- कांग्रेस ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ 'वोट बचाओ देश बचाओ' अभियान चलाने का फैसला लिया है
- 10 से 20 अक्टूबर तक ब्लॉक स्तर पर साइकल और बाइक रैलियों का आयोजन किया जाएगा और पुतला फूंका जाएगा
- 25 अक्टूबर से 25 नवंबर तक बूथ स्तर पर चौपाल आयोजित कर वोटर लिस्ट से कटे लोगों को फिर से जोड़ने का प्रयास होगा
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ मुहिम तेज करते हुए कांग्रेस ने 'वोट बचाओ देश बचाओ' अभियान का ऐलान किया है. सूत्रों के मुताबिक, राहुल गांधी ने पार्टी नेताओं आक्रमक और बुलंद अंदाज में प्रदर्शन के निर्देश दिए हैं.
आगामी कार्यक्रमों का ऐलान करते हुए संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल ने कहा कि 10 से 20 अक्टूबर तक ब्लॉक स्तर पर साइकल, बाइक रैली निकाली जाएगी. कांग्रेस कार्यकर्ता इस दौरान मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का पुतला भी फूंकेंगे. पार्टी के वरिष्ठ नेता इन प्रदर्शनों में शामिल होंगे.
वहीं, 25 अक्टूबर से 25 नवंबर तक बूथ स्तर पर चौपाल आयोजित किए जाएंगे. इस दौरान जिन लोगों का नाम वोटर लिस्ट से कट गया है उन्हें फिर से जुड़वाने की पहल की जाएगी.
दिल्ली के आसपास निकलेगी यात्रा
इसके साथ ही वेणुगोपाल ने कहा कि 25 और 26 नवंबर को दिल्ली के आसपास के इलाकों से यात्रा निकली जाएगी. बड़े नेता इन यात्राओं की अगुवाई करेंगे जो संविधान दिवस यानी 26 नवंबर को दिल्ली पहुंचेगी.
इससे पहले इंडिया ब्लॉक ने अक्टूबर के पहले हफ्ते में देश भर में 'लोकतंत्र बचाओ' मार्च निकालने और आने वाले दिनों में देश भर में पांच बड़ी रैलियां आयोजित करने का ऐलान किया था. पहली रैली एक नवंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में आयोजित होगी.
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क्या पूरे विपक्ष का मिलेगा साथ?
मंगलवार को इंडिया ब्लॉक के सांसद संसद भवन से चुनाव आयोग मुख्यालय तक मार्च करेंगे. केसी वेणुगोपाल ने कहा कि उम्मीद है कि हमें मार्च करने दिया जाएगा.
कांग्रेस सूत्रों के मुताबिक, मार्च में शामिल होने के लिए डीएमके, आम आदमी पार्टी और बीजू जनता दल जैसी उन पार्टियों को भी न्यौता दिया गया फिलहाल इंडिया गठबंधन से बाहर हैं. हालांकि इन दलों के शामिल होने की संभावना बेहद कम है.
कांग्रेस चाहती है कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और मोदी सरकार के खिलाफ इंडिया ब्लॉक के प्रदर्शन का पहला चरण खत्म होने के बाद भी जमीनी स्तर पर अभियान चलता रहे.
वेणुगोपाल के मुताबिक बैठक में राहुल गांधी ने कहा कि ये आंदोलन तब तक जारी रहेगा जब तक ज्ञानेश कुमार हटाए नहीं जाते और चुनावी व्यवस्था ठीक नहीं हो जाती.
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