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CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ सोमवार SC में सुनवाई, CJI सूर्यकांत की बेंच के सामने पेश होगा मामला

याचिका में SIR के दौरान कथित रूप से 13 करोड़ मतदाताओं के नाम हटाए जाने के आरोपों की जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में न्यायिक जांच आयोग या विशेष जांच दल (SIT) गठित करने की मांग की गई है.

CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ सोमवार SC में सुनवाई, CJI सूर्यकांत की बेंच के सामने पेश होगा मामला
  • सुप्रीम कोर्ट में 5 अक्टूबर को CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ याचिकाओं की सुनवाई तीन सदस्यीय पीठ करेगी.
  • याचिकाओं में SIR से जुड़े फैसलों, तकनीकी बदलावों और मतदाता नाम हटाने को असंवैधानिक ठहराने की मांग की गई है.
  • याचिकाकर्ताओं ने 13 करोड़ मतदाताओं के नाम हटाए जाने की जांच के लिए आयोग या SIT गठित करने की मांग की है.
नई दिल्ली:

CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ दायर याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट में सोमवार, 5 अक्टूबर को सुनवाई होगी. मामले की सुनवाई CJI सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की तीन सदस्यीय पीठ करेगी. याचिकाओं में SIR से जुड़े कथित एकतरफा फैसलों, दिशानिर्देशों और सॉफ्टवेयर बदलावों को असंवैधानिक घोषित करने की की गई है. साथ ही CEC ज्ञानेश कुमार और अन्य अधिकारियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की भी मांग की गई है.

याचिकाओं में SIR के दौरान कथित रूप से करीब 13 करोड़ मतदाताओं के नाम हटाए जाने के आरोपों की जांच सुप्रीम कोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में SIT या न्यायिक आयोग से कराने और ECINet और ERONet डेटाबेस का फॉरेंसिक ऑडिट कराने की मांग की गई है. इसके अलावा CEC ज्ञानेश कुमार से यह स्पष्ट करने को कहा गया है कि उन्होंने आयोग की सामूहिक शक्तियों का इस्तेमाल किस कानूनी आधार पर किया. याचिकाओं में निर्वाचन आयोग के मूल रिकॉर्ड, फाइल नोटिंग, बैठक के एजेंडे और कार्यवृत्त तलब करने की भी मांग की गई है. साथ ही मामले की सुनवाई लंबित रहने तक ज्ञानेश कुमार को CEC के रूप में कार्य करने से रोकने की अंतरिम राहत भी मांगी गई है.

सीमा खन्ना के खिलाफ कार्रवाई की मांग

मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ पहली याचिका शैलेंद्र मणि त्रिपाठी ने दाखिल की है. याचिका में SIR से संबंधित कथित एकतरफा फैसलों को चुनौती देते हुए CEC ज्ञानेश कुमार, वरिष्ठ उप चुनाव आयुक्त मनीष गर्ग और निर्वाचन आयोग की महानिदेशक (आईटी) सीमा खन्ना के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई है. याचिकाकर्ता का आरोप है कि नवंबर 2025 से अगस्त 2026 के बीच चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने कम से कम 14 मौकों पर लिखित असहमति या आपत्ति दर्ज की थी, लेकिन इसके बावजूद संबंधित फैसलों को आयोग के फैसलों के रूप में लागू किया गया.

तकनीकी बदलावों की फॉरेंसिक जांच की मांग

याचिका में ECINet और ERONet डेटाबेस तथा SIR से जुड़े तकनीकी बदलावों की फॉरेंसिक जांच की मांग की गई है. साथ ही 1 अक्टूबर 2025 से संबंधित सर्वर लॉग, डेटाबेस, संचार और मेटाडेटा को सुरक्षित रखने के निर्देश देने की भी मांग की गई है. याचिका में मतदाता पंजीकरण के लिए इस्तेमाल होने वाले Form-6 में कथित बदलाव को भी चुनौती दी गई है. याचिकाकर्ता का दावा है कि ECINet पोर्टल पर Form-6 में ऐसी जानकारी मांगी गई, जो आवेदक या उसके रिश्तेदार की पिछली SIR मतदाता सूची में मौजूदगी से संबंधित थी. इसलिए मूल वैधानिक Form-6 को बहाल करने की मांग की गई है.

