उत्तरप्रदेश को लेकर अभी कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के बीच बातचीत शुरू भी नहीं हुई है मगर उसके पहले दोनों तरफ से नेताओं की बयानबाजी तेज हो गई है. समाजवादी पार्टी की कैराना से सांसद इकरा हसन ने कहा कि 'यूपी में केवल अखिलेश चलेंगे. उत्तरप्रदेश में कांग्रेस अकेले कुछ नहीं कर सकती. अखिलेश ही बीजेपी को हरा सकते हैं.'
इसके जवाब में सहारनपुर से कांग्रेस के सांसद इमरान मसूद ने बयान दे दिया कि 'अतिआत्मविश्वास ठीक नहीं होता, पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस के साथ क्या हुआ याद रखिए.'
यहीं नहीं कांग्रेस के नेता उदित राज ने कहा कि '2024 लोकसभा में सपा की जीत कांग्रेस की मदद के वजह से हुई है, नहीं तो 2019 में सपा के केवल 6 सांसद थे.'
बयानबाजी से रोक क्यों नहीं रहीं पार्टियां?
दोनों तरफ से इस तरह की बयानबाजी दोनों पार्टियों के लिए ठीक नहीं है. फिर ये भी सवाल उठता है कि कहीं पार्टियां जानबूझकर तो अपने सांसदों या नेताओं को इस तरह के बयान देने से नहीं रोक रही हैं ताकि इससे सीटों के बंटवारे से पहले एक-दूसरे पर दबाव बनाया जाए.
क्या यह सब रणनीति के तहत किया जा कहा है? सवाल ये भी है कि कहीं गठबंधन से पहले माहौल तो खराब नहीं हो जाएगा क्योंकि उत्तरप्रदेश में सपा को मिली 37 सीटों की वजह से उनके सांसदों में गजब का उत्साह है. वहीं 6 सीटें जीतने वाली कांग्रेस के सांसद भी अपने को कम नहीं मान रहे हैं.
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मुस्लिम वोटरों को लेकर है चिंता!
दरअसल, यहां पर मुस्लिम वोटरों को लेकर दोनों दलों में चिंता है. कांग्रेस को लगता है कि देश का मुस्लिम समुदाय राहुल गांधी की तरफ देख रहा है जबकि समाजवादी पार्टी मुस्लिम वोटों को अपने पाले में मान कर ही चलती है.
मुस्लिम वोटों की ये लड़ाई अभी पश्चिमी उत्तरप्रदेश में ज्यादा दिखाई दे रही है. जैसे आज ही कांग्रेस ने आमिर आलम और उनके बेटे नवाजिश आलम को कांग्रेस में शामिल कराया. आलम परिवार और इकरा हसन परिवार की राजनीतिक लड़ाई काफी पुरानी है.
एक समय मुलायम सिंह इस इलाके में रैली करने गए थे तब आमिर आलम को अपनी कार में बैठाकर रैली स्थल तक गए थे, मगर इकरा हसन का परिवार सपा के नजदीक पहुंचता गया और आमिर आलम का परिवार चंद्रशेखर आजाद रावण की पार्टी में शामिल हो गए. अब कांग्रेस ने उन्हें अपने पाले में कर लिया है और उनको कांग्रेस में शामिल कराया गया.
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नेताओं का क्या है कहना?
कांग्रेस के सांसद या नेताओं का सपा पर कटाक्ष भरे बयान पर जब एनडीटीवी ने कांग्रेस के उत्तरप्रदेश के प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम ने कहा कि 'नेताओं को संयम बरतने की जरूरत है. यदि आप किसी से आदर चाहते हैं तो आपको भी दूसरों का आदर करना चाहिए.'
जाहिर है राजेंद्र पाल गौतम जी को भी मालूम है कि इस तरह की बयानबाजी से किसी का फायदा नहीं होने वाला.
वहीं, जब सपा नेताओं के बयान पर NDTV ने सपा सांसद राजीव राय से बात की तो उन्होंने कहा कि 'मैं राजेन्द्र गौतम के बयान से सहमत हूं और उत्तरप्रदेश में इंडिया गठबंधन है जो लोकसभा चुनाव में था और विधानसभा चुनाव में भी रहेगा और अखिलेश जी के नेतृत्व में उत्तरप्रदेश में सरकार बनेगी.'
उन्होंने कहा कि आज के दिन यूपी में बीजेपी से ज्यादा ताकतवर समाजवादी पार्टी है. कांग्रेस के नेता भी बयानबाजी से बचें क्योंकि इस तरह की बयानबाजी से भाजपा को ही फायदा पहुंचेगा.
कहने का मतलब है कि कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के बड़े नेताओं को दोनों तरफ से हो रही बयानबाजी से होने वाले नुकसान का अंदाजा है मगर बयानवीर नेताओं का क्या करें? कभी-कभी उनके निजी स्वार्थ पार्टी पर भारी पड़ जाते हैं.
NDTV को यह भी जानकारी मिली है कि इन नेताओं से पार्टी के वरिष्ठ नेता बातचीत करके उनको हिदायत भी देने वाले हैं. अच्छा होगा जितनी जल्दी हो सके टिकट के बंटवारे की बातचीत शुरू होने से पहले बयानों का ये सिलसिला रुक जाए वही कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के हित में होगा.
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