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This Article is From May 22, 2017

AIMPB ने सुप्रीम कोर्ट में दिया हलफनामा, कहा - काजी दूल्हे को सलाह देगा कि तीन तलाक न दें

सुप्रीम कोर्ट से आल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने कहा- निकाह के वक्त काजी दूल्हे और दुल्हन को सलाह देगा कि निकाहनामे में एक बार में ही तीन तलाक नहीं कहने की शर्त शामिल हो

AIMPB ने सुप्रीम कोर्ट में दिया हलफनामा, कहा - काजी दूल्हे को सलाह देगा कि तीन तलाक न दें
सुप्रीम कोर्ट ने तीन तलाक के मामले में सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दाखिल किया है.
  • प्रस्ताव पास किया कि एक बार में तीन तलाक शरीयत के मुताबिक सही नहीं
  • मुस्लिम समुदाय में तलाक पर कोड आफ कंडक्ट/ गाइडलाइन की जरूरत
  • मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड बड़े पैमाने पर जागरूकता अभियान चलाएगा
नई दिल्ली: तीन तलाक पर आल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दाखिल किया है. हलफनामे में कहा गया है कि तीन तलाक को लेकर बोर्ड वेबसाइट, सोशल मीडिया और पब्लिकेशन के जरिए एडवाइजरी जारी करेगा और निकाह कराने वाले को सलाह देगा कि निकाह कराने वाला निकाह के वक्त ही दूल्हे को यह बताएगा कि अगर पति-पत्नी के बीच मतभेद होते हैं जो तलाक की नौबत तक पहुंचते हैं तो वह एक ही बार में तीन तलाक नहीं कहेगा क्योंकि एक ही बार में तीन तलाक शरीयत में अवांछनीय परंपरा है. निकाह के वक्त काजी दूल्हे और दुल्हन दोनों को सलाह देगा कि निकाहनामे में शर्त शामिल की जाए कि पति एक बार में ही तीन तलाक नहीं कहेगा. बोर्ड की वर्किंग कमेटी ने प्रस्ताव पास किया है कि जो एक बार में तीन तलाक देगा उसका मुस्लिम समुदाय में सामाजिक बहिष्कार किया जाएगा.

गौरतलब है कि बोर्ड ने यह बात 18 मई को संविधान पीठ के सामने रखी थी. सुप्रीम कोर्ट ने इस बाबत हलफनामा दाखिल करने को कहा था. बोर्ड की ओर से दाखिल हलफनामे में कहा गया है कि 15 और 17 अप्रैल को बोर्ड की बैठक में इसे लेकर प्रस्ताव भी पास किया गया था कि मुस्लिम समुदाय में तलाक को लेकर एक कोड आफ कंडक्ट/ गाइडलाइन की जरूरत है ताकि खास तौर से एक बार में तीन तलाक से बचा जा सके. बोर्ड की ओर से पास उर्दू में लिखा गया प्रस्ताव 13 पेज के हलफनामे के साथ लगाया गया है.

बोर्ड ने हलफनामे में सुप्रीम कोर्ट को बताया है कि प्रस्ताव पास किया गया है कि बिना किसी कारण एक बार में तीन तलाक शरीयत के मुताबिक सही तरीका नहीं है. शरीयत इस तरीके के तलाक की कड़ी भर्त्सना करता है. बोर्ड बड़े पैमाने पर जागरूकता अभियान चलाएगा कि लोग एक बार में तीन तलाक का तरीका न अपनाएं. जरूरत हो तो एक बार तलाक का तरीका अपनाएं. वर्किंग कमेटी ने यह भी प्रस्ताव पास किया है कि जो एक बार में तीन तलाक देगा उसका मुस्लिम समुदाय में सामाजिक बहिष्कार किया जाएगा.बोर्ड इस बात को मुस्लिम समुदाय के खास तौर से गरीब तबके के लोगों तक पहुंचाएगा और इसके लिए इमामों और मस्जिदों के वक्ताओं की मदद ली जाएगी.

वर्किंग कमेटी ने यह भी प्रस्ताव पास किया है कि जो एक बार में तीन तलाक देगा उसका मुस्लिम समुदाय में बहिष्कार किया जाएगा. तलाक की प्रक्रिया के लिए पति और पत्नी के लिए गाइडलाइन जारी हों और इसके मुताबिक अगर दोनों के बीच मतभेद हों तो वे आपस में बातचीत के जरिए सुलझाएं. अगर मामला न सुलझे तो दोनों के परिवारों के बड़े लोग मामले को सुलझाने की कोशिश करें. अगर उनके प्रयासों से भी मामला न सुलझे तो एक बार के तलाक की प्रक्रिया अपनाई जाए.
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