अयोध्या राम मंदिर के CEO पद पर एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा की नियुक्ति को लेकर उठे विवाद के बीच राम मंदिर ट्रस्ट ने विस्तृत सफाई जारी की है. सोशल मीडिया पर यह दावा किया जा रहा था कि उनका चयन बिना इंटरव्यू के हुआ, लेकिन ट्रस्ट ने इन आरोपों को तथ्यात्मक रूप से गलत बताया है. ट्रस्ट के अनुसार 5,585 आवेदनों की एआई और मैनुअल स्क्रीनिंग के बाद 16 उम्मीदवारों को अंतिम इंटरव्यू के लिए बुलाया गया था. चयन समिति ने तीन नामों का पैनल ट्रस्ट को सौंपा, जिसमें जितेंद्र मिश्रा भी शामिल थे. ट्रस्ट ने इन्हीं तीन नामों में से उनका चयन सीईओ पद के लिए किया.
क्या था मामला?
राम मंदिर सीईओ के पद के लिए फाइनल राउंड इंटरव्यू देने वाले पूर्व आईपीएस अधिकारी राजेश पांडे के एक पॉडकास्ट इंटरव्यू में सीईओ की नियुक्ति को लेकर एक जवाब दिया. इसमें उन्होंने बताया कि कुल 16 लोग इंटरव्यू देने आए थे, जिनमें दो आईएएस और नौ सेना के लोग भी शामिल थे. उन्होंने कहा कि उन्होंने जितेंद्र मिश्रा को नहीं देखा. हालांकि वो ये नहीं कह रहे थे कि जितेंद्र मिश्रा इंटरव्यू देने नहीं आए लेकिन इस इंटरव्यू के बाद सोशल मीडिया में कहा गया कि जितेंद्र मिश्रा के नाम का चयन बिना इंटरव्यू के हो गया. आरोप लगा कि जितेंद्र मिश्रा किसी बड़ी पैरवी की वजह से सीईओ बनाये गए हैं.
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ट्रस्ट ने सीईओ की नियुक्ति प्रक्रिया पर जारी किया बयान
ट्रस्ट ने जारी किया बयान
इन्हीं आरोपों को लेकर ट्रस्ट ने बयान जारी कर बताया कि ये आरोप तथ्यात्मक तौर पर ग़लत है. ट्रस्ट ने बताया कि 5585 लोगों के आवेदन दिया. तीन सदस्यों वाली समिति ने एआई स्क्रीनिंग और मैनुअली कई स्तर की स्क्रीनिंग करके 16 लोगों के नाम फाइनल किए. इन सभी 16 लोगों को 11 और 12 अगस्त को इंटरव्यू के लिए बुलाया गया. इनमें से तीन नाम फाइनल करके ट्रस्ट को दिए गए और ट्रस्ट ने उन तीन में से एक नाम जितेंद्र मिश्रा का फाइनल किया.

ट्रस्ट की ओर से कहा गया कि चयन प्रक्रिया संस्थागत शासन और पारदर्शिता के सर्वोच्च मानकों के अनुसार आयोजित की गई थी. प्रत्येक चरण दस्तावेज़ीकृत था, और सभी अंतिमवर्तीयों की पहचान अयोध्या में दर्ज की गई थी. न्यास पारदर्शिता के प्रति प्रतिबद्ध है और चयन प्रक्रिया के संबंध में किसी भी और जांच को संबोधित करने के लए तथ्यात्मक जानकारी प्रदान करना जारी रखेगा.
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