- ऋषिकेश में 2022 में हुई अंकिता भंडारी हत्या मामले में चार साल बाद फिर विवाद उभरा है.
- अंकिता के माता-पिता ने दुष्यंत गौतम की राज्यपाल नियुक्ति पर CBI जांच पूरी होने तक रोक लगाने की मांग की.
- इंडिया गेट पर अंकिता के माता-पिता का धरना राहुल गांधी और प्रियंका समेत कांग्रेस नेताओं के समर्थन में हुआ था.
उत्तराखंड के ऋषिकेश में साल 2022 में एक रिजॉर्ट की रिसेप्शनिस्ट अंकिता भंडारी की हत्या हुई थी.4 साल बाद यह मामला एक बार फिर सुर्खियों में है. इसकी वजह अंकिता के माता-पिता वीरेंद्र सिंह भंडारी और सोनी देवी का दिल्ली के इंडिया गेट पर धरना है. नए राज्यपालों की नियुक्ति की सूची में भाजपा नेता दुष्यंत कुमार गौतम का नाम शामिल होने और उन्हें सिक्किम का राज्यपाल बनाए जाने के बाद अंकिता के माता-पिता ने इसका विरोध किया.
अंकिता के माता-पिता की मांग है कि जब तक मामले की CBI जांच पूरी नहीं हो जाती और बार-बार चर्चा में आ रहे कथित ‘VIP' की पहचान सार्वजनिक नहीं होती, तब तक दुष्यंत गौतम की नियुक्ति पर रोक लगाई जाए. परिवार का आरोप है कि कथित VIP की वजह से जांच प्रभावित हो रही है और राज्यपाल के पद पर नियुक्ति के बाद जांच पर और असर पड़ सकता है.
दुष्यंत गौतम की नियुक्ति पर तत्काल रोक लगाने की मांग
14 अक्टूबर को इंडिया गेट पर अंकिता के माता-पिता के धरने में राहुल गांधी और प्रियंका गांधी भी शामिल हुए. इसके बाद कांग्रेस के कई अन्य नेता भी वहां पहुंचे. राहुल और प्रियंका गांधी करीब दो घंटे बाद वहां से चले गए, जबकि कांग्रेस के कुछ नेता अंकिता के माता-पिता के साथ धरने पर मौजूद रहे. 15 अक्टूबर की सुबह पुलिस ने प्रदर्शन कर रहे लोगों को हिरासत में लिया, हालांकि बाद में उन्हें छोड़ दिया गया. इसी मामले को लेकर लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने राष्ट्रपति को पत्र लिखकर दुष्यंत गौतम की नियुक्ति पर तत्काल रोक लगाने की मांग भी की.
कांग्रेस ने देहरादून में बड़ा मोर्चा निकाला
पार्टी की प्रदेश प्रभारी कुमारी शैलजा ने देहरादून में विरोध-प्रदर्शन की रणनीति बनाई. शुक्रवार को कांग्रेस ने देहरादून में बड़ा मोर्चा निकाला, जिसमें प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल, पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत, उत्तराखंड चुनाव प्रबंधन समिति के अध्यक्ष हरक सिंह रावत और चुनाव संचालन समिति के अध्यक्ष प्रीतम सिंह समेत कई वरिष्ठ नेता और कार्यकर्ता शामिल हुए.
कांग्रेस की उत्तराखंड प्रभारी कुमारी शैलजा ने केंद्र और राज्य सरकार पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि जिस कथित VIP के नाम को लेकर सवाल उठ रहे हैं, उसे बचाने की कोशिश की जा रही है. उन्होंने सवाल उठाया कि CBI जांच किस दिशा में जा रही है और अब तक पूरे मामले की सच्चाई सामने क्यों नहीं आई है. शैलजा ने दुष्यंत गौतम की नियुक्ति का विरोध करते हुए इसे उत्तराखंड की जनता के अपमान से भी जोड़ा.
क्या है कांग्रेस की रणनीति?
इस पूरे घटनाक्रम के बीच कांग्रेस उत्तराखंड में अंकिता भंडारी मामले को लेकर आक्रामक नजर आ रही है. इससे पहले हल्द्वानी में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे से जुड़े ‘शुद्धिकरण' विवाद को लेकर भी पार्टी ने भाजपा को घेरा था. कांग्रेस इन मुद्दों के जरिए भाजपा सरकार के खिलाफ सामाजिक न्याय और महिला सुरक्षा जैसे सवालों को प्रमुखता से उठा रही है. अंकिता भंडारी मामले के जरिए कांग्रेस महिला और युवा मतदाताओं के बीच अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश कर रही है, जबकि खरगे से जुड़े विवाद को पार्टी दलित सम्मान से जोड़कर उठा रही है. चुनाव से पहले कांग्रेस की कोशिश इन मुद्दों को लगातार उठाकर भाजपा सरकार पर राजनीतिक दबाव बनाने की है.
ये भी पढ़ें : "WE THE छोटू": राहुल गांधी ने नेहा बोरा को दी अहमियत तो कांग्रेस के छात्र संगठन NSUI के नेताओं का छलका दर्द
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं