बिहार विधान परिषद की आठ सीटों पर होने वाले चुनाव को लेकर अब तस्वीर तेजी से साफ हो रही है. चुनाव की तारीख पहले ही घोषित हो चुकी है. इन आठ सीटों पर 23 अक्टूबर को वोटिंग होगी और 27 अक्टूबर को नतीजे आएंगे. चार सीटें स्नातक और चार सीटें शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र की हैं. इनमें पटना, दरभंगा, तिरहुत और कोसी की स्नातक सीटें और पटना, दरभंगा, तिरहुत और सारण की शिक्षक सीटें शामिल हैं. अब जेडीयू ने भी अपनी चार सीटों के लिए उम्मीदवारों के नाम घोषित कर दिए हैं. पार्टी ने पटना स्नातक सीट से नीरज कुमार, तिरहुत स्नातक सीट से अभिषेक झा, सारण शिक्षक सीट से आनंद पुष्कर और दरभंगा शिक्षक सीट से दिलीप चौधरी को मैदान में उतारा है.
नीरज कुमार की उम्मीदवारी पर नजर
जेडीयू की सूची आने से पहले कई दिनों से इन नामों को लेकर चर्चा चल रही थी. अब आधिकारिक सूची आने के बाद सबसे ज्यादा चर्चा पटना स्नातक सीट की है. नीरज कुमार इस सीट से पहले भी चुनाव जीत चुके हैं और जेडीयू ने एक बार फिर उन्हीं पर भरोसा किया है. लेकिन इस सीट पर पार्टी के अंदर ही एक अलग राजनीतिक कहानी चल रही है. जेडीयू विधायक अनंत सिंह पहले ही नीरज कुमार के खिलाफ अपना रुख साफ कर चुके हैं और उनके विरोध में दूसरे उम्मीदवार को समर्थन देने की बात कह चुके हैं. ऐसे में नीरज कुमार के सामने सिर्फ विपक्षी उम्मीदवारों की चुनौती नहीं होगी, बल्कि पार्टी के अंदर के मतभेद को संभालना भी एक बड़ा सवाल होगा.
JDU ने किस-किसको बनाया उम्मीदवार
पटना स्नातक निर्वाचन क्षेत्र : नीरज कुमार
तिरहुत स्नातक निर्वाचन क्षेत्र : अभिषेक झा
सारण शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र : आनंद पुष्कर
दरभंगा शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र : घनश्याम राय
तिरहुत स्नातक सीट से अभिषेक झा को टिकट दिया गया है. यह नाम भी जेडीयू के लिए नया नहीं है. वह पहले भी इस सीट से चुनाव लड़ चुके हैं और लंबे समय से इस इलाके में सक्रिय रहे हैं.इस सीट पर भी जेडीयू को आरजेडी और दूसरे दलों के उम्मीदवारों से मुकाबला करना होगा. तिरहुत की राजनीति में शिक्षक और स्नातक वर्ग के अपने अलग मुद्दे हैं और उम्मीदवारों के लिए व्यक्तिगत संपर्क काफी मायने रखता है.
सारण शिक्षक सीट से आनंद पुष्कर को उम्मीदवार बनाया गया है. आनंद पुष्कर दिवंगत शिक्षक नेता और पूर्व एमएलसी केदार पांडेय के बेटे हैं. वह पहले भी इस सीट से चुनाव लड़ चुके हैं. बाद में वह जेडीयू में शामिल हुए और अब पार्टी ने उन्हें अपने उम्मीदवार के तौर पर मैदान में उतारा है. ऐसे में उनके लिए इस चुनाव में पुराना राजनीतिक संपर्क और शिक्षक वर्ग के बीच पहचान महत्वपूर्ण हो सकती है.
चुनाव में NDA की स्थिति साफ
जेडीयू के चार नाम सामने आने के बाद अब एनडीए की तस्वीर भी काफी हद तक साफ हो रही है. आठ सीटों में से जेडीयू चार सीटों पर चुनाव लड़ रही है. बाकी सीटों पर बीजेपी और एनडीए के दूसरे सहयोगियों के उम्मीदवारों की तस्वीर सामने आनी बाकी है. इसलिए अब नजर बीजेपी की सूची पर है. किस सीट पर बीजेपी किसे उतारती है और सहयोगी दलों के बीच सीटों का तालमेल किस तरह होता है, यह आने वाले दिनों में साफ होगा.
RJD ने भी उम्मीदवार उतारे
दूसरी तरफ आरजेडी पहले ही आठ में से छह सीटों पर अपने उम्मीदवारों के नाम घोषित कर चुकी है. आरजेडी ने पटना शिक्षक, पटना स्नातक, कोसी स्नातक, दरभंगा स्नातक, सारण शिक्षक और तिरहुत स्नातक सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे हैं. यानी विपक्ष ने काफी पहले अपने पत्ते खोल दिए थे. अब जेडीयू की सूची आने के बाद इन सीटों पर मुकाबले की तस्वीर ज्यादा साफ हो गई है.
इस चुनाव में जन सुराज भी अपनी मौजूदगी दर्ज कराने की कोशिश कर रहा है. प्रशांत किशोर की पार्टी शिक्षक और स्नातक सीटों पर अपना आधार बनाने की कोशिश कर रही है. ऐसे में कई सीटों पर मुकाबला दो दलों के बीच सीधा नहीं रह सकता. उम्मीदवारों की अपनी पहचान, स्थानीय संपर्क और वोटरों के बीच पकड़ भी बड़ी भूमिका निभा सकती है.
क्यों खास है एमएलसी चुनाव?
इन चुनावों का राजनीतिक महत्व इसलिए भी है क्योंकि बिहार की राजनीति इस समय एक नए दौर में है. नीतीश कुमार मुख्यमंत्री पद छोड़ चुके हैं और अब बीजेपी के सम्राट चौधरी मुख्यमंत्री हैं. जेडीयू सत्ता में बीजेपी की सहयोगी है. ऐसे समय में विधान परिषद की इन सीटों का चुनाव एनडीए के अंदर के तालमेल और दोनों दलों की अपनी राजनीतिक ताकत को भी दिखाएगा.
जेडीयू के लिए यह चुनाव एक और वजह से महत्वपूर्ण है. पार्टी इस समय नीतीश कुमार के मुख्यमंत्री पद से हटने के बाद अपनी राजनीतिक पहचान और संगठन को नए तरीके से मजबूत करने की कोशिश कर रही है. ऐसे में चार सीटों पर उम्मीदवारों का चयन सिर्फ चुनाव लड़ने का फैसला नहीं है. इन उम्मीदवारों के प्रदर्शन से यह भी पता चलेगा कि पार्टी का संगठन इन खास वोटर वर्गों में कितना मजबूत है.
अब मुकाबले का अगला बड़ा चरण नामांकन का है. इसके बाद तस्वीर पूरी तरह साफ होगी कि किस सीट पर कौन-कौन आमने-सामने है. फिलहाल जेडीयू ने अपने चार नाम घोषित कर दिए हैं, आरजेडी ने छह सीटों पर उम्मीदवार उतार दिए हैं और जन सुराज भी मैदान में है. ऐसे में 23 अक्टूबर को होने वाला यह चुनाव बिहार की मौजूदा राजनीति में एक और महत्वपूर्ण मुकाबला बनने जा रहा है.
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