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CJI के खिलाफ पोस्ट पर SC सख्त, केरल कांग्रेस के पदाधिकारियों को नोटिस, 'खुद पर नियंत्रण रखते हैं, इसे कमजोरी न समझा जाए'

जस्टिस सूर्यकांत के खिलाफ केरलम प्रदेश कांग्रेस कमेटी की सोशल मीडिया पर टिप्पणी के मामले में सुप्रीम कोर्ट सख्त है. इस मामले में सुपीम कोर्ट ने सभी पदाधिकारियों को नोटिस भेजा है और जवाब मांगा है.

CJI के खिलाफ पोस्ट पर SC सख्त,  केरल कांग्रेस के पदाधिकारियों को नोटिस, 'खुद पर नियंत्रण रखते हैं, इसे कमजोरी न समझा जाए'
CJI के खिलाफ पोस्ट पर SC सख्त, केरलम कांग्रेस के पदाधिकारियो भेजा नोटिस (फाइल फोटो)
  • केरल कांग्रेस के सभी पदाधिकारियों को सुप्रीम कोर्ट ने अवमानना नोटिस जारी किया है.
  • विवादित सोशल मीडिया पोस्ट बिना पदाधिकारियों की मंजूरी के डाली गई और पार्टी ने बिना शर्त माफी मांगी है.
  • कोर्ट ने कहा कि न्यायपालिका की स्वतंत्रता सर्वोच्च है और किसी भी राजनीतिक दबाव को स्वीकार नहीं किया जाएगा.

केरलम प्रदेश कांग्रेस कमेटी की तरफ से सीजेआई जस्टिस सूर्यकांत के खिलाफ सोशल मीडिया पर टिप्पणी की गई थी. जिस पर सु्प्रीम कोर्ट सख्त है. शुक्रवार को इस मामले में जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस विपुल एम. पंचोली की पीठ ने सुनवाई की है. केरलम कांग्रेस के सभी के सभी पदाधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी किया है और पूछा है कि संविधान के अनुच्छेद-139 के तहत उनके खिलाफ अवमानना की कार्यवाही क्यों न शुरू की जाए. सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कई अहम टिप्पणियां कीं, जो यह साफ करती हैं कि न्यायपालिका अपनी गरिमा से कोई समझौता नहीं करेगी. क्योंकि संविधान सबसे ऊपर है.

केरलम कांग्रेस ने मांगी थी माफी  

सुनवाई के दौरान केरलम कांग्रेस की तरफ से पेश वकील ने कहा कि पार्टी हलफनामा दाखिल करेगी. उन्होंने बताया कि विवादित पोस्ट आधिकारिक सोशल मीडिया पेज पर पदाधिकारियों की मंजूरी या सहमति के बिना अपलोड की गई थी, पार्टी की ओर से बिना शर्त माफी भी मांगी गई थी. दलील दी कि अगले ही दिन इस संबंध में प्रेस विज्ञप्ति जारी की गई थी और पोस्ट को हटा लिया गया था. हालांकि सुपीम कोर्ट इस दलील से संतुष्ट नहीं दिखा. पीठ ने स्पष्ट किया कि नोटिस केवल किसी एक व्यक्ति को नहीं बल्कि केरलम कांग्रेस के सभी पदाधिकारियों को जारी किया जा रहा है. कोर्ट ने तीखी टिप्पणी करते हुए कहा हम देखेंगे कि हलफनामा आपकी कलम से आया है या आपके दिल से. कोर्ट ने संकेत दिया कि वह माफी की गंभीरता और उसकी वास्तविकता का आकलन करने के बाद ही आगे की कार्रवाई पर विचार करेगा. 

संविधान सर्वोच्च है: सुप्रीम कोर्ट 

आज हुई सुनवाई के दौरान सु्प्रीम कोर्ट ने कहा 'संविधान सर्वोच्च है, कोई व्यक्ति विशेष या राजनीतिक दल संविधान से ऊपर नहीं है. न्यायपालिका की स्वतंत्रता सर्वोच्च है. न्यायपालिका राजनीति की सुविधा की मोहताज नहीं है. कोर्ट की तरफ से कहा गया है कि फैसलों की आलोचना हो सकता है, लेकिन न्यायपालिका के काम में बाधा नहीं डाली जा सकती है, फिर चाहे वह कोई भी हो. सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि अदालत के अधिकार को कमजोर करने की किसी भी कोशिश से सख्ती से निपटा जाएगा, भले ही ऐसा करने वाला कितना भी प्रभावशाली क्यों न हो. पीठ ने कहा कि किसी अदालत की ताकत और सम्मान के लिए राजनीतिक समर्थन की जरूरत नहीं होती, बल्कि उसकी असली ताकत कानून के शासन पर टिकी होती है. कोर्ट की तरफ से सख्त टिप्पणी करते हुए कहा गया कि हम खुद पर नियंत्रण रखते हैं, इसे कमजोरी न समझा जाए. अभिव्यक्ति के नाम पर कुछ भी कहना स्वीकार नहीं किया जाएगा.'

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क्या है केरलम कांग्रेस से जुड़ा पूरा विवाद

दरअसल, यह पूरा मामला 12 अक्टूबर का है. कांग्रेस केरल के आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल एक्स से पोस्ट डाली गई थी. आरोप है कि इस पोस्ट में सीजेआई सूर्यकांत के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी की गई थी, जिससे न्यायपालिका की गरिमा को ठेस पहुंची.मामला सुप्रीम कोर्ट के संज्ञान में आने के बाद कोर्ट ने अवमानना की कार्यवाही पर सुनवाई शुरू की थी. 

फिलहाल सुप्रीम कोर्ट की तरफ से केरलम कांग्रेस के सभी पदाधिकारियों को नोटिस भेजा गया है, जिसमें जवाब देने के लिए भी कहा गया है. कोर्ट ने यह टिप्पणी भी की है कि यह भी देखा जाएगा कि माफी कितनी सच्ची है.  ऐसे में यह मामला एक बार फिर चर्चा में आ गया है.  

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