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This Article is From Oct 30, 2025

ISIS जासूस आदिल हुसैनी के लिए किसने बनाए जाली पासपोर्ट? फर्जी BARC साइंटिस्ट मामले में बड़ा खुलासा

ISI Spy Arrest: पुलिस सूत्रों के मुताबिक, अख्तर जमशेदपुर का रहने वाला है और उसने अपना पुश्तैनी मकान 1996 में बेच दिया था, लेकिन वह वहां के पुराने संपर्कों के ज़रिए फर्जी पहचान और दस्तावेज़ बनवाता रहा.

ISIS जासूस आदिल हुसैनी के लिए किसने बनाए जाली पासपोर्ट?  फर्जी BARC साइंटिस्ट मामले में बड़ा खुलासा
पाक जासूस मामले में मुंबई पुलिस का बड़ा खुलासा.
सांकेतिक फोटो
  • मुंबई क्राइम ब्रांच ने फर्जी BARC वैज्ञानिक अख्तर हुसैनी के विदेशी कॉल्स की पुलिस ट्रेसिंग शुरू की है.
  • मुनज्जिल खान पर अख्तर के भाई के लिए दो फर्जी पासपोर्ट जमशेदपुर के पुराने पते से बनवाने का आरोप है.
  • अख्तर और उसका भाई आदिल हुसैनी नकली पहचान पत्रों का इस्तेमाल कर विदेश यात्रा कर चुके हैं.
मुंबई:

मुंबई क्राइम ब्रांच की क्राइम इंटेलिजेंस यूनिट (CIU) ने फर्जी BARC वैज्ञानिक के मामले में एक और बड़ा खुलासा किया है. जांच में सामने आया है कि आरोपी अख्तर कुतुबुद्दीन हुसैनी उर्फ अलेक्जेंडर पामर ने कई विदेशी कॉल्स किए थे, जिनकी अब पुलिस ट्रेसिंग कर रही है. पुलिस जांच में पता चला है कि झारखंड का रहने वाले आरोपी मुनज्जिल खान ने अख्तर के भाई के लिए दो फर्जी पासपोर्ट तैयार किए थे. ये पासपोर्ट जमशेदपुर के आज़ाद नगर इलाके के उस मकान के पते से बनाए गए थे, जो अख्तर के पिता की मौत के बाद करीब 30 साल पहले बेचा जा चुका था.

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पाक जासूसों के फर्जी दस्तावेज किसने किए तैयार?

फर्जी दस्तावेज़ मोहम्मद आदिल हुसैनी और नसीमुद्दीन सैयद आदिल हुसैनी के नाम से तैयार किए गए थे. पुलिस को शक है कि अख्तर और उसका भाई आदिल, दोनों ने इन्हीं नकली पहचान पत्रों का इस्तेमाल कर विदेश यात्राएं कीं. सूत्रों के मुताबिक, दिल्ली पुलिस ने हाल ही में अख्तर के भाई आदिल हुसैनी को गिरफ्तार किया है. आदिल ने ही अख्तर की मुलाकात मुनज्जिल खान से कराई थी. पूछताछ के दौरान अख्तर ने पुलिस को गुमराह करने की कोशिश की और कहा कि उसका भाई अब इस दुनिया में नहीं है.

ISI जासूस के पास से क्या-क्या मिला?

अख्तर को मुंबई के यारी रोड, वर्सोवा इलाके से गिरफ्तार किया गया था. पुलिस ने उसके पास से कई फर्जी पासपोर्ट, आधार कार्ड, पैन कार्ड और BARC का नकली आईडी कार्ड बरामद किया, जिस पर अली रज़ा हुसैन लिखा था. जांच में यह भी सामने आया है कि अख्तर का झूठ बोलने और पहचान बदलने का लंबा इतिहास रहा है. साल 2004 में उसे दुबई से डिपोर्ट किया गया था, जब उसने वहां खुद को “क्लासिफाइड डॉक्युमेंट्स” रखने वाला वैज्ञानिक बताया था. इसके बाद वह तेहरान और दुबई भी फर्जी पासपोर्ट से गया था.

जासूस अख्तर को फर्जी शैक्षणिक सर्टिफिकेट्स किसने दिलवाए?

इस मामले में अख्तर के पास से पहले 14 नक्शे और संदिग्ध न्यूक्लियर डेटा बरामद हुए थे, जिनकी अभी भी जांच जारी है.इतना ही नहीं, जांचकर्ताओं ने अब मुनज्जिल खान के भाई इलियाज खान को भी वॉन्टेड घोषित किया है, जो अख्तर को फर्जी शैक्षणिक सर्टिफिकेट्स दिलाने में मदद करता था, जिसमें SSC, HSC, BSc, BE (Mechanical) और MEBSH (Safety) की डिग्रियां शामिल हैं.

पुलिस सूत्रों के मुताबिक, अख्तर जमशेदपुर का रहने वाला है और उसने अपना पुश्तैनी मकान 1996 में बेच दिया था, लेकिन वह वहां के पुराने संपर्कों के ज़रिए फर्जी पहचान और दस्तावेज़ बनवाता रहा.

जासूस अख्तर अन्य मामलों में भी वॉन्टेड

पुलिस सूत्रों के अनुसार, अख्तर मेरठ पुलिस के लिए भी वॉन्टेड है. वहां कांकरखेड़ा थाने में उसके खिलाफ एक मामला दर्ज है, जिसमें उस पर उत्तर प्रदेश सरकार के खिलाफ भड़काने और असंतोष फैलाने का आरोप है.

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