याचिका में SIR के दौरान कथित रूप से 13 करोड़ मतदाताओं के नाम हटाए जाने के आरोपों की जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में न्यायिक जांच आयोग या विशेष जांच दल (SIT) गठित करने की मांग भी की गई है. इसके अलावा पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची में नाम जोड़े जाने को चुनौती देने वाली कथित 16.10 लाख अपीलों की परिस्थितियों की जांच की मांग की गई है.

याचिका में जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 32 के तहत CEC ज्ञानेश कुमार, वरिष्ठ उप चुनाव आयुक्त मनीष गर्ग, आईटी महानिदेशक सीमा खन्ना तथा जांच में दोषी पाए जाने वाले अन्य अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई और अभियोजन शुरू करने की मांग की गई है. मामले में केंद्र सरकार, निर्वाचन आयोग, ज्ञानेश कुमार, कैबिनेट सचिव, मनीष गर्ग और सीमा खन्ना को प्रतिवादी बनाया गया है.

वहीं, दूसरी याचिका राकेश कुमार सिंह ने दाखिल की है. याचिका में कहा गया है कि संविधान के अनुच्छेद 324 के तहत चुनावों के अधीक्षण, निर्देशन और नियंत्रण की शक्ति किसी एक व्यक्ति को नहीं, बल्कि निर्वाचन आयोग को एक संस्था के रूप में प्रदान की गई है. याचिकाकर्ता का कहना है कि CEC आयोग के अध्यक्ष जरूर हैं, लेकिन उन्हें आयोग की सामूहिक शक्तियों का अकेले इस्तेमाल करने का अधिकार नहीं है. राकेश कुमार सिंह की याचिका में दावा किया गया है कि 28 अक्टूबर 2025 से 14 अगस्त 2026 के बीच चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने कम से कम 14 मौकों पर आयोग के नाम पर लिए गए फैसलों और कदमों पर आपत्ति दर्ज की थी. हालांकि निर्वाचन आयोग का कहना है कि जिन पत्रों का उल्लेख किया गया है, वे एक अधिकारी की प्रतिनियुक्ति से संबंधित थे और उनका नीति या आईटी विभाग के मामलों से कोई संबंध नहीं था.

याचिका में सुप्रीम कोर्ट से यह निर्देश देने की भी मांग की गई है कि CEC ज्ञानेश कुमार यह स्पष्ट करें कि उन्होंने किस अधिकार के तहत आयोग की सामूहिक निर्णय लेने की शक्ति का इस्तेमाल किया. साथ ही आयोग के मूल रिकॉर्ड, फाइल नोटिंग, बैठक के कार्यवृत्त, मंजूरी संबंधी दस्तावेज और पत्राचार तलब कर यह जांच करने की मांग की गई है कि विवादित फैसले संविधान और 2023 के कानून के अनुरूप लिए गए थे या नहीं.

दिशा-निर्देश जारी करने की मांग

याचिका में देशभर में चल रहे SIR और उससे जुड़े सभी निर्देशों, आदेशों तथा निर्णयों को भी चुनौती दी गई है. मांग की गई है कि यदि जांच में यह पाया जाता है कि SIR या उससे संबंधित फैसले संवैधानिक और वैधानिक प्रक्रियाओं का पालन किए बिना लिए गए, तो उन्हें प्रारंभ से ही अवैध और शून्य घोषित किया जाए. इसके अलावा निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर भी दिशा-निर्देश जारी करने की मांग की गई है. याचिकाकर्ता चाहते हैं कि आयोग के नाम से जारी होने वाले आदेश, पत्र और निर्देश विधिसम्मत निर्णय प्रक्रिया के आधार पर जारी हों, बैठकों का एजेंडा पहले से प्रसारित किया जाए तथा बैठकों के बाद कार्यवृत्त दर्ज किए जाएं. साथ ही मतभेद की स्थिति में आयोग के निर्णय बहुमत के आधार पर लिए जाएं, जैसा कि 2023 के कानून की धारा 18 में प्रावधान किया गया है.

याचिका में अंतरिम राहत के तौर पर ज्ञानेश कुमार को CEC की शक्तियों के इस्तेमाल से रोकने और सुनवाई पूरी होने तक निर्वाचन आयोग का कामकाज अन्य दो चुनाव आयुक्तों के माध्यम से संचालित कराने की मांग भी की गई है. इसके अलावा SIR से जुड़े सभी इलेक्ट्रॉनिक और भौतिक रिकॉर्ड, डेटाबेस, ऑडिट ट्रेल, सर्वर लॉग और आईटी एक्सेस रिकॉर्ड सुरक्षित रखने का निर्देश देने की मांग भी की गई है.

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