- DUSU में NSUI की करारी हार पर राहुल गांधी ने बुलाई समीक्षा बैठक
- टिकट बंटवारे की बगावत ने बिगाड़ा NSUI का खेल
- DUSU हार के बाद कांग्रेस में बढ़ी कन्हैया कुमार की मुश्किलें?
दिल्ली विश्वविद्यालय (DU) छात्र संघ चुनाव में कांग्रेस के छात्र संगठन (NSUI) की करारी हार से 'मायूस' राहुल गांधी (Rahul Gandhi) ने सोमवार को एनएसयूआई के प्रभारी कन्हैया कुमार और अध्यक्ष विनोद जाखड़ के साथ नतीजों की समीक्षा की. सूत्रों के मुताबिक राहुल गांधी ने पूछा कि डूसू (DUSU) चुनाव में एनएसयूआई की ऐसी स्थिति कैसे हुई? टिकट बंटवारे को लेकर हुए विवाद और उससे एनएसयूआई को हुए नुकसान को लेकर राहुल गांधी ने कहा कि 'ऐसा नहीं होना चाहिए था'. डूसू चुनाव के नतीजे बीते 19 सितंबर को उसी दिन आए थे जब इंदौर में राहुल गांधी का 'छात्रों की गूंज' कार्यक्रम था. ऐसे में बीजेपी (BJP) को कहने का मौका मिल गया कि युवाओं में राहुल गांधी की मुहिम का कोई असर नहीं है.
टिकट बंटवारे में हुई थी बगावत
कांग्रेस सूत्रों ने तब दावा किया था कि डूसू नतीजों से राहुल गांधी नाराज़ हैं और उन्होंने कांग्रेस के संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल से रिपोर्ट देने को कहा है. इससे पहले टिकट बंटवारे के समय एनएसयूआई में हुई बगावत के फौरन बाद ही राहुल गांधी ने वेणुगोपाल से बात कर डैमेज कंट्रोल करने के निर्देश दिए थे.
युवाओं में सरकार के प्रति नाराजगी, एनएसयूआई से थी बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद
नतीजों के करीब दस दिनों बाद वेणुगोपाल की मौजूदगी में राहुल में एनएसयूआई के प्रभारी और अध्यक्ष से सीधी बात की. सूत्रों के मुताबिक राहुल गांधी ने छात्रों की गूंज कार्यक्रम और जेन जी आंदोलन का हवाला देते हुए कहा कि युवाओं में मोदी सरकार के प्रति नाराज़गी है. ऐसे में एनएसयूआई से बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद थी. सूत्रों के मुताबिक राहुल ने टिकट बंटवारे से जुड़े फैसलों को लेकर सवाल किए. खास तौर पर उपाध्यक्ष पद को लेकर चर्चा हुई जिस पर एनएसयूआई से बगावत कर निर्दलीय लड़ने वाले दीपांशु शौकीन ने धमाकेदार जीत दर्ज की जबकि आधिकारिक उम्मीदवार को नोटा से भी कम वोट मिले.
एनएसयूआई का खेल उसके ही बागी उम्मीदवारों ने बिगाड़ा. उपाध्यक्ष पद के अलावा सह सचिव के पद पर भी एनएसयूआई के बागी उम्मीदवार बेहद कम वोटों से दूसरे नंबर पर रहे. ज़ाहिर सी बात है कि एनएसयूआई के उम्मीदवारों के चयन को लेकर काफ़ी विवाद हुआ और निशाने पर प्रभारी कन्हैया कुमार रहे.
जिन्होंने पार्टी में शामिल करवाया उन्हीं के निशाने पर कन्हैया कुमार
सूत्रों के मुताबिक राहुल गांधी के सामने केसी वेणुगोपाल ने डूसू चुनाव नतीजों के लिए कन्हैया कुमार को ज़िम्मेदार ठहराने की कोशिश की. दिलचस्प संयोग की बात है कि पाँच साल पहले 28 सितंबर 2021 को भगत सिंह की जयंती के मौके पर राहुल गांधी कन्हैया कुमार के साथ दिल्ली के शहीद पार्क में उनकी प्रतिमा पर माल्यार्पण करने पहुंचे थे. माल्यार्पण कार्यक्रम के बाद कन्हैया कांग्रेस मुख्यालय पहुंचे जहां केसी वेणुगोपाल ने उन्हें पार्टी में शामिल कराया. ठीक पाँच साल बाद सोमवार को दस जनपथ के अंदर बदले हालात में कन्हैया राहुल गांधी के सामने वेणुगोपाल के निशाने पर थे.
