केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने यूरोपीय संघ के साथ मिलकर भारत के व्यापार को और बढ़ाने देने को लेकर बड़ा बयान बयान दिया है. पीयूष गोयल ने कहा कि अकेले यूरोपीय संघ लगभग 7 ट्रिलियन डॉलर मूल्य की वस्तुएं और 3 ट्रिलियन डॉलर मूल्य की सेवाएं आयात करता है, जो मिलकर 10 ट्रिलियन डॉलर का बाजार बनाते हैं.पीयूष गोयल ने बात भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते (India–European Union Free Trade Agreement) के महत्व पर बात करते हुए ग्रेटर नोएडा में इंस्टीट्यूट ऑफ चार्टर्ड अकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया द्वारा आयोजित विश्व लेखा मंच को संबोधित करते हुए कही.
उन्होंने आगे कहा कि भारत का वर्तमान निर्यात इस क्षमता का एक छोटा सा हिस्सा भर है. भारत के सामने अभूतपूर्व अवसर हैं, जिन्हें निश्चित रूप से भुनाया जाना चाहिए.भारत-यूरोपीय संघ FTA लगभग एक तिहाई आबादी को कवर करता है, ग्लोबल जीडीपी का लगभग 25 प्रतिशत हिस्से को प्रभावित करता है और वैश्विक व्यापार में एक महत्वपूर्ण हिस्सेदारी रखता है.
इस महत्वकांशी समझौते के बाद वाणिज्य मंत्रालय अब दुनिया के दूसरे अहम देशों के साथ मुक्त व्यापार समझौता फाइनल करने की कवायद में जुट गया है.पीयूष गोयल ने कहा कि भारत जल्द ही चिली के साथ एक मुक्त व्यापार समझौता करेगा, जिससे महत्वपूर्ण खनिजों तक पहुंच सुनिश्चित होगी.भारत ने पिछले चार साल के दौरान 8 मुक्त व्यापार समझौतों (FTAs) पर हस्ताक्षर किए हैं, जो वैश्विक अर्थव्यवस्था में भारत की बढ़ती साख के प्रतिक है. ये समझौते यूरोप और अन्य क्षेत्रों की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं को कवर करते हैं, जिनमें 27 देशों का यूरोपीय संघ, स्विट्जरलैंड, लिकटेंस्टीन, नॉर्वे और आइसलैंड से मिलकर बना चार देशों का EFTA ब्लॉक, यूनाइटेड किंगडम, ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, संयुक्त अरब अमीरात और ओमान शामिल हैं.
वाणिज्य मंत्रालय के मुताबिक, मुक्त व्यापार समझौतों के ज़रिये बड़े स्तर पर भारत में विदेशी निवेश का रास्ता खुला है.EFTA देशों के साथ हुए समझौते के तहत भारत में 100 बिलियन डॉलर के प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (foreign direct investment) की प्रतिबद्धता शामिल है, जिसका उद्देश्य इंफ्रास्ट्रक्चर निर्माण, नवाचार (innovation) और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को मज़बूत करना है. इस निवेश से लगभग 50 लाख रोजगार पैदा होने की संभावना है.साथ ही, मुक्त व्यापार समझौता के तहत न्यूजीलैंड ने अगले 15 वर्ष में भारत में 20 बिलियन डॉलर का निवेश करने का आश्वासन दिया है, जबकि बीते 25 वर्ष में उसका कुल निवेश भारतीय अर्थव्यवस्था में सिर्फ 70 मिलियन डॉलर रहा है.
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