केंद्र सरकार संसद में पिछले एक सप्ताह से ज्यादा वक्त से जारी हंगामे को खत्म करने की पहल में जुट गई है. संसदीय कार्यमंत्री किरेन रिजिजू ने आज लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी से मुलाकात की और उनसे सदन की कार्यवाही सुचारू रूप से संचालित करने में मदद मांगी. हालांकि, सूत्रों ने बताया कि राहुल ने रिजिजू से स्पष्ट कहा कि सदन में गृह मंत्री के बयान के बिना कार्यवाही नहीं चलेगी.
परिसीमन बिल पर मांगा सहयोग
कांग्रेस के सूत्रों ने बताया कि राहुल गांधी से मुलाकात में रिजिजू ने परिसीमन और महिला आरक्षण संविधान संशोधन विधेयक पर कांग्रेस का सहयोग मांगा था. हालांकि, राहुल ने साफ किया कि चंदा चोरी और छात्रों पर पुलिस कार्रवाई के बारे में गृह मंत्री अमित शाह के बयान के बिना सदन की कार्यवाही नहीं चलेगी. इसके बाद रिजिजू स्पीकर से मिले और फिर अमित शाह को जानकारी दी.
पढ़ें, सैनिक स्कूलों पर संसदीय समिति में राहुल-बीजेपी आमने-सामने, निजीकरण और RSS लिंक पर तीखी तकरार
करीब 50 मिनट तक चली बैठक
रिजिजू और राहुल गांधी के बीच करीब 50 मिनट तक बैठक चली. बैठक के दौरान प्रियंका गांधी भी मौजद रहीं. इस दौरान संसद में गतिरोध को खत्म करने को लेकर भी चर्चा हुई. राहुल गांधी के कमरे में चली बैठक. गौरतलब है कि पिछले एक सप्ताह से ज्यादा वक्त से संसद का मॉनसून सत्र नहीं चल पा रहा है. नीट पेपर लीक पर लोकसभा और राज्यसभा में चर्चा जरूर हुई लेकिन उसके बाद दोनों सदनों की कार्यवाही प्रभावित हुई है. सरकार ने कुछ जरूरी विधेयक विपक्ष के शोर शराबे के बीच में ही पास करवा लिया. ऐसे में राहुल और रिजिजू की ये मुलाकात काफी अहम मानी जा रही है.
पढ़िए, हर राज्य को अपनी भाषा और संस्कृति का अधिकार, इसे खत्म नहीं किया जा सकता: राहुल गांधी
वेणुगोपाल ने भी सरकार को घेरा
कांग्रेस सांसद केसी वेणुगोपाल ने कहा कि रिजिजू प्रधानमंत्री का एजेंडे को लेकर मिले. हम चंदा चोरी पर चर्चा चाहते हैं. पेपर लीक के खिलाफ सख्त क़ानून से जुड़ा विधेयक पारित होने के बाद विपक्ष इन दो मांगों को लेकर संसद में लगातार प्रदर्शन कर रहा है. मॉनसून सत्र में अब केवल छह दिन बचे हैं. राहुल गांधी और रिजिजू की मुलाकात के बावजूद गतिरोध खत्म होने के आसार कम ही नजर आ रहे हैं.
यह भी पढ़ें,'राम मंदिर में चंदा चोरी से हिंदू भावनाएं आहत नहीं हुईं?', नाटक के मंचन को लेकर FIR पर बोले विपक्षी सांसद
सरकार के पास क्या विकल्प?
ऐसे में सरकार के पास दो विकल्प हैं. विपक्ष को साथ में लेते हुए या तो सत्र के अंतिम हफ्ते में परिसीमन बिल पेश करे या फिर मॉनसून सत्र को पंद्रह अगस्त के ब्रेक के बाद आगे बढ़ाए. इससे पहले सरकार विस्तारित बजट सत्र के दौरान इस संविधान संशोधन विधेयक को पेश किया था लेकिन विपक्ष के विरोध के कारण पास नहीं करा पाई थी. इस संविधान संशोधन विधेयक में लोकसभा और विधानसभा की सीटों में 50% इजाफे और अगले लोकसभा चुनाव से 33% महिला आरक्षण का प्रावधान है.
डीएमके सरकार का कर सकती है समर्थन
अप्रैल में विपक्ष परिसीमन बिल का यह कह कर विरोध किया था कि इससे दक्षिण और छोटे राज्यों की भागीदारी घटेगी. हालांकि सरकार ने भरोसा दिलाया था कि सभी राज्यों में सीटों की संख्या मौजूदा अनुपात में ही बढ़ेगी. लेकिन बात नहीं बन पाई. अब पांच महीनों के बाद सियासी समीकरण काफी बदल गए हैं. डीएमके विपक्षी इंडिया गठबंधन से दूर जा चुकी है, टीएमसी के बीस लोकसभा सांसद और उद्धव ठाकरे की शिवसेना के छह लोकसभा सांसद एनडीए में शामिल हो चुके हैं. इस तरफ सरकार दोनों सदनों में अब दो तिहाई बहुमत से ज्यादा दूर नहीं है. संख्या जुटाने के लिए सरकार इस पर परिसीमन बिल में सीटों में पचास फीसदी बढ़ोतरी का लिखित प्रावधान कर सकती है. सूत्रों के मुताबिक ऐसे में डीएमके इस बिल का समर्थन कर सकती है. मॉनसून सत्र के आखिरी हफ्ते में परिसीमन बिल के अलावा एनजीओ पर नकेल कसने वाले एफसीआरए बिल पर भी नजरें टिकी हुई हैं.
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं