम नहीं है. यूनाइटेड नेशंस पॉपुलेशन एजेंसी (UNFPA) की एक रिपोर्ट के अनुसार, अब युवाओं में ऐसी सोच पैदा हो रही है, जो बुज़ुर्गों को बोझ समझती हैं. देश में लगभग 15 मिलियन सीनियर सिटिजन अकेले रहने पर मजबूर हैं. क्योंकि अपनों ने उनका साथ छोड़ दिया है.
तेजी से बढ़ रही है बुज़ुर्गों की आबादी
भारत 1.4 बिलियन लोगों की आबादी वाला देश है. देश में बुज़ुर्गों की आबादी भी तेजी से बढ़ रही है. यूनाइटेड नेशंस पॉपुलेशन एजेंसी (UNFPA) के साल 2023 के डेटा के मुताबिक, भारत में दुनिया में सबसे ज्यादा जवान लोग हैं. साथ ही, आबादी तेजी से बूढ़ी भी हो रही है.
कानूनन मां-बाप के प्रति बच्चों की क्या जिम्मेदारी?
बुजुर्ग माता-पिता के लिए, मेंटेनेंस एंड वेलफेयर ऑफ पेरेंट्स एंड सीनियर सिटीजन एक्ट, 2007 बनाया गया है. 60 साल या उससे ज़्यादा उम्र वाले लोगों को सीनियर सिटिजन माना गया है. ये एक्ट सीनियर सिटिजन को कई तरह के अधिकार देता है जैसे-
मेंटेनेंस ऑब्लिगेशन (सेक्शन 4-18): बच्चों की अपने माता-पिता का मेंटेनेंस करने की कानूनी ज़िम्मेदारी है.
ओल्ड एज होम (सेक्शन 19): राज्य सरकारों को हर जिले में ओल्ड एज होम बनाना जरूरी है.
मेडिकल सपोर्ट (सेक्शन 20) : सीनियर सिटिजन के लिए मेडिकल केयर के प्रोविज़न इस सेक्शन में है.
सेक्शन 23 : ये सेक्शन प्रॉपर्टी के अधिकारों की सुरक्षा देता है. इसके तहत प्रॉपर्टी ट्रांसफर को अमान्य किया जा सकता है.
ओल्ड एज होम सीनियर सिटिजन का सहारा
सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय ने बुज़ुर्गों के लिए अटल वयो अभ्युदय योजना (AVYAY) कुछ सालों पहले शुरू की थी. स्कीम के तहत देश भर में 29 राज्यों/UTs में 696 सीनियर सिटिज़न होम चल रहे हैं. इसके अलावा कई गैर सरकारी संगठन ने भी सीनियर सिटिज़न होम खोल रखे हैं. सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय की साल 2021 की एक रिपोर्ट के अनुसार मंत्रालय NGO द्वारा चलाए जा रहे 551 ओल्ड एज होम को सपोर्ट कर रहा है. जिनमें 16,290 बेसहारा बुज़ुर्गों को रहने की जगह दी गई है. 551 ओल्ड एज होम में से सबसे ज्यादा ओल्ड एज होम ओडिश राज्य में है. जिनकी संख्या 91 है.
| संख्या | राज्य/UT | सीनियर सिटिज़न होम्स की संख्या | लाभार्थियों की संख्या |
| 1. | आंध्र प्रदेश | 75 | 2000 |
| 2. | अरुणाचल प्रदेश | 3 | 150 |
| 3. | असम | 40 | 1295 |
| 4. | बिहार | 1 | 25 |
| 5. | छत्तीसगढ़ | 6 | 275 |
| 6. | दिल्ली | 3 | 100 |
| 7. | गोवा | 2 | 100 |
| 8. | गुजरात | 10 | 375 |
| 9. | हरियाणा | 15 | 375 |
| 10. | हिमाचल प्रदेश | 2 | 50 |
| 11. | झारखंड | 2 | 100 |
| 12. | कर्नाटक | 39 | 1195 |
| 13. | केरल | 13 | 125 |
| 14. | मध्य प्रदेश | 19 | 600 |
| 15. | महाराष्ट्र | 37 | 1135 |
| 16. | मणिपुर | 30 | 800 |
| 17. | मेघालय | 2 | 100 |
| 18. | मिजोरम | 2 | 50 |
| 19. | नागालैंड | 3 | 100 |
| 20. | ओडिशा | 91 | 2500 |
| 21 | पुडुचेरी | 1 | 25 |
| 22 | पंजाब | 3 | 75 |
| 23 | राजस्थान | 16 | 600 |
| 24 | तमिलनाडु | 66 | 1795 |
| 25 | तेलंगाना | 19 | 475 |
| 26 | त्रिपुरा | 3 | 75 |
| 27 | उत्तर प्रदेश | 28 | 920 |
| 28 | उत्तराखंड | 50 | 29 |
| 29 | पश्चिम बंगाल | 26 | 825 |
| कुल | 551 | 16290 |
तेलंगाना सरकार ला रही है अनोखा कानून
तेलंगाना सरकार एक ऐसा काननू लाने वाली है, जिसके तहत उन सरकारी कर्मचारियों के वेतन से कटौती की जाएगी, जो अपने बुजुर्ग माता-पिता की देखभाल नहीं कर रहे हैं. तेलंगाना के मुख्यमंत्री ए रेवंत रेड्डी ने गुरुवार को कहा कि राज्य सरकार विधानसभा के आनेवाले बजट सेशन में एक कानून लाएगी, जिसके तहत उन सरकारी कर्मचारियों की सैलरी से 10-15 परसेंट की कटौती की जाएगी जो अपने बुज़ुर्ग माता-पिता की देखभाल नहीं कर पाते हैं.
नए भर्ती हुए ग्रुप-1 और ग्रुप-2 अधिकारियों के लिए एक ट्रेनिंग प्रोग्राम के आखिरी सेशन में बोलते हुए, रेड्डी ने कहा, "युवा अधिकारियों को ये अच्छी नौकरियां अपने माता-पिता के त्याग की वजह से मिली हैं, और उन्हें उनकी ठीक से देखभाल करनी चाहिए. आने वाले विधानसभा सेशन में, हम उन लोगों की सैलरी से 10-15 परसेंट की कटौती करने और उसे माता-पिता के अकाउंट में जमा करने की योजना बना रहे हैं जो अपने माता-पिता की देखभाल नहीं कर पाते हैं."
अन्य देशों में क्या है कानून
भारत के अलावा कोरिया, चीन जैसे देशों में बुजुर्गों के हक के लिए कई तरह के काननू बनाए गए हैं. जो कि उनको सुरक्षा प्रदान करते हैं. इसके अलावा फ्रांस ने साल 2004 में सिविल कोड का आर्टिकल, 207 पास किया था. इस कानून के अनुसार फ्रांस के नागरिकों को अपने बूढ़े माता-पिता के साथ संपर्क रखना ज़रूरी है. वहीं अमेरिका और इंग्लैंड में बुजुर्गों की देखभाल से जुड़ा ऐसा कोई काननू नहीं है.
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