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ओडिशा के रुशिकुल्या तट पर ऑलिव रिडले की हैचिंग शुरू; नेस्टिंग में गिरावट, समुद्र की ओर बढ़े हजारों कछुए

Olive Ridley Hatching Odisha: ओडिशा के गंजाम जिले स्थित रुशिकुल्या तट पर इस सीजन पहली बार ऑलिव रिडले कछुओं का सामूहिक हैचिंग शुरू हो गया है. विशेषज्ञों के अनुसार मौसम में बदलाव, देर से चली दक्षिणी हवा, तट कटाव और बारिश ने नेस्टिंग को प्रभावित किया है. पढ़िए पूरी खबर.

रुशिकुल्या तट पर ऑलिव रिडले कछुओं का सामूहिक हैचिंग शुरू; हजारों बच्चे समुद्र की ओर रवाना, नेस्टिंग में गिरावट

Olive Ridley Hatching Odisha: ओडिशा के गंजाम जिले स्थित रुशिकुल्या तट पर ऑलिव रिडले कछुओं की लाइफ साइकिल (जीवन चक्र) का अहम चरण बुधवार से शुरू हो गया. लंबे इंतजार के बाद इस सीजन पहली बार सामूहिक हैचिंग देखने को मिली, जब हजारों नन्हे कछुए अपने घोंसलों से निकलकर बंगाल की खाड़ी की ओर बढ़ते नजर आए. प्रकृति के इस अद्भुत दृश्य ने वन विभाग और स्थानीय लोगों का ध्यान खींचा. हालांकि इस खुशी के बीच एक चिंता भी है, इस साल नेस्टिंग की संख्या में भारी गिरावट दर्ज की गई है. पिछले वर्ष जहां करीब 9 लाख नेस्टिंग हुई थी, वहीं इस बार यह आंकड़ा घटकर लगभग 2 लाख रह गया है.

Olive Ridley Hatching Odisha: समुद्र तट पर कछुए

Olive Ridley Hatching Odisha: समुद्र तट पर कछुए

चार दिन में रुकी नेस्टिंग, अब शुरू हुई हैचिंग

रुशिकुल्या तट पर 15 मार्च से ऑलिव रिडले कछुओं की नेस्टिंग शुरू हुई थी. पहले ही दिन 8,000 से 10,000 तक कछुए तट पर पहुंचे और सामूहिक रूप से अंडे दिए. लेकिन यह गतिविधि केवल चार दिन तक ही सीमित रही और इसके बाद नेस्टिंग अचानक रुक गई. नेस्टिंग रुकने के करीब 45 से 50 दिन बाद अब हैचिंग शुरू हुई है, जो कछुओं के प्राकृतिक चक्र का अगला चरण है.

Olive Ridley Hatching Odisha: कछुओं की हैचिंग शुरू

Olive Ridley Hatching Odisha: कछुओं की हैचिंग शुरू

हजारों नन्हे कछुओं की समुद्र यात्रा

हैचिंग के बाद घोंसलों से निकलते ही कछुओं के बच्चे सहज रूप से समुद्र की दिशा पकड़ लेते हैं. रुशिकुल्या में निकले हजारों हैचलिंग रेत पर संघर्ष करते हुए बंगाल की खाड़ी की ओर बढ़ते दिखे. वन विभाग के कर्मियों और स्वयंसेवकों ने इस दौरान उन्हें सुरक्षित रास्ता देने और शिकारी पक्षियों से बचाने के लिए निगरानी की.

नेस्टिंग में बड़ी गिरावट से चिंता

इस साल रुशिकुल्या तट पर महज करीब 2 लाख नेस्टिंग दर्ज की गई, जबकि पिछले साल यह संख्या दो चरणों में करीब 9 लाख थी. विशेषज्ञों का मानना है कि इस गिरावट के कई कारण हैं. देर से चली दक्षिणी हवा, मौसम में असामान्य बदलाव, तटीय कटाव और नेस्टिंग के दौरान हुई बारिश ने कछुओं की गतिविधियों को प्रभावित किया.

वैकल्पिक स्थलों की ओर गए कछुए

वन अधिकारियों के अनुसार, संभव है कि इस वर्ष कछुओं का एक बड़ा हिस्सा रुशिकुल्या के बजाय अन्य वैकल्पिक नेस्टिंग साइट्स की ओर चला गया हो. ओडिशा तट पर देवी नदी का मुहाना और केंद्रपाड़ा जिले का गहिरमाथा क्षेत्र भी ऑलिव रिडले कछुओं के प्रमुख स्थल हैं, जहां हर साल बड़ी संख्या में नेस्टिंग होती है.

ओडिशा: ऑलिव रिडले कछुओं का प्रमुख गढ़

नेस्टिंग में आई गिरावट के बावजूद ओडिशा ऑलिव रिडले कछुओं के संरक्षण के लिहाज से देश का सबसे अहम राज्य बना हुआ है. गहिरमाथा दुनिया का सबसे बड़ा नेस्टिंग ग्राउंड माना जाता है. रुशिकुल्या और देवी नदी क्षेत्र के साथ मिलकर ओडिशा का तट इन दुर्लभ समुद्री कछुओं के अस्तित्व के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है.

संरक्षण और निगरानी पर जोर

हैचिंग के साथ ही वन विभाग ने तट पर निगरानी और सुरक्षा बढ़ा दी है. अधिकारियों का कहना है कि हैचलिंग के सुरक्षित समुद्र तक पहुंचने तक सतर्कता जरूरी है, ताकि आने वाले वर्षों में ऑलिव रिडले की आबादी स्थिर रह सके और प्रकृति का यह अनमोल चक्र बना रहे.

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