- यूपी में राज्यसभा की 10वीं सीट पर BJP-SP के बीच दिलचस्प मुकाबले की तैयारी
- राज्यसभा चुनाव में BSP हो सकती है शून्य, BJP और SP का गणित समझिए
- राज्यसभा के साथ MLC चुनाव भी तय करेंगे सियासी माहौल
उत्तर प्रदेश में अगले विधानसभा चुनाव (UP Election 2027) से पहले एक और सियासी जंग शुरू होने जा रही है. अगले दो महीनों के भीतर यूपी में राज्यसभा की 10 और विधान परिषद की 11 सीटों पर चुनाव होने हैं. भले ही इन चुनावों का सीधा असर 2027 के विधानसभा चुनाव पर नहीं पड़ेगा, लेकिन इनके नतीजे राजनीतिक माहौल और दलों की ताकत का संकेत जरूर देंगे. इस जीत के साथ जातीय और क्षेत्रीय संतुलन ज़रूर साधा जा सकता है. भाजपा अपने सहयोगियों के समर्थन से 8वीं राज्यसभा सीट पर नजर लगाए हुए है, जबकि समाजवादी पार्टी तीसरा सांसद भेजने के लिए अतिरिक्त वोट जुटाने की कोशिश कर रही है. वहीं शिक्षक और स्नातक निर्वाचन क्षेत्र की सीटों पर होने वाले विधान परिषद चुनाव भी क्षेत्रीय और राजनीतिक समीकरणों की नई तस्वीर पेश करेंगे.
कौन सी सीटें हो रही हैं खाली
राज्यसभा में यूपी की दस सीटें और यूपी विधान परिषद में कुल 11 सीटें अगले दो महीनों में ख़ाली हो जाएंगी. राज्यसभा चुनाव की बात करें तो खाली होने वाली दस सीटों में वर्तमान में बीजेपी के पास 7, सपा के पास एक और बीएसपी के पास एक सीट है. बीजेपी के कोटे से राज्यसभा सदस्य बने डॉ दिनेश शर्मा ने अंडमान निकोबार का उप-राज्यपाल बनाए जाने के बाद इस्तीफ़ा दे दिया था. वहीं बीजेपी के जिन सदस्यों का कार्यकाल ख़त्म हो रहा है, उनमें केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी, पूर्व आईपीएस अधिकारी बृजलाल, सीमा द्विवेदी, नीरज शेखर, गीता शाक्य, अरुण सिंह और बीएल वर्मा शामिल हैं.
बची हुई एक सीट पर संभव है कि वरीयता के मतदान से तय हो कि कौन राज्यसभा जाएगा. ऐसे में एसपी और बीजेपी के बीच कड़ा मुकाबला देखने को मिल सकता है.

हरदीप सिंह पुरी की भी सीट हो रही है खाली
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क्या कहता है जीत का गणित?
राज्यसभा में एक सीट जीतने के लिए 37 विधायकों की ज़रूरत होगी. यूपी की कुल 403 विधानसभा सीटों में छह सदस्यों के निधन की वजह से वर्तमान में सदस्यों की संख्या 397 है. राज्यसभा की एक सीट का फार्मूला - कुल विधायक 397 ÷ (रिक्त सीटें 10 + 1) + 1 के आधार पर तय होता है. इस आधार पर प्रदेश में राज्यसभा की एक सीट के लिए 37 वोटों की जरूरत होगी. ऐसे में बीजेपी आसानी से 7 सांसद और सपा दो सांसद जिता लेगी. दसवीं सीट को लेकर ज़बरदस्त लड़ाई देखने को मिल सकती है.
ये तभी संभव है जब कुछ विधायक अपने द्वितीय वरीयता के वोट सपा के प्रत्याशी को दें. अगर ऐसा हुआ तो बीजेपी के लिए ये बड़ा झटका हो सकता है लेकिन अगर ऐसा नहीं हुआ तो बीजेपी इसका मनोवैज्ञानिक लाभ लेने से पीछे नहीं हटेगी.
विधायकाें का दल-बल क्या कहता है?
बात करें बीजेपी के नंबर्स की तो 2022 में बीजेपी के कुल 255 विधायक चुनाव जीते थे. वर्तमान में बीजेपी के सदस्यों की संख्या 256 है. बीजेपी अपने विधायकों के अलावा सहयोगी दलों के विधायकों का वोट लेगी. अपना दल (एस) के पास कुल 13, आरएलडी के पास कुल 9, सुभासपा के पास कुल 6 और निषाद पार्टी के कुल 5 विधायक हैं. राजा भइया की पार्टी का अगर बीजेपी को समर्थन मिला तो दो विधायक उसके भी इसमें जुड़ सकते हैं. ऐसे में बीजेपी को समर्थन देने वाले विधायकों की संख्या 291 हो जाएगी. इनके अलावा तीन निर्दलीय सदस्य हैं, जिनका समर्थन भी बीजेपी को मिल सकता है.
अब अगर बीजेपी ने वरीयता के आधार पर सपा के विधायकों को कन्विंस कर लिया तो यूपी विधानसभा चुनाव से पहले ये सपा को बीजेपी जी तरफ़ से. अदा झटका साबित होगा. विधानसभा में बसपा शून्य हो चुकी है. राज्यसभा में उसके इकलौते सदस्य का कार्यकाल खत्म होने के बाद पार्टी वहां भी शून्य पर पहुंच जाएगी.
विधान परिषद में कौन बनेगा 'प्रधान'?
अब बात करें यूपी विधान परिषद के चुनाव की तो उच्च सदन के लिए कुल 11 सीटों पर चुनाव होना है. शिक्षक निर्वाचन की 6 और स्नातक निर्वाचन की 5 सीटों पर चुनाव होना है. शिक्षक और स्नातक निर्वाचन में शिक्षक वोटर्स और ग्रेजुएट वोटर्स वोट करते हैं. ऐसे में ये चुनाव पूरी तरह प्रत्याशी की लोकप्रियता और स्वीकार्यता पर निर्भर करता है. हालांकि नतीजे जिसके पक्ष में आयेंगे, ज़ाहिर है मनोवैज्ञानिक लाभ उसे ही मिलना है.
विधान परिषद की शिक्षक और स्नातक निर्वाचन के चुनाव में सीधी भूमिका जनप्रतिनिधियों के बजाय स्नातकों एवं शिक्षकों की होगी. विधान परिषद में खाली होने वाली स्नातक सीटों में वाराणसी, इलाहाबाद-झांसी, लखनऊ, आगरा और मेरठ खंड शामिल हैं. वहीं शिक्षक निर्वाचन में गोरखपुर-फैजाबाद, आगरा, बरेली-मुरादाबाद, लखनऊ, मेरठ और वाराणसी सीटें शामिल हैं. राज्यसभा और विधानपरिषद के नतीजे विधानसभा चुनाव पर भले ही कोई असर डालने वाले नहीं हैं लेकिन यूपी के इस सबसे बड़े चुनाव से पहले ये नतीजे माहौल सेट करने के काम ज़रूर आयेंगे. अब देखना होगा कि कौन माहौल सेट करने में क़ामयाब होता है.
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