- भारत और यूरोपीय संघ के बीच मुक्त व्यापार समझौते ने पाकिस्तान के व्यापारियों में गंभीर चिंता पैदा कर दी है
- पाकिस्तान के व्यापारियों का मानना है कि यह समझौता यूरोपीय बाजारों में उनकी प्रतिस्पर्धा क्षमता को कमजोर करेगा
- पाकिस्तान को यूरोपीय संघ में जीएसपी प्लस की छूट मिली हुई है जिससे उसके 80% निर्यात पर कोई टैरिफ नहीं लगता है
भारत ने अपने इतिहास का सबसे बड़ा ट्रेड डील फाइनल कर लिया है और इससे पाकिस्तान के व्यापारियों के हाथ-पांव फूलने लगे हैं. दरअसल 27 जनवरी को ऐतिहासिक भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते (India-EU Free Trade Agreement) की घोषणा हुई थी. अब पाकिस्तान के निर्यातकों और बिजनेस एक्सपर्ट्स को डर है कि यह व्यापार समझौता पाकिस्तान के निर्यात के लिए गंभीर चुनौतियां पैदा करेगा और खासतौर से यूरोप में उसके कपड़ा निर्यात को नुकसान पहुंचाएगा. यह रिपोर्ट पाकिस्तानी अखबार डॉन ने छापी है.
इस रिपोर्ट के अनुसार पाकिस्तानी व्यापारियों के एक संगठन के पदाधिकारी ने कहा कि भारत ने कई देशों और अब यूरोपीय संघ के साथ व्यापार समझौते करके पाकिस्तान के खिलाफ एक आर्थिक मोर्चा खोल दिया है. बिजनेसमैन पैनल प्रोग्रेसिव के अध्यक्ष और फेडरेशन ऑफ पाकिस्तान चैंबर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री के उपाध्यक्ष साकिब फैयाज मगून ने आगाह किया कि यह समझौता यूरोपीय बाजारों में पाकिस्तान की प्रतिस्पर्धा करने की क्षमता को खत्म कर सकता है. यानी भारतीय निर्यात के सामने पाकिस्तान के सामान टिकेंगे नहीं.
आखिर पाकिस्तान को डर क्यों लग रहा है?
पाकिस्तान को यूरोपीय संघ के 27 देशों में GSP Plus का स्टेटस मिला हुआ है. GSP Plus का पूरा नाम Generalised Scheme of Preferences Plus (वरीयताओं की सामान्यीकृत प्रणाली प्लस) है. यह यूरोपीय संघ द्वारा विकासशील देशों को दी जाने वाली एक विशेष व्यापारिक छूट है. इसी की वजह से यूरोपीय संघ के देशों में पाकिस्तान के लगभग 80 प्रतिशत निर्यात पर कोई टैरिफ नहीं लगता. रिपोर्ट के अनुसार इसी की वजह से यूरोपीय संघ में पाकिस्तानी का कपड़ा निर्यात 6.2 अरब डॉलर का है. वहीं भारत को अबतक 12 प्रतिशत टैरिफ का सामना करना पड़ा था और वह यूरोपीय संघ में 5.6 अरब डॉलर का निर्यात होता था. लेकिन अब मुक्त व्यापार समझौते के बाद यह स्थिति बदल जाएगी.
रिपोर्ट के अनुसार होजरी मैन्युफैक्चरर्स एंड एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन के प्रमुख फैसल अरशद ने कहा कि ट्रेड डील के बाद यूरोपीय संघ के बाजार में भारतीय निर्यातकों अपने कपड़ों की कीमतों में आक्रामक कटौती कर सकते हैं. इससे होजरी, निटवेअर और वैल्यू एडेड कपड़ों में पाकिस्तान की बाजार हिस्सेदारी में कमी आ सकती है. इसका निर्यात मार्जिन, रोजगार और क्षेत्र की स्थिरता पर प्रभाव पड़ेगा.
उन्होंने कहा, "अगर भारत FTA पहुंच हासिल कर लेता है और पाकिस्तान के अंदर मौजूद लागत संबंधी कमियों पर ध्यान नहीं दिया जाता है, तो हमारे कपड़ा निर्यात को नुकसान होगा." उन्होंने पाकिस्तान की सरकार से अपील की है कि निर्यात और नौकरियों की सुरक्षा के लिए रणनीतिक और समय पर नीतिगत हस्तक्षेप आवश्यक है.
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