ममता बनर्जी की पार्टी टीएमसी के 20 बागी सांसदों ने 'नेशनलिस्ट सिटिजंस पार्टी ऑफ इंडिया' में विलय की घोषणा की है. इस बड़ी राजनीतिक उठापठक के बाद यह गुमनाम पार्टी अचानक से देश की राजनीति में चर्चा में आ गई है. तृणमूल कांग्रेस में चल रही बगावत में यह पार्टी एक बड़ी खिलाड़ी बनकर सामने आ रही है. सब यह समझने में लगे हैं कि NCPI पार्टी किस राज्य से हैं और टीएमसी के बागी सांसद इसी पार्टी में क्यों जा रहे हैं. इस पर NDTV को मिले दस्तावेजो में बड़ी जानकारी सामने आई है. जिसमें यह पता चला है कि यह राजनीतिक दल चुनाव आयोग के रिकॉर्ड में दर्ज हैं. NCPI पार्टी का चुनावी रिकॉर्ड, पार्टी को कहा से डोनेशन मिला है, उसका संगठन क्या है और कैसा रहा है. यह सब जानकारी सामने आई है.
चुनाव आयोग में दर्ज है NCPI
'नेशनलिस्ट सिटिजंस पार्टी ऑफ इंडिया' 2023 में बनी थी. जिसने त्रिपुरा विधानसभा चुनाव में अपने उम्मीदवार उतारे थे. NCPI पार्टी चुनाव आयोग के रिकॉर्ड में दर्ज है. इलेक्शन कमीशन की ऑडिट रिपोर्ट और डोनेशन रिकॉर्ड के मुताबिक पार्टी ने अपने वित्तीय दस्तावेज चुनाव आयोग में पेश किए थे. 2023 के चुनाव में पार्टी को चुनाव चिन्ह 'सात किरणों वाली पेन की निब' दिया गया था. चुनावी आंकड़ों के मुताबिक पार्टी को कुछ डोनेशन भी मिला था. हालांकि जमीनी स्तर पर पार्टी की पकड़ ज्यादा नहीं है.
त्रिपुरा में 3 सीटों पर उतारे थे उम्मीदवार
NCPI पार्टी ने 2023 के त्रिपुरा विधानसभा चुनाव में तीन सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे थे. चावमानु, कैलाशहर और अंबासा में पार्टी ने चुनाव लड़ा था. हालांकि किसी भी उम्मीदवार को 550 वोट भी नहीं मिले थे. चावमानु सीट पर 536 वोट, और कैलाशहर 286 वोट और अंबासा सीट पार्टी को 376 वोट मिले थे. यानि पार्टी का वोट आधार बिल्कुल सीमित रहा था. सभी उम्मीदवारों को 1,198 वोट मिले थे. कोई भी उम्मीदवार छाप नहीं छोड़ पाया था. लेकिन हालिया राजनीतिक घटनाक्रम के बाद इस पार्टी ने सभी का ध्यान आकर्षित कर दिया.
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कौन हैं पार्टी के अध्यक्ष उत्तिया कुंडू
NCPI के राष्ट्रीय अध्यक्ष का नाम उत्तिया कुंडू हैं, जो मूल रूप से पश्चिम बंगाल के रहने वाले हैं. 10 मई 2026 को उनकी एक तस्वीर सोशल मीडिया पर वायरल हुई थी. जिसमें उत्तिया कुंडू वर्तमान में पश्चिम बंगाल के सीएम शुवेंदू अधिकारी जो उस वक्त नेता प्रतिपक्ष थे. उनके साथ वायरल हुई थी. अब यह तस्वीर भी तेजी से वायरल हो रही है. खास बात यह है कि उत्तिया कुंडू ने अपने सोशल मीडिया पेज से टीएमसी प्रमुख ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी के खिलाफ राजनीतिक तौर से निशाना भी साधा था. जिससे यह साफ होता है कि वह राजनीतिक तौर पर टीएमसी के विरोधी रहे हैं. जिससे उत्तिया कुंडू की भाजपा से नजदीकी की चर्चा भी राजनीतिक गलियारों में हो रही है.
NCPI को चुनाव के लिए मिला था चंदा
उत्तिया कुंडू की पत्नी शेवली कुंडू का नाम भी पार्टी में शामिल है. वह NPCI की कोषाध्यक्ष हैं. शेवली कुंडू दो संगठन बिस्वाबाजार प्राइवेट लिमिटेड और महिला कर्मी एसोसिएशन संगठन की डायरेक्टर भी हैं. जिसमें एक संगठन सामाजिक कार्यों से जुड़ा है. इनका पता पश्चिम बंगाल के हावड़ा जिले में आने वाले बानीपुर इलाके में दर्ज है. त्रिपुरा विधानसभा चुनाव के दौरान NPCI को कुल 1 लाख 13 हजार रुपए का डोनेशन मिला था. NDTV को मिली जानकारी के मुताबिक यह जानकारी चुनाव आयोग के रिकॉर्ड से मिली है. NPCI की तरफ से चुनाव आयोग को इसी पैसे से चुनाव लड़ने की जानकारी दी थी.