संगठन में अनुशासन के मद्देनज़र उन्होंने शौक़ीन का टिकट काटा और इसके बाद जातीय संतुलन साधने के लिए सह सचिव पद पर भी दूसरा उम्मीदवार उतारना पड़ा. कन्हैया ने यह शिकायत भी की कि कांग्रेस के बड़े नेताओं ने बागी उम्मीदवार को बिठाने की कोशिश नहीं की.
कांग्रेस को हार में भी दिखी सकारात्मकता
एबीवीपी तीन सीट जीतने में कामयाब रही लेकिन एनएसयूआई के लिए संतोष की बात बस यही रही कि अध्यक्ष पद पर उसके उम्मीदवार विजय शंकर मीणा ने एबीवीपी के यश डबास को कड़ी टक्कर दी. अध्यक्ष पद पर शौकीन के कथित तौर पर पीछे हटने के बाद एनएसयूआई ने राजस्थान के आदिवासी समाज से आए छात्र नेता पर दांव लगाया था जबकि डूसू में अध्यक्ष पद पर जाट-गुर्जर का दबदबा रहता है. इसके ज़रिए एनएसयूआई ने एससी-एसटी छात्रों को बड़ा संदेश देने की कोशिश की. डूसू चुनाव के इस पहलू को कांग्रेस नेतृत्व भी सकारात्मक मान रहा है.
राहुल गांधी की उम्मीदों को झटका
देश में तेज होती “जेन जी” पॉलिटिक्स के कारण इस बार के दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ चुनाव पर पीएम मोदी से लेकर नेता विपक्ष राहुल गांधी की नज़रें थीं. चुनाव से कुछ दिन पहले ही पीएम मोदी ने डीयू के श्री राम कॉलेज ऑफ कॉमर्स के सौ साल पूरे होने पर एक कार्यक्रम में छात्रों को संबोधित किया था. तो वहीं नीट पेपर लीक के बाद से आक्रामक अंदाज़ में शिक्षा और रोज़गार के मुद्दे पर मोदी सरकार को घेर रहे राहुल गांधी भी उम्मीद लगाए बैठे थे. डूसू चुनाव से राहुल गांधी की उम्मीदों को झटका लगा है.
एनएसयूआई प्रभारी के तौर पर कन्हैया कुमार को तीन साल से ज़्यादा समय हो चुका है. वो डूसू के चार चुनाव देख चुके हैं. उनके नीचे अध्यक्ष दो बार बदल चुके हैं. अनुमान लगाया जा रहा है कि 'डूसू की गूंज' के बाद राहुल गांधी प्रभारी को ही बदल सकते हैं.
अब क्या कन्हैया पर होगा एक्शन?
2015 में जवाहर लाल नेहरू विश्विद्यालय छात्रसंघ अध्यक्ष रहे और 2019 बिहार की बेगूसराय सीट से सीपीआई की टिकट पर चुनाव लड़ चुके कन्हैया कुमार को कांग्रेस ने बीते लोकसभा चुनाव में उत्तर पूर्वी दिल्ली सीट से उम्मीदवार बनाया था. राहुल गांधी से नजदीकी के कारण बीते पाँच सालों में कन्हैया ने पार्टी में अपनी महत्वपूर्ण जगह बनाई लेकिन कई नेताओं को वो खटकते रहे हैं और अब वो सीधे निशाने पर आ रहे हैं. एनएसयूआई से छुट्टी हो भी जाए तो भी कन्हैया कुमार के सियासी कद को देखते हुए कहा जा सकता है उन्हें किनारे तो नहीं लगाया जाएगा.
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