दिल्ली में एक और इमारत ढही है. इस बार सत्य निकेतन इलाके में. इस बार जो इमारत ढही है, वह 6 मंजिला थी. इस इमारत में 'हॉस्टल डेज' नाम से बॉयज पीजी चल रहा था. चश्मदीदों ने बताया कि जब इमारत ढही तो ऐसा लगा कि जैसे भूकंप आ गया हो.
यह पीजी दिल्ली यूनिवर्सिटी के साउथ कैंपस के पास ही था. जिस इमारत में पीजी चल रहा था, उसे एक साल पहले ही खाली कराया गया था लेकिन दो-तीन महीने पहले ही यहां दोबारा पीजी शुरू हो गया था.
यहां की गलियां काफी संकरी और भीड़भाड़ वाली हैं. इसलिए एंबुलेंस को निकालने के लिए ग्रीन कॉरिडोर बनाया गया है. अब तक कुछ लोगों को मलबे से निकाला जा चुका है लेकिन अब भी बड़ी संख्या में लोग अंदर दबे हुए हैं. राहत और बचाव का काम चल रहा है.
अब तक क्या-क्या पता चला?
- दिल्ली पुलिस ने बताया कि दोपहर करीब 1:34 बजे सत्य निकेतन में एक इमारत गिरने की सूचना मिली थी.
- यह बिल्डिंग 40 से 50 साल पुरानी थी. बिल्डिंग के बेसमेंट में मरम्मत का काम चल रहा था. मजदूर में दब गए हैं.
- बिल्डिंग में जो पीजी चल रहा था, उसमें 10 रूम थे. पीजी में 75 बेड थे. दो-तीन महीने पहले ही शुरू हुआ था.
- बिल्डिंग के मालिक हरिओम बंसल और उनके भाई आनंद बंसल हैं, जो गुरुग्राम में रहते हैं. इनके 3-4 पीजी हैं.
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ये कोई पहला हादसा नहीं और न ही आखिरी!
दिल्ली में इमारत के ढहने की न तो यह कोई पहली दुर्घटना है और न ही आखिरी. ठीक दो महीने पहले ही 8 जुलाई को रोहिणी के सेक्टर 16 में एक इमारत ढह गई थी. यह 4 मंजिला अंडर कंस्ट्रक्शन बिल्डिंग थी. इस बिल्डिंग के गिरने से 3 लोगों की मौत हो गई थी.
और अब दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में शिव मंदिर के पास 6 मंजिला इमारत ढह गई. इस मलबे में 25 से 30 लोगों के दबे होने की आशंका है.
आंकड़े बताते हैं कि दिल्ली में हर महीने औसतन दो इमारतें ढहने के मामले सामने आते हैं. नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) के मुताबिक, 2024 में दिल्ली में रिहायशी इमारतों के ढहने के 25 मामले सामने आए थे. इनमें 30 लोगों की मौत हो गई थी. इससे पहले 2023 में 49 दुर्घटनाएं हुई थीं, जिनमें 30 लोगों की जान चली गई थी.

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कितनी 'सेफ' हैं दिल्ली की इमारतें?
दिल्ली में इमारतें कितनी सेफ हैं? इसे लेकर हर साल मॉनसून से पहले नगर निगम (MCD) एक सर्वे करवाती है. इस साल भी यह सर्वे हुआ. लेकिन सर्वे पर अक्सर सवालों को उठाया जाता है.
MCD को इस साल 32.55 लाख से ज्यादा इमारतों का सर्वे करना था. लेकिन 2 जुलाई तक MCD ने 29.94 लाख इमारतों का ही सर्वे किया. सर्वे के बाद MCD ने 27 इमारतों को ही रहने के लिए 'अनसेफ' घोषित किया. सर्वे में 125 ऐसी इमारतों का भी पता चला जो जर्जर थीं और उनके मालिकों को इसे ठीक करवाने का नोटिस दिया गया.
लेकिन सवाल यहीं उठता है कि इतने बड़े पैमाने पर सर्वे होने के बाद भी सिर्फ 27 इमारतें ही कैसे 'अनसेफ' हो सकती हैं? 27 का आंकड़ा भी तब बढ़ा था जब 27 जून को 27 लाख से ज्यादा इमारतों के सर्वे के बाद 19 इमारतों के ही 'अनसेफ' होने की जानकारी सामने आई थी.

MCD के इस सर्वे पर बीजेपी ने ही सवाल उठाए थे. दिल्ली बीजेपी के प्रवक्ता और चांदनी चौक नागरिक मंच के महासचिव प्रवीण शंकर कपूर ने MCD के अफसरों पर इस सर्वे के दौरान 'आपराधिक लापरवाही' बरतने का आरोप लगाया. दिल्ली के मेयर प्रवेश वाही और कमिश्नर संजीव खिरवार को लिखी चिट्ठी में उन्होंने आरोप लगाया था कि सर्वे में राजधानी में 'खतरनाक इमारतों' की संख्या को असलियत से बहुत कम दिखाया गया.
उन्होंने दावा किया था कि अगर मेयर और कमिश्नर साथ दें तो वह अकेले चर्च मिशन रोड और खारी बावली में कम से कम 5 खतरनाक इमारतें दिखा सकते हैं.
उन्होंने यह भी आरोप लगाया था कि चांदनी चौक, बल्लीमारान, सीताराम बाजार, चांदनी महल, जामा मस्जिद और नबी करीम जैसे इलाकों में लगभग 150 से 200 खतरनाक इमारतों में अभी भी लोग रह रहे हैं. उन्होंने आशंका जताई थी कि इनमें से कम से कम 25 इमारतें मॉनसून में गिर सकती हैं.
सवाल इसलिए भी उठते हैं कि MCD सिर्फ बाहर से सर्वे करती है. अगर किसी इमारत में दरार दिखती है तभी उसे अंदर से चेक किया जाता है.
अब सवाल यही उठता है कि महीने-दो महीने पहले MCD ने जब सर्वे किया था, तब क्या पता था कि ऐसे कितनी पीजी या हॉस्टल हैं जो रहने के लिए 'अनसेफ' हैं?
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