- महाराष्ट्र में पानी की कमी का संकट गहराता जा रहा है. बांधों का पानी सिर्फ पीने के लिए आरक्षित कर दिया गया है.
- महाराष्ट्र में फिलहाल केवल 24.74% जल भंडार ही बचा है. ऐसे में खेती के लिए पानी की सप्लाई को बंद कर दी गई.
- पुणे के आधे हिस्से में Even और शेष आधे हिस्से में Odd तारीखों को पानी की सप्लाई होगी.
Pune Water Crisis: महाराष्ट्र के पुणे में पानी के लिए हाहाकार मचा है. आलम यह है कि जलापूर्ति के लिए ऑड-इवन फॉर्मूला लागू किया गया है. अब पुणे में एक दिन छोड़कर जलापूर्ति होगी. पुणे नगर निगम ने शहरी क्षेत्र के लिए यह फैसला लिया है. पुणे के आधे हिस्से में Even और शेष आधे हिस्से में Odd तारीखों को पानी की सप्लाई होगी. जलापूर्ति का विस्तृत टाइमटेबल नगर निगम द्वारा पहले ही जारी की जा चुका है. बताया गया कि पानी की कमी इस कदर हो चुकी है कि खड़कवासला बांध में केवल 5 TMC (Thousand Million Cubic Feet) जल भंडार ही बचा है. उपलब्ध जल भंडार में से केवल 3 टीएमसी पानी नगर निगम के लिए आरक्षित है. ऐसे में जलापूर्ति के लिए ऑड-इवन का यह फॉर्मूला लागू किया गया है.
बताया गया कि मौजूदा जल भंडार शहर की नियमित आवश्यकता की तुलना में अपर्याप्त है. नगर निगम द्वारा खड़कवासला, भामा आसखेड और पवना बांधों में उपलब्ध जल भंडार की समीक्षा की गई. जिसके बाद यह फैसला लिया गया.
बांधों का पानी सिर्फ पीने के लिए आरक्षित
दरअसल महाराष्ट्र में पानी की कमी का संकट गहराता जा रहा है. बांधों का पानी सिर्फ पीने के लिए आरक्षित कर दिया गया है. खेतों की सप्लाई पर रोक लगा दी गई है. खेती के लिए बांधों से पानी की सप्लाई बंद हो गई है. जल संसाधन मंत्री विखे पाटिल ने अल नीनो के प्रभाव के कारण कम बारिश के अनुमान को देखते हुए बांधों का पानी केवल पीने के लिए आरक्षित करने के निर्देश दिए.
सर्वात मोठी बातमी - शेतीसाठी पाणीपुरवठा बंद, राज्य सरकारचे आदेश । #MaharashtraNews #MarathiNews #NDTVMarathi pic.twitter.com/pjECUjIIuJ
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राज्य के बांधों में केवल 24.74% पानी शेष
बताया गया कि महाराष्ट्र में फिलहाल केवल 24.74% जल भंडार ही बचा है. महाराष्ट्र के बांधों में पानी का स्टॉक चिंताजनक स्तर लगभग 24.74% पर पहुंच गया है. ऐसे में पीने के पानी की बड़ी किल्लत को टालने के लिए राज्य सरकार ने खेती के लिए पानी की सप्लाई को पूरी तरह बंद कर दिया है. और उपलब्ध पानी को केवल पीने के लिए आरक्षित करने के निर्देश दिए हैं.
इस संबंध में सरकार द्वारा आधिकारिक अधिसूचना जारी कर दी गई है और प्रशासन को जल संकट से निपटने के लिए 'अलर्ट मोड' पर रहने के निर्देश दिए गए हैं. पीने के लिए आरक्षित रखे गए पानी के स्टॉक का उपयोग किसी भी अन्य गैर-कृषि या व्यावसायिक उद्देश्यों के लिए नहीं किया जा सकेगा.
पानी चोरी रोकने के लिए पुलिस की ज्वाइंट पेट्रोलिंग
पानी चोरी रोकने के लिए नदी क्षेत्रों में पुलिस की पेट्रोलिंग टीम लगाई गई है. यह टीम राजमार्गों और नदी क्षेत्रों में अवैध मोटरों, पाइपलाइनों, पंपों और अन्य सामग्रियों की जांच के लिए गश्त करेगी. दोषियों के खिलाफ सरकारी आदेश के तहत कड़ी दंडात्मक और कानूनी कार्रवाई की जाएगी. साढ़े तीन हजार गांवों और बस्तियों की प्यास टैंकरों के भरोसे है. पिछले साल की तुलना में इस बार जलस्तर में 5% की कमी है.
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मुंबई को पानी सप्लाई करने वाले 7 प्रमुख बांधों (अप्पर वैतरणा, मोडक सागर, भातसा, तानसा, मध्य वैतरणा, विहार और तुलसी) में सिर्फ 12.48% स्टॉक बचा है. इस वजह से मुंबई में 10% पानी की कटौती लागू है. अप्पर वैतरणा बांध का इस्तेमाल के योग्य जलस्तर शून्य पर है. पुणे, खड़कवासला, पानशेत, वरसगांव और मुळशी जैसे महत्वपूर्ण बांधों का जलस्तर खतरनाक रूप से नीचे चला गया है.
पानी की कमी के चलते नागरिकों को महंगे टैंकरों पर निर्भर रहना पड़ रहा है. मराठवाड़ा और नासिक बेहाल है. इन दोनों क्षेत्रों के बांधों में भी पानी का स्टॉक आखिरी चरण में है, जिससे ग्रामीण इलाकों में चिंता बढ़ी है.
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