- जयपुर के केकड़ी नगरपालिका में सभापति चुनाव के बाद बीजेपी और कांग्रेस के बीच चैंबर की चाबी को लेकर विवाद हो गया
- कांग्रेस के अनिल मित्तल ने सभापति का चुनाव 21-19 से जीता जबकि उपाध्यक्ष पद पर RLP के राजेंद्र चौधरी जीते
- सभापति अनिल मित्तल ने जमीन पर लेटकर विरोध प्रदर्शन किया. कांग्रेस के आज केकड़ी बंद का आह्वान किया है
जयपुर के केकड़ी नगरपालिका में सभापति और उपाध्यक्ष का चुनाव पूरा होते ही बीजेपी और कांग्रेस के बीच नया विवाद खड़ा हो गया है. सभापति चुनाव से ठीक पहले पार्षदों की खरीद-फरोख्त के आरोप लगे और अब निर्वाचित सभापति के चैंबर को लेकर दोनों दल आमने-सामने हैं. मंगलवार को नवनिर्वाचित सभापति अनिल मित्तल और पूर्व विधायक डॉ. रघु शर्मा की मौजूदगी में कांग्रेस पार्षदों और समर्थकों ने नगरपालिका परिसर में धरना दिया. विवाद विधायक जनसुनवाई केंद्र की चाबी को लेकर शुरू हुआ. सभापति अनिल मित्तल ने जमीन पर लेटकर विरोध प्रदर्शन किया. कांग्रेस के आज केकड़ी बंद का आह्वान किया है. कांग्रेस नेता बाजार बंद करवा रहे हैं. पुलिस बल भी तैनात है.
केकड़ी नगरपालिका में विवाद
दरअसल केकड़ी नगरपालिका के सभापति पद पर कांग्रेस के अनिल मित्तल ने बीजेपी के विनीत चौरड़िया को 21-19 से हराया था. मित्तल वार्ड 25 से कांग्रेस के पार्षद हैं, इससे पहले वे 2015 से 2020 तक भाजपा के टिकट पर केकड़ी नगरपालिका के चेयरमैन रह चुके हैं. इसके अगले दिन उपाध्यक्ष पद का चुनाव हुआ. बीजेपी के कैलाश चौधरी, RLP के राजेंद्र चौधरी और कांग्रेस के आसाराम वैष्णव ने नामांकन दाखिल किया. बाद में आसाराम वैष्णव ने नाम वापस ले लिया. कांग्रेस ने RLP प्रत्याशी राजेंद्र चौधरी का समर्थन किया मतदान में राजेंद्र चौधरी को 22 और बीजेपी के कैलाश चौधरी को 18 वोट मिले. इस तरह राजेंद्र चौधरी चार वोट से उपाध्यक्ष चुने गए. वे सभापति चुनाव में भी कांग्रेस के समर्थन में वोट कर चुके थे.

चुनाव से पहले ऑडियो को लेकर विवाद
सभापति चुनाव से एक दिन पहले बीजेपी ने कांग्रेस प्रत्याशी अनिल मित्तल पर बीजेपी पार्षद राजेंद्र चौधरी को फोन कर वोट के बदले पैसे की पेशकश करने का आरोप लगाया था. बीजेपी के मुताबिक कथित बातचीत में पहले 31 लाख और बाद में 51 लाख रुपए तक की पेशकश की बात सामने आई. राजेंद्र चौधरी ने बातचीत रिकॉर्ड करने का दावा किया था. इसके बाद विधायक शत्रुघ्न गौतम बीजेपी पार्षदों के साथ जिला निर्वाचन अधिकारी के पास पहुंचे और कार्रवाई की मांग की. गौतम ने आरोप लगाया था कि चुनाव में पार्षदों को प्रभावित करने का प्रयास किया गया है और ऐसे लोगों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए. वहीं अनिल मित्तल ने आरोपों को खारिज करते हुए वायरल ऑडियो-वीडियो को फर्जी और AI से तैयार बताया.
अब सभापति के चैंबर की चाबी पर विवाद
मंगलवार शाम करीब पांच बजे सभापति अनिल मित्तल, पूर्व विधायक डॉ. रघु शर्मा और बड़ी संख्या में कांग्रेस पार्षद नगरपालिका पहुंचे. यहां विधायक जनसुनवाई केंद्र की चाबी को लेकर विवाद हो गया. कांग्रेस नेताओं का कहना है कि जिस कमरे में विधायक का जनसुनवाई केंद्र चल रहा है, वह सभापति का चैंबर है और निर्वाचित सभापति को उसका उपयोग करने दिया जाना चाहिए. चाबी नहीं मिलने पर मित्तल और उनके समर्थक नगरपालिका परिसर में धरने पर बैठ गए. रघु शर्मा भी धरने में शामिल हुए. करीब चार घंटे तक धरना और नारेबाजी चलती रही. विवाद बढ़ने की आशंका को देखते हुए नगरपालिका परिसर में पुलिस बल तैनात किया गया.

सभापति अनिल मित्तल ने चेतावनी दी कि अगर चाबी नहीं दी गई तो केकड़ी बंद कराया जाएगा. उन्होंने कहा कि जनता ने उन्हें सभापति चुना है और निर्वाचित बोर्ड को उसके अधिकार मिलने चाहिए. धरने के दौरान डॉ. रघु शर्मा ने कहा कि नगरपालिका का चैंबर निर्वाचित सभापति का है. उनका कहना था कि केकड़ी को जिला बनाए जाने के दौरान प्रशासनिक जरूरतों के चलते अलग-अलग व्यवस्थाएं की गई थीं लेकिन अब नगरपालिका के निर्वाचित बोर्ड को उसके कार्यालय और संसाधन उपलब्ध कराए जाने चाहिए. रघु शर्मा ने प्रशासन से मामले में हस्तक्षेप कर चैंबर की चाबी सभापति को सौंपने की मांग की.
गहलोत, पायलट, डोटासरा और जूली ने भी उठाया मुद्दा
पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए कहा कि कांग्रेस के अनिल मित्तल के सभापति चुने जाने के बावजूद उन्हें अपने ही चैंबर में बैठने के लिए इंतजार करना पड़ रहा है. उन्होंने जिला प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप कर चैंबर निर्वाचित सभापति को सौंपने की मांग की. सचिन पायलट ने कहा कि जनता ने अनिल मित्तल को नगरपालिका अध्यक्ष चुना है और निर्वाचित अध्यक्ष को अपने स्थान पर काम करने देना चाहिए. उन्होंने बीजेपी से जनादेश का सम्मान करने की बात कही. प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा और नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने भी मामले को लेकर भाजपा पर निशाना साधा. दोनों नेताओं ने निर्वाचित जनप्रतिनिधियों के अधिकारों का सम्मान करने और प्रशासन से मामले में हस्तक्षेप की मांग की.
बीजेपी विधायक का अपना पक्ष
दूसरी तरफ विधायक शत्रुघ्न गौतम ने कांग्रेस के आरोपों को राजनीतिक दबाव बताया. उनका कहना है कि जनसुनवाई केंद्र की व्यवस्था जनता की समस्याएं सुनने के लिए की गई है और नगरपालिका भवन में किसी कक्ष के इस्तेमाल को लेकर नियम और प्रक्रिया के आधार पर निर्णय होना चाहिए.अगर कोई बदलाव करना है तो उसके लिए प्रस्ताव लाना चाहिए. कुल मिलाकर केकड़ी में कमरे का विवाद अब राजनीतिक लड़ाई में बदल गया है. कांग्रेस की केकड़ी बंद के बाद अब आगे की लड़ाई पर सबकी नजर है.
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