हरियाणा स्पेशल टास्क फोर्स को संगठित अपराध के खिलाफ बड़ी कामयाबी मिली है. STF हरियाणा विदेश भागे कुख्यात गैंगस्टर वेंकटेश गर्ग को जॉर्जिया से भारत लेकर आ गई है. इस कार्रवाई को हरियाणा पुलिस की बड़ी अंतरराष्ट्रीय उपलब्धि माना जा रहा है. यह पहला मौका है जब जॉर्जिया से किसी अपराधी को भारत प्रत्यर्पित किया गया है.
STF के अधिकारियों के मुताबिक, यह कार्रवाई भारत सरकार, जॉर्जिया सरकार और कई अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल का नतीजा है. इस ऑपरेशन ने एक बार फिर साफ कर दिया है कि गंभीर अपराधों को अंजाम देकर विदेश भाग जाने वाले अपराधियों के खिलाफ भारतीय एजेंसियां अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी कार्रवाई करने में सक्षम हैं.
53 सदस्यों वाले गैंग का मास्टरमाइंड है वेंकटेश गर्ग
पुलिस जांच के अनुसार, 29 साल का वेंकटेश गर्ग हरियाणा के अंबाला जिले के नारायणगढ़ का रहने वाला है. वह एक बड़े संगठित अपराध गिरोह का सरगना है, जिसमें करीब 53 सदस्य बताए जा रहे हैं.
उसकी गैंग का नेटवर्क हरियाणा के कई जिलों तक फैला हुआ था. अंबाला, यमुनानगर, कुरुक्षेत्र, पंचकूला और चंडीगढ़ में इस गैंग के खिलाफ हत्या, हत्या की साजिश, फायरिंग, रंगदारी वसूली, अवैध हथियार रखने और संगठित अपराध जैसी गतिविधियों के मामले सामने आए हैं.
STF की जांच में यह भी सामने आया कि वेंकटेश गर्ग विदेश भागने के बाद भी अपने गैंग को ऑपरेट कर रहा था. वह अपने साथियों के संपर्क में रहकर वारदातों की योजना बनाता था और आपराधिक नेटवर्क को चलाता रहा.
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BSP नेता की हत्या सहित कई वारदातों में नाम
वेंकटेश गर्ग और उसकी गैंग पर कई गंभीर वारदातों में शामिल होने के आरोप है. पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक, अंबाला जिले के नारायणगढ़ में BSP नेता हरविलास की हत्या के मामले में भी गैंग का नाम सामने आया था.
इसके अलावा अंबाला और यमुनानगर जिलों में रंगदारी मांगने और डर पैदा करने के लिए फायरिंग की कई घटनाओं में भी गैंग की भूमिका की जांच हुई.
STF के अनुसार, गैंग का मकसद कारोबारियों और प्रभावशाली लोगों को धमकाकर पैसा वसूलना और इलाके में अपना दबदबा कायम करना था.

34 आपराधिक मामलों में आरोपी
पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, वेंकटेश गर्ग के खिलाफ हरियाणा और चंडीगढ़ में कुल 34 आपराधिक मामले दर्ज हैं. भारत छोड़कर भागने से पहले ही उसके खिलाफ 23 मामले दर्ज हो चुके थे.
उसके फरार होने के बाद भी गैंग की गतिविधियां जारी रहीं और हत्या, हत्या के प्रयास, रंगदारी और हथियारों से जुड़े 11 नए मामले दर्ज हुए.
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दिल्ली एयरपोर्ट से भागा, UAE होते हुए पहुंचा जॉर्जिया
जांच में पता चला कि वेंकटेश गर्ग ने 10 दिसंबर 2024 को दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से भारत छोड़ा था. वह पहले संयुक्त अरब अमीरात पहुंचा और इसके बाद 26 जनवरी 2025 को जॉर्जिया चला गया.
STF जांच में यह भी खुलासा हुआ कि उसने फर्जी दस्तावेजों के आधार पर पासपोर्ट हासिल किया था. उसने गुरुग्राम के एक गलत पते का इस्तेमाल कर पासपोर्ट बनवाया था.
इस फर्जीवाड़े को लेकर उसके खिलाफ अंबाला के नारायणगढ़ थाने में मामला दर्ज किया गया और STF की रिपोर्ट के आधार पर उसका पासपोर्ट रद्द कर दिया गया
रेड कॉर्नर नोटिस से लेकर प्रत्यर्पण तक लंबी कार्रवाई
वेंकटेश गर्ग को भारत वापस लाने के लिए STF हरियाणा ने कई स्तरों पर काम किया. उसके खिलाफ लुकआउट सर्कुलर जारी कराया गया ताकि वह किसी दूसरे देश में भाग न सके.
इसके बाद इंटरपोल के माध्यम से रेड कॉर्नर नोटिस जारी कराया गया. STF ने अदालत से गिरफ्तारी वारंट हासिल किए और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उसकी लोकेशन ट्रैक करने का काम शुरू किया.
जांच एजेंसियों को जानकारी मिली कि वह जॉर्जिया में मौजूद है. इसके बाद भारत सरकार के माध्यम से प्रत्यर्पण की कानूनी प्रक्रिया शुरू की गई.
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विदेश मंत्रालय, CBI, NCB और इंटरपोल की अहम भूमिका
इस पूरे ऑपरेशन में हरियाणा STF के साथ विदेश मंत्रालय, नेशनल सेंट्रल ब्यूरो (NCB), CBI और इंटरपोल ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई.
जॉर्जिया की न्यायिक और कानून प्रवर्तन एजेंसियों के साथ लगातार संपर्क और कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के बाद आखिरकार वेंकटेश गर्ग को भारत लाया गया.
STF ने जॉर्जिया सरकार और वहां की एजेंसियों के सहयोग के लिए धन्यवाद दिया है. वहीं कजाखस्तान सरकार का आरोपी के सुरक्षित ट्रांजिट में सहयोग के लिए भी आभार जताया.
हरियाणा STF ने कहा है कि संगठित अपराध, गैंगस्टर नेटवर्क और विदेशों में छिपे अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई लगातार जारी रहेगी. वेंकटेश गर्ग का प्रत्यर्पण STF की उस रणनीति का हिस्सा है, जिसमें विदेश भाग चुके अपराधियों को वापस लाकर कानून के कटघरे में खड़ा किया जा रहा है.
यह कार्रवाई हरियाणा में सक्रिय गैंगस्टर नेटवर्क के लिए बड़ा झटका मानी जा रही है. पुलिस का कहना है कि अपराधियों को यह संदेश साफ है कि देश छोड़कर भागना अब बचने का रास्ता नहीं है.
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