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DU के छात्रों की हाउसिंग रियलिटी: महंगा किराया, ‘माचिस की डिब्बी’ जैसे कमरे और रोजमर्रा की परेशानियां

दिल्ली यूनिवर्सिटी के आसपास जो PG बने हैं, उनका किराया बहुत महंगा है. किराया महंगा होने के बावजूद यहां कई सारी परेशानियां हैं.

सत्य निकेतन हादसे से पता चला कि छात्र किस हाल में रहने को मजबूर हैं.
AFP
नई दिल्ली:

दिल्ली विश्वविद्यालय के नॉर्थ और साउथ कैंपस में हर साल हजारों छात्र पढ़ने आते हैं. लेकिन बड़ी संख्या में छात्रों के लिए कॉलेज के आसपास सुरक्षित और किफायती रहने की जगह आज भी बड़ी चुनौती है. हॉस्टल में सीमित सीटों के कारण छात्र PG और किराये के फ्लैटों का सहारा लेते हैं. बढ़ती मांग के बीच किराया, भीड़भाड़, खाने की गुणवत्ता, पानी और हाइजीन से जुड़ी शिकायतें छात्रों की रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बन गई हैं.

नॉर्थ कैंपस: कमरा छोटा, किराया बड़ा

विजय नगर, डबल स्टोरी, कमला नगर, रूप नगर, GTB नगर, गुरमंडी, मलका गंज, क्रिश्चियन कॉलोनी और आसपास के इलाकों में बड़ी संख्या में DU छात्र रहते हैं. नॉर्थ कैंपस में छात्रों के बीच छोटे कमरों के लिए ‘मैचबॉक्स' शब्द बेहद आम है. छात्र बताते हैं कि कई कमरे इतने छोटे हैं कि उनमें दो-तीन लोगों का रहना मुश्किल हो जाता है, फिर भी मजबूरी में उन्हें साझा करना पड़ता है.

रामजस कॉलेज के B.Com (Hons) एक छात्र ने बताया कि कैंपस के आसपास PG का किराया काफी ज्यादा है और यह छात्रों पर आर्थिक बोझ डालता है. उनके मुताबिक, PG में रहने वाले छात्रों के लिए खाना भी बड़ी समस्या है. कई छात्र इसी वजह से PG छोड़कर फ्लैट में शिफ्ट होना पसंद करते हैं.

विजय नगर: 6 हजार से शुरू, सुविधाओं के साथ बढ़ता खर्च

विजय नगर में छात्रों के मुताबिक, प्रीमियम PG में ट्रिपल शेयरिंग का किराया करीब 6,000 से 12,000 रुपये प्रति बेड तक है. अगर लॉन्ड्री और दूसरी सुविधाएं जोड़ी जाएं तो खर्च 25,000 रुपये तक पहुंच सकता है. अलग-अलग PG में डबल शेयरिंग करीब 7,000 से 15,000 रुपये और सिंगल रूम करीब 18,000 रुपये तक बताया गया.

लॉ विभाग के छात्र इरफान के मुताबिक, सुविधाओं और लोकेशन के हिसाब से PG का खर्च लगातार बढ़ता जाता है, यही वजह है कि कई छात्र कुछ समय बाद PG छोड़कर फ्लैट में शिफ्ट होना ज्यादा बेहतर समझते हैं. उनका कहना है कि PG में रहने के दौरान किसी समस्या की शिकायत करने पर अक्सर मालिकों का जवाब होता है कि "अगर दिक्कत है तो PG छोड़ दीजिए." ऐसे में छात्रों के पास विकल्प सीमित रह जाते हैं.

इरफान बताते हैं कि रहने की लागत सिर्फ मासिक किराये तक सीमित नहीं होती. किसी कमरे में शिफ्ट होने के लिए छात्रों को पहले ब्रोकरेज भी देनी पड़ती है. उदाहरण के तौर पर, अगर किसी कमरे का किराया 20,000 रुपये है, तो आमतौर पर 20,000 रुपये एडवांस किराया, 20,000 रुपये सिक्योरिटी और करीब 20,000 रुपये ब्रोकरेज के तौर पर देने पड़ते हैं. यानी रहने की शुरुआत ही लगभग 60,000 रुपये के खर्च से होती है. उनका दावा है कि कई मामलों में मकान छोड़ते समय सिक्योरिटी मनी वापस पाना भी छात्रों के लिए आसान नहीं होता.

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पानी, हाइजीन और खाने की परेशानी

इरफान के मुताबिक, विजय नगर में पानी भी छात्रों के लिए चिंता का विषय है. कई छात्र पीने के लिए वॉटर प्यूरिफायर या बाहर से पानी का इस्तेमाल करते हैं. एक छात्र के मुताबिक, बाहर से पानी खरीदने पर एक बोतल के लिए करीब 40 से 90 रुपये तक खर्च करना पड़ता है.

