- श्रीराम जन्मभूमि मंदिर ट्रस्ट के सदस्य पर मंदिर निर्माण में चालीस प्रतिशत कमीशन लेने का गंभीर आरोप लगा है
- आरोप के बावजूद ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने कोई कार्रवाई नहीं की और इंजीनियर दीनानाथ वर्मा को हटा दिया गया था
- तीन सदस्यीय एसआईटी ने चढ़ावा चोरी मामले में चंपत राय, अनिल मिश्रा, गोपाल राव और रामशंकर यादव से कई बार पूछताछ
श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में चढ़ावा कथित चोरी की जांच के बीच अब ट्रस्ट के आंतरिक कामकाज और भ्रष्टाचार के पुराने आरोप भी फिर से गरमा गए हैं. पूर्व में मंदिर निर्माण कार्य में लगे प्रयागराज के इंजीनियर दीनानाथ वर्मा द्वारा ट्रस्ट के सदस्य डॉ. अनिल मिश्रा पर लगाए गए गंभीर आरोपों ने एक बार फिर तूल पकड़ लिया है. वहीं, छठे दिन एसआईटी पहले चरण की जांच पूरी करके अयोध्या से लखनऊ के लिए लौट गई है.
इंजीनियर का दावा: 40% कमीशन लेते ट्रस्ट सदस्य
इंजीनियर दीनानाथ वर्मा का आरोप है कि ट्रस्ट के सदस्य डॉ. अनिल मिश्रा मंदिर निर्माण कार्य में 40% कमीशन लेते थे. इंजीनियर का दावा है कि इस बात की पूरी जानकारी ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय को भी थी. चौंकाने वाली बात यह है कि इस गंभीर शिकायत के बाद आरोपी पर कोई कार्रवाई करने के बजाय, उल्टे इंजीनियर दीनानाथ वर्मा को ही वहां से हटा दिया गया और उन्हें चढ़ावा गणना केंद्र में भेज दिया गया था.
चंपत राय और अनिल मिश्रा से कई राउंड की पूछताछ
एसआईटी इस पूरे नेक्सस को खंगालने में जुटी है. सूत्रों के मुताबिक, जांच टीम ने अब तक राम मंदिर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय, सदस्य डॉ. अनिल मिश्रा, गोपाल राव और रामशंकर यादव उर्फ 'टिन्नू यादव' से कई राउंड की कड़ी पूछताछ की है.
माना जा रहा है कि यदि एसआईटी की जांच रिपोर्ट के आधार पर कड़ी कार्रवाई होती है, तो ट्रस्ट के कई बड़े पदाधिकारियों और कर्मचारियों की मुश्किलें बढ़ना तय है. फिलहाल एसआईटी अपनी जांच को अंतिम रूप देने में लगी है.
एसआईटी की ग्राउंड रिपोर्ट तैयार, अयोध्या से लखनऊ वापसी
राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले की परतें खोलने में जुटी तीन सदस्यीय एसआईटी का अयोध्या दौरा अंतिम दौर में है. जांच टीम शनिवार देर शाम अयोध्या से लखनऊ के लिए रवाना हो गई. एसआईटी का पहला बड़ा टारगेट मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को 'पहले चरण की प्रारंभिक रिपोर्ट' सौंपना है, ताकि शासन स्तर पर त्वरित जानकारी दी जा सके.
करीब 100 लोगों से पूछताछ
इस हाई-प्रोफाइल मामले की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि एसआईटी ने 6 दिन में अब तक 100 से अधिक लोगों को जांच के दायरे में लिया है. बंद कमरों में ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय, सदस्य अनिल मिश्रा, गोपाल राव और रामशंकर यादव उर्फ 'टिन्नू यादव' से कई दौर की तीखी पूछताछ हो चुकी है. सबसे बड़ी खबर यह है कि टीम ने छापेमारी कर कई संदिग्ध ठिकानों से चोरी की गई भारी-भरकम रकम भी रिकवर कर ली है, जो इस बात का बड़ा सबूत है कि खेल काफी बड़ा था.
एसआईटी जांच के बाद कइयों पर गाज गिरना तय!
एसआईटी को फाइनल रिपोर्ट सौंपने के लिए 15 दिनों का वक्त मिला है. यह जांच दो चरणों में चल रही है. शनिवार को जांच को छह दिन पूरे हो चुके हैं. कयास लगाए जा रहे हैं कि मुख्यमंत्री को प्रारंभिक रिपोर्ट मिलते ही ट्रस्ट के कई बड़े पदाधिकारियों और कर्मचारियों पर बड़ी गाज गिर सकती है. हालांकि, आधिकारिक तौर पर किसी की भूमिका तय होना अभी बाकी है.
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