अयोध्या के श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में चढ़ावे और दान राशि की कथित चोरी के मामले में गठित एसआईटी की जांच पूरी हो गई है. सूत्रों की मानें तो एसआईटी को जांच के दौरान कई अहम सबूत हाथ लगे हैं. शक के दायरे में ट्रस्ट से जुड़े अनिल मिश्रा और गोपाल राव भी शामिल हैं. बताया जा रहा है कि गड़बड़ियां कई स्तर से सामने आई हैं. चाहे नोटों की गिनती की बात हो या फिर सीसीटीवी कैमरों से छेड़छाड़. श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के अनुरोध पर उत्तर प्रदेश सरकार ने 13 जून को तीन सदस्यीय एसआईटी गठित की थी, ये टीम मंदिर के दान में हेराफेरी के आरोपों की जांच कर रही है. आइए बताते हैं कि अब तक एसआईटी के हाथ क्या-क्या लगा है.
ट्रस्ट के अधिकारी अनिल मिश्रा और गोपाल राव पर शिकंजा
सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, एसआईटी को श्रीराम मंदिर में चढ़ावे में चोरी का सबूत मिल गया है. SIT की प्रारंभिक जांच पूरी हो गई है. एसआईटी सीएम योगी आदित्यनाथ को अपनी प्रारंभिक जांच रिपोर्ट सौंप सकती है. SIT में अनिल मिश्रा और गोपाल राव की भूमिका जांच के दायरे में है. SIT को सीसीटीवी फुटेज से रकमकम किये जाने के सबूत मिले हैं. कुछ सीसीटीवी फुटेज डिलीट किए जाने का भी शक है. एसआईटी ने लापरवाही और साजिश इन दोनों पहलुओं की जांच की है. एसआईटी ने पाया कि दान राशि की गणना प्रक्रिया की निगरानी तंत्र पूरी तरह फेल है. ऐसे में टिन्नू यादव, कुछ गरणाकर्मी और बैंक कर्मियों के खिलाफ FIR भी दर्ज हो सकती है. सूत्रों के मुताबिक, SIT ने ट्रस्ट के पदाधिकारी अनिल मिश्रा और निर्माण सहायक गोपाल राव की भूमिका को संदिग्ध करार दिया है.
बैंक कर्मी समेत 20-25 लोगों की लापरवाही
SIT ने छह दिनों में करीब 150 लोगों से पूछताछ की है. ट्रस्ट के 3 पदाधिकारियों समेत प्रबंधन के 20-25 लोगों की लापरवाही या संलिप्तता सामने आई है. 6 कर्मी SBI के और TCS के 6 कर्मियों से पूछताछ हुई. एसआईटी की रिपोर्ट आने के बाद मंदिर ट्रस्ट के प्रबंधन में बड़े बदलाव होने तय माने जा रहे हैं.
पैसे ही नहीं सोना-चांदी का चढ़ावा भी हुआ गायब
ये मुद्दा उठा था कि चढ़ावे के पैसे गायब हो रहे हैं, लेकिन धीरे-धीरे ये सामने आ रहा है कि सोना-चांदी का चढ़ावा भी गायब हुआ है. फर्ज़ी ट्रस्ट के नाम से गबन हो रहा है. जाचं में ये भी सामने आ रहा है कि जिन कमरों में चढ़ावे की गिनती होती थी. वहां के सीसीटीवी में भी छेड़छाड़ संभव है. ये भी सामने आया है कि ट्रस्ट में करीबी लोगों को महत्वपूर्ण काम पर लगा दिया जाता था.
सीसीटीवी से भी छेड़छाड़?
ये जानकारी सामने आ चुकी है कि जिस कमरे में चढ़ावे की गिनती होती थी, वहां सीसीटीवी कैमरा लगा था, लेकिन 45 दिन से ज्यादा की फुटेज नहीं रखी जाती थी. सूत्रों के मुताबिक फुटेज से छेड़छाड़ भी हो सकती है.
CCTV की फॉरेंसिक जांच
इस हाई-प्रोफाइल मामले में सुरक्षा व्यवस्था और सर्विलांस सिस्टम पूरी तरह से जांच के घेरे में हैं. क्या फुटेज डिलीट की गई? क्या कैमरों से छेड़छाड़ की गई? इसकी गहनता से जांच की जा रही है. ये सामने आया है कि नोटों की गड्डियां गिनते समय उन्हें गायब किया गया. सीसीटीवी की फॉरेंसिक जांच कराए जाने की भी योजना है. जानकारी के मुताबिक, रिकॉर्डिंग में संभावित छेड़छाड़ और डेटा डिलीट होने के बाद डिजिटल वीडियो रिकॉर्डर को डेटा रिकवरी और फॉरेंसिक एनालिसिस के लिए दिल्ली की लैब भेजा गया है.
आईटी कंपनी की क्यों नहीं ली मदद?