NCPI के नेताओं ने NDTV से की बातचीत
NCPI पार्टी के महासचिव रहे शांतनु डे ने NDTV से बातचीत की है. उन्होंने कहा '2023 का त्रिपुरा विधानसभा चुनाव पार्टी ने त्रिपुरा ट्राइबल एरियाज़ ऑटोनॉमस डिस्ट्रिक्ट काउंसिल इलाके में आदिवासी समुदायों के हक के लिए लड़ा था. पार्टी ने सात सीटों पर उम्मीदवार उतारने की तैयारी की थी. लेकिन आखिरी में केवल तीन सीटों पर ही उम्मीदवारों ने चुनाव लड़ा था. लेकिन चुनाव के बाद पार्टी ज्यादा एक्टिव नहीं रही थी. इसके अलावा पार्टी के उम्मीदवार रहे जहांगीर अली ने NDTV को फोन पर बताया कि 2023 के चुनाव के बाद से शेवली कुंडू ने कोई संपर्क नहीं किया है. एक और उम्मीदवार बरजेदा त्रिपुरा ने भी इस पूरे राजनीतिक घटनाक्रम पर हैरानी जताई है. उनका कहना है कि पार्टी के संस्थापक शांतनु डे से मुलाकात के बाद उन्होंने त्रिपुरा में चुनाव लड़ा था. लेकिन चुनाव के बाद उनसे पूरी तरह से संपर्क खत्म हो गया है.
पश्चिम बंगाल पंचायत चुनाव लड़ने की थी तैयारी
शांतनु डे ने बताया कि 2023 में NCPI ने पश्चिम बंगाल में पंचायत चुनाव लड़ने की योजना तैयार की थी. लेकिन पार्टी में पैसों को लेकर अंदरूनी कलह शुरू हो गई थी. जिसके चलते नेताओं में मतभेद हो गए थे. ऐसे में कामकाज ठप पड़ गया था. शांतनु डे के मुताबिक पार्टी ने उनसे 2026 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव की तैयारी करने के लिए भी कहा था. लेकिन यह प्रस्ताव भी आगे नहीं बढ़ा था लेकिन अब अचानक से पार्टी में तृणमूल कांग्रेस के लगभग दो-तिहाई सांसदों का एक पूरा समूह जुड़ने जा रहा है.
क्या लोकसभा में मिलेगी NCPI को मान्यता
टीएमसी के बागी सांसदों ने रविवार को लोकसभा स्पीकर ओम बिरला से मुलाकात करके संसद में अलग बैठने की मांग की है. बागी सांसद काकोली घोष सुदीप बंद्योपाध्याय की तरफ से इसकी जानकारी दी गई है. उनका कहना है कि अलग संसदीय समूह के तौर पर मान्यता देने के लिए भी लेटर दिया है. उनकी ओम बिरला के साथ बैठक की तस्वीर भी सामने आई है. सुदीप बंद्योपाध्याय ने बताया कि NCPI पार्टी के तौर पर अब लोकसभा में अलग बैठेंगे और NDA का समर्थन करेंगे. ऐसे में अब सवाल यह भी उठ रहा है कि क्या लोकसभा में NCPI को अलग से मान्यता मिलेगी. इस पर अब लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के जवाब का इंतजार किया जा रहा है.
NCPI में जाने की ये हो सकती है वजह
तृणमूल कांग्रेस के बागी सांसदों का NCPI पार्टी में विलय करना राजनीतिक और कानूनी तौर पर अहम माना जा रहा है. संवेधानिक नियमों के मुताबिक अगर कोई सांसद अपनी मूल पार्टी छोड़कर किसी दूसरी पार्टी में जाता है तो उसकी संसद सदस्यता समाप्त हो सकती है. इसी तरह नियम यह भी है कि अगर अगर किसी पार्टी के 2/3 सांसद या फिर विधायक किसी दूसरी पार्टी में विलय करते हैं तो उनकी सदस्यता बच जाती है. टीएमसी के मौजूदा लोकसभा में 28 सांसद हैं. बागी गुट ने 20 सांसदों को समर्थन का दावा किया है. जो दो तिहाई आंकड़ों से ज्यादा है. ऐसे में सभी सांसदों ने अपनी सदस्यता बचाने के साथ-साथ एनडीए को समर्थन करने के लिए चुनाव आयोग में रजिस्ट्रेट दल NCPI में विलय का विकल्प निकाला है. एक वजह यह भी है कि संसद के नियमों के मुताबिक कोई भी बागी दल अपना स्वतंत्र गुट या ब्लॉक नहीं बना सकता है. ऐसे में संसदीय नियम के चलते टीएमसी का बागी गुट NCPI के जरिए अपनी अलग पहचान संसद में बना सकता है.
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