हाइजीन को लेकर भी शिकायतें हैं. छात्रों ने कमरों में चूहे आने, वॉशरूम की सफाई खुद करने और कई बार एक ही चीज को बार-बार साफ करने जैसी परेशानियों का जिक्र किया. खाना बनाने के लिए LPG का खर्च अलग है. वहीं बिजली का बिल भी अतिरिक्त खर्च बढ़ाता है. छात्रों का कहना है कि डेंगू और टाइफाइड जैसी बीमारियों का डर भी साफ-सफाई और पानी की स्थिति के कारण बना रहता है.

कमला नगर और मलका गंज: सुविधाएं बढ़ीं तो किराया भी बढ़ा

कमला नगर और आसपास के इलाकों में AC, खाना और लॉन्ड्री जैसी सुविधाओं वाले PG का किराया करीब 15,000 से 20,000 रुपये तक बताया गया. वहीं प्रीमियम PG में सिंगल रूम का किराया 30,000-40,000 रुपये तक पहुंच सकता है.

इसके उलट गुरमंडी जैसे इलाकों में कुछ कमरों का किराया 3,000-5,000 रुपये तक बताया जाता है. हालांकि, कम किराये के साथ बुनियादी सुविधाओं और इन्फ्रास्ट्रक्चर की स्थिति भी कमजोर होने की शिकायतें सामने आती हैं.

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साउथ कैंपस: पढ़ाई के साथ रहने-खाने की चिंता

साउथ कैंपस के आसपास सत्य निकेतन, साउथ मोती बाग, मोती बाग, मुनीरका, RK पुरम, सफदरजंग एन्क्लेव और दुर्गाबाई देशमुख मेट्रो स्टेशन के आसपास छात्र बड़ी संख्या में रहते हैं.

सत्य निकेतन में ट्रिपल शेयरिंग करीब 10,000 रुपये प्रति बेड, डबल शेयरिंग 14,000 रुपये और सिंगल रूम करीब 28,000 रुपये तक बताया गया. मोती बाग इलाके में यह खर्च करीब 7,000 से 20,000 रुपये जबकि मुनीरका में ट्रिपल शेयरिंग करीब 5,000 और डबल शेयरिंग करीब 8,000 रुपये तक बताई गई. इन जगहों पर बिजली का खर्च अलग से लिया जाता है.

मोतीलाल नेहरू कॉलेज की छात्रा शगुन, मध्य प्रदेश से हैं. उन्होंने कहा कि घर से इतनी दूर आने के बाद पढ़ाई का दबाव तो रहता ही है, लेकिन उसके अलावा रहने और खाने की भी अलग सिरदर्दी होती है. उनके मुताबिक, छात्र चाहते हैं कि कम से कम रहने और खाने की बुनियादी व्यवस्था ऐसी हो कि उन्हें पढ़ाई के साथ इन समस्याओं से लगातार न जूझना पड़े.

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सत्य निकेतन हादसे के बाद पीजी खाली करते छात्र.

सत्य निकेतन हादसे के बाद पीजी खाली करते छात्र.
Photo Credit: PTI

लड़कियों के लिए किराया और हाइजीन बड़ी चुनौती

नॉर्थ और साउथ कैंपस दोनों में बातचीत के दौरान एक बात समान रूप से सामने आई. छात्राओं के लिए कैंपस के आसपास PG अपेक्षाकृत महंगे हैं और हाइजीन को लेकर भी शिकायतें हैं. सीमित बजट में सुरक्षित और साफ-सुथरा कमरा तलाशना कई छात्राओं के लिए चुनौती बना हुआ है.

पुरानी इमारतें, घनी आबादी और सुरक्षा के सवाल

दोनों कैंपस के आसपास कई PG पुरानी रिहायशी इमारतों में चल रहे हैं. छात्रों के मुताबिक, कई जगहों पर एक कमरे में तय क्षमता से ज्यादा लोग रहते हैं. पानी की गुणवत्ता, सफाई, बिजली, खाना और फायर सेफ्टी जैसी बुनियादी सुविधाओं को लेकर भी सवाल उठते हैं. कुछ छात्रों का कहना है कि कई इमारतों में फायर सेफ्टी के नाम पर सीमित इंतजाम ही दिखाई देते हैं.

हॉस्टल की कमी के बीच बढ़ता PG बाजार

DU में सीमित हॉस्टल सीटों और बड़ी छात्र आबादी के बीच PG और किराये के मकानों पर निर्भरता लगातार बनी हुई है. नतीजा यह है कि छात्र कॉलेज के करीब रहने की सुविधा के लिए ऊंचा किराया, साझा कमरे, अतिरिक्त बिजली बिल, पानी और खाने के खर्च का बोझ उठा रहे हैं.

दिल्ली विश्वविद्यालय के हजारों छात्रों के लिए कॉलेज के पास रहना सिर्फ सुविधा नहीं, बल्कि मजबूरी भी है. बढ़ते किराये, भीड़भाड़ वाले कमरे और बुनियादी सुविधाओं की कमी के बीच छात्र पढ़ाई और रोजमर्रा की चुनौतियों के साथ संतुलन बनाने की कोशिश कर रहे हैं. छात्रों का कहना है कि जब तक किफायती और सुरक्षित आवास के विकल्प नहीं बढ़ेंगे, तब तक यह हाउसिंग संकट उनके कैंपस जीवन का अभिन्न हिस्सा बना रहेगा.

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