सूत्रों के मुताबिक ये जानकारी आ रही है कि ट्रस्ट को सुझाव दिया गया था कि सीसीटीवी फुटेज को लंबे समय तक सुरक्षित रखने के लिए क्लाउड मेमोरी ली जाए. या किसी आईटी कंपनी को इस काम में लगा दिया जाए, लेकिन ज्यादा पैसे खर्च होंगे, इसलिए ट्रस्ट ने इस सुझाव को गैर मुनासिब समझा.
ऑडिट की रिपोर्ट नजरअंदाज हुई!
कथित चंदा चोरी का मामला सामने आने के बाद ट्रस्ट के ऊपर कई तरह के सवाल खड़े हो रहे हैं. सूत्रों के मुताबिक, ट्रस्ट के गठन के बाद जब इंटरनल ऑडिटर से चढ़ावे का हिसाब करने को कहा गया, तभी इंटरनल ऑडिटर ने गड़बड़ियों की एक रिपोर्ट ट्रस्ट को दी थी. लेकिन उस रिपोर्ट को सिरे से नजरअंदाज कर दिया गया. इसके बाद करीब-करीब एक फ्रेशर को ट्रस्ट का सीए बनाकर हिसाब-किताब के काम में लगा दिया गया. ट्रस्ट के पदाधिकारियों से कहा गया कि अगर कोई बड़ी फर्म ऑडिट के लिए हायर की जाएगी, तो उसके कर्मचारियों की मोटी तनख्वाह होगी. उसे इन्श्योरेन्स से लेकर पीएफ जैसे खर्च देने पड़ेंगे, बताया जा रहा है कि कम पैसे पर स्थानीय लोगों को रखा गया. करीबी लोगों को चढ़ावा गिनने में लगा दिया. सूत्र के मुताबिक, ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरी अब तक एसआईटी के सामने पेश नहीं हुए हैं.
'स्पेशल दर्शन' और कच्ची रसीद!
ये भी सामने आ रहा है कि राम मंदिर में आने वाले वीवीआईपी और वीआईपी लोगों के साथ ट्रस्ट के करीबियों को लगा दिया जाता था. मनमाने तरीके से वीआईपी के नाम पर कथित अपने लोगों' को स्पेशल दर्शन पूजन कराया जाता था. यहां तक की उनकी गाड़ियां भी मंदिर परिसर के अंदर ले जाने का काम तमाम कर्मचारी किया करते थे. इसी में कई ऐसे भी लोग थे, जो ट्रस्ट को दान के नाम पर देने वाले पैसे, सोना, चांदी या दूसरे कीमती सामान ट्रस्ट के इन्हीं करीबियों को दे देते थे. बदले में कच्ची रसीद दे दी जाती थी.
सीएम योगी और आज जांच रिपोर्ट सौंपेगी SIT!
एसआईटी की टीम आज वापस लौट सकती है. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को एसआईटी की टीम प्रारंभिक रिपोर्ट सौंप सकती है. आज SIT की जांच का छठा दिन है. अभी तक SIT ने ट्रस्ट के तमाम पदाधिकारियों से पूछताछ कर चुकी है. डोनेशन काउंटिंग से जुड़े सभी कर्मचारियों और बैंक कर्मचारियों से पूछताछ हो चुकी है.
SIT दे सकती है ये अहम सुझाव
- श्री राम मंदिर में नए सिरे से ट्रस्ट का गठन किया जाए.
- पारदर्शिता के लिए काशी विश्वनाथ की तर्ज पर कार्यपालक अधिकारी नियुक्त किया जाए.
- ट्रस्ट के सरकारी पदेन 3 सदस्यों को चढ़ावे की गणना की जिम्मेदारी बढ़ाई जाए.
- तय समय में चढ़ावे का ऑडिट कराया जाए और उसकी रिपोर्ट शासन को दी जाए.
- कर्मचारियों की भर्ती को पारदर्शिता बनाया जाए.
- सिफारिश के आधार पर भर्ती ना हो.
- बैंक गणना कार्यों में अपने नियमित कर्मचारियों को लगाए, संविदा कर्मियों को नहीं.
- निगरानी तंत्र को और मजबूत किया जाए.
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टिन्नू यादव पर SIT का शिकंजा
सूत्रों की मानें तो अयोध्या में श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय के करीबी टिन्नू यादव पर कार्रवाई की तैयारी हो रही है. एसआईटी टिन्नू यादव समेत दान की जांच करने वाले कर्मचारी और कुछ बैंक कर्मचारियों पर कानूनी शिकंजा कर सकती है. इन सब पर केस दर्ज कर जेल भेजा जा सकता है. जिन पदाधिकारियों की लापरवाही से चोरी हुई, उन्हें ट्रस्ट से बाहर का रास्ता दिखाया जा सकता है. आज SIT की टीम वापस लौट सकती है. आज जांच का छठा दिन है. 7 दिन के अंदर एसआईटी को अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट सौंपनी है.
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