- दिल्ली के केंद्रीय सचिवालय पुस्तकालय में साढ़े आठ लाख से अधिक पुस्तकें और दुर्लभ ग्रंथ संग्रहित हैं.
- न्यू सेंट्रल विस्टा योजना के तहत शास्त्री भवन को गिराने का निर्णय लिया गया है जिससे पुस्तकालय प्रभावित होगा.
- पुस्तकालय के लिए अभी तक कोई नई या पर्याप्त जगह निर्धारित नहीं की गई है जिससे संकट उत्पन्न हुआ है.
किताबें न सिर्फ ज्ञान का भंडार है, बल्कि वो इतिहास को सहेजकर भविष्य को बेहतर बनाने का रास्ता भी है. यहीं कारण है कि किताबों को संरक्षित रखने की परंपरा भारत में सदियों से रही हैं. इस बीच देश की राजधानी से एक ऐसी खबर सामने आई है जिसके पुस्तक प्रेमियों की चिंता बढ़ा दी है. दरअसल दिल्ली में 135 साल पुरानी लाइब्रेरी पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं. मामला दिल्ली के ऐतिहासिक केन्द्रीय सचिवालय पुस्तकालय (CSL) से जुड़ा है. जहां करीब साढ़े 8 लाख किताबें रखी हैं. दिल्ली के न्यू सेंट्रल विस्टा प्लान के तहत कई पुरानी इमारतों का हटाया जा रहा है. इसकी जद में शास्त्री भवन का केंद्रीय सचिवालय पुस्तकालय भी आ गया है.
सेंट्रल विस्टा प्लान के तहत इस लाइब्रेरी को हटाने की बात हो रही है. लेकिन यह तय नहीं है कि इस पुस्तकालय में रखी किताबों को कहां रखा जाएगा. अब इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने खुद से संज्ञान लिया है. सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में संज्ञान लेते हुए सोमवार को सुनवाई का दिन तय किया है.

सुप्रीम कोर्ट सोमवार को करेगी सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट ने बताया कि सोमवार को सेंट्रल सेक्रेटेरिएट लाइब्रेरी के मामले पर सोमवार को सुनवाई करेगा. जस्टिस संजय कुमार और जस्टिस संजीव सचदेवा की बेंच 5 अक्टूबर को करेगी सुनवाई. अब देखना होगा कि सुप्रीम कोर्ट इस मामले में क्या फैसला लेती है? लाइब्रेरी मे मौजूद 8.5 लाख से अधिक किताबों को शिफ्ट करने के लिए अभी तक कोई नई जगह तय नहीं है.
जानिए सेंट्रल सेक्रेटेरिएट लाइब्रेरी का इतिहास
दरअसल इस लाइब्रेरी की शुरुआत 1891 में कलकत्ता (कोलकाता) में इंपीरियल सचिवालय पुस्तकालय के रूप में हुई थी, जो 1911 में राजधानी के साथ दिल्ली लाई गई थी. यह वर्ष 1969 से शास्त्री भवन में संचालित हो रही है. इस ऐतिहासिक लाइब्रेरी में 8.5 लाख से अधिक पुस्तकें, दुर्लभ ग्रंथ, सरकारी रिकॉर्ड और गजेटियर मौजूद हैं.

न्यू सेंट्रल विस्टा प्लान में नहीं मिली लाइब्रेरी को जगह
सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट के कारण शास्त्री भवन को गिराया जाना है, जिसके चलते अधिकारियों को इमारत खाली करने के निर्देश दिए गए है. खबरों के मुताबिक सेंट्रल विस्टा में अन्य कार्यालयों को जगह मिल गई है, लेकिन इस विशाल संग्रह के लिए अब तक कोई निश्चित और पर्याप्त स्थान नहीं मिला है.
8.5 लाख से ज्यादा किताबें, कई पुराने दस्तावेज और दुर्लभ ग्रंथ
बताया जाता है कि इस लाइब्रेरी में 8.5 लाख से ज्यादा किताबें, पुराने दस्तावेज और दुर्लभ किताबें हैं. यह लाइब्रेरी लंबे समय से शास्त्री भवन में चल रही है. रिपोर्ट के अनुसार मोदी सरकार ने कर्तव्य भवन में सिर्फ दो छोटे कमरे दिए, जो इतनी बड़ी लाइब्रेरी के लिए काफी नहीं है. संस्कृति मंत्रालय ने कहा कि इतनी जगह में सारी किताबें नहीं समा सकतीं.
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