- भारतीय वायुसेना के पूर्व एयर मार्शल जीतेंद्र मिश्रा श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पहले सीईओ नियुक्त
- जीतेंद्र मिश्रा के पास मंदिर प्रबंधन, दर्शन व्यवस्था, सुरक्षा, वित्तीय लेन-देन आदि की जिम्मेदारी होगी
- ट्रस्ट की धार्मिक समिति देखेगी, जबकि प्रशासनिक और परियोजना निगरानी सीईओ के अधीन होगी
Ram Mandir CEO Jitendra Mishra: अयोध्या के श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को ऑपरेशन सिंदूर के हीरो और भारतीय वायुसेना के पूर्व एयर मार्शल जीतेंद्र मिश्रा के रूप में अपना पहला सीईओ मिल गया है. चढ़ावा चोरी प्रकरण के बीच 2 सितंबर 2026 को राम मंदिर के सीईओ बने जीतेंद्र मिश्रा की अब असली परीक्षा है, क्योंकि उनके कंधों पर महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों के साथ-साथ कई बड़ी चुनौतियां भी हैं.
सूत्रों के मुताबिक, जीतेंद्र मिश्रा की नियुक्ति के बाद श्रीराम मंदिर प्रबंधन और व्यवस्था संचालन का मॉडल बदला जाएगा. सीईओ के पास मंदिर में विशेष आयोजनों और दर्शन व्यवस्था की मुख्य जिम्मेदारी होगी. यहां आने वाले लाखों श्रद्धालुओं की सुविधाएं, कर्मचारी और उनसे जुड़े सभी मामले भी सीईओ ही देखेंगे.
इनके अलावा श्रीराम मंदिर से संबंधित वित्तीय लेन-देन, आयोजनों के लिए खरीद और टेंडर की जिम्मेदारी भी सीईओ जीतेंद्र मिश्रा के पास ही होगी. वे मंदिर व श्रद्धालुओं की सुरक्षा, सुरक्षा एजेंसियों में समन्वय, आईटी एवं डिजिटल निगरानी, और परियोजनाओं की मॉनिटरिंग का काम भी संभालेंगे. संबंधित धार्मिक कार्य भी इसी व्यवस्था के दायरे में रहेंगे. वहीं कर्मचारियों की तैनाती, सुविधाओं का संचालन और रोजमर्रा की प्रशासनिक व्यवस्था सीईओ के अधीन रहेगी.
राम मंदिर सीईओ जीतेंद्र मिश्रा कौन हैं?
राम मंदिर के पहले सीईओ जीतेंद्र मिश्रा मूल रूप से उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले के बनकटा ब्लॉक स्थित भोपतपुरा गांव के रहने वाले हैं. हालांकि, उनके जीवन का अधिकांश समय राजधानी दिल्ली में बीता है. जीतेंद्र मिश्रा के पिता नथुनी मिश्रा दिल्ली के एक कॉलेज में लेक्चरर थे, और उनकी माता का नाम सरस्वती देवी है.
उनके भाई दिल्ली के एक बड़े सरकारी अस्पताल में डॉक्टर हैं. उनकी पत्नी का नाम वत्सला मिश्रा है और उनके दो बेटे हैं. वर्तमान में जीतेंद्र मिश्रा का परिवार दिल्ली में ही रहता है, जबकि उनके चाचा रामप्यारे मिश्रा का परिवार गांव में रहता है. उनके चचेरे भाई इलाहाबाद हाईकोर्ट में अधिवक्ता हैं.
गांव भोपतपुरा में मनाया गया जश्न
अप्रैल में इंडियन एयरफोर्स से रिटायर हुए जीतेंद्र मिश्रा का परिवार भले ही वर्तमान में दिल्ली में रह रहा हो, लेकिन अपने मूल गांव भोपतपुरा से उनका जुड़ाव आज भी कायम है और वे अक्सर गांव आते-जाते रहते हैं. राम मंदिर ट्रस्ट के सीईओ पद पर जीतेंद्र मिश्रा की नियुक्ति की सूचना मिलते ही भोपतपुरा गांव में लोगों ने जश्न मनाया और इसे पूरे गांव के लिए गर्व की बात बताया.
बचपन से था विमान उड़ाने का शौक
मदन मोहन मालवीय इंटर कॉलेज के लिपिक पद से सेवानिवृत्त चाचा रामप्यारे मिश्रा के अनुसार, जीतेंद्र को बचपन से ही विमान उड़ाने का शौक था. उनके चचेरे भाइयों विवेक और अंकित मिश्रा ने बताया कि जीतेंद्र मिश्रा करीब पांच साल पहले अपनी पत्नी वत्सला मिश्रा और बेटों शांतनु तथा शारण्य के साथ भोपतपुरा आए थे.
'राम मंदिर को कोई बदनाम नहीं कर सकता'
"राम मंदिर को कोई बदनाम नहीं कर सकता, क्योंकि मंदिर बदनामी का मुद्दा ही नहीं है." यह कहना है नव-नियुक्त राम मंदिर ट्रस्टी एडवोकेट मदन मोहन पांडेय का. उन्होंने कहा कि जो लोग राम मंदिर के खिलाफ बोल रहे हैं, वे गलत कर रहे हैं; लोगों की आस्था पूरी तरह बरकरार है. उन्होंने यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की तारीफ करते हुए कहा कि उन्होंने इस मामले में कोई ढिलाई नहीं बरती है और सीईओ की नियुक्ति एक बेहद अच्छी पहल है.
मंदिर के लिए लड़ी थी कानूनी लड़ाई
अयोध्या कैंट के रिकाबगंज निवासी मदन मोहन ने 1994 से रामलला विराजमान और परमहंस रामचंद्र दास के वकील के तौर पर मंदिर के लिए लंबी कानूनी लड़ाई लड़ी है. उन्होंने कहा कि मंदिर बनने के बाद उन्हें सेवा का अवसर मिला है, जिसे वे पूरी निष्ठा और लगन से निभाएंगे. उधर, महंत गोविंद देव गिरि ने बताया कि प्रवक्ता पद के लिए जिस उपयुक्त नाम की तलाश है, वह अभी पूरी नहीं हुई है, जिसके कारण प्रवक्ता का चयन फिलहाल स्थगित रखा गया है.
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