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45°C की गर्मी ही नहीं, ‘तपती रातें’ बन रहीं सबसे बड़ा खतरा... कम नहीं हो रहीं उत्तर भारत के झुलसते शहरों की मुसीबतें

भारत में हीट क्राइसिस अब सिर्फ दिन की 45°C गर्मी नहीं, बल्कि तपती रातों से भी बढ़ रहा है. बढ़ती नमी, शहरी हीट आइलैंड और सूखी मिट्टी हालात गंभीर बना रहे हैं. विशेषज्ञ इसे 24 घंटे का बढ़ता जलवायु संकट मान रहे हैं.

45°C की गर्मी ही नहीं, ‘तपती रातें’ बन रहीं सबसे बड़ा खतरा... कम नहीं हो रहीं उत्तर भारत के झुलसते शहरों की मुसीबतें
  • भारत में रात का तापमान लगातार बढ़ रहा है और कई जगह यह 30 डिग्री सेल्सियस के आसपास बना रहता है.
  • शहरों में कंक्रीट और दीवारें दिनभर की गर्मी को जमा कर रात में छोड़ती हैं, जिससे घर ओवन जैसे गर्म हो जाते हैं.
  • भारत में हीटवेव की अवधि और तीव्रता लगातार बढ़ रही है, जिससे तापमान 45 डिग्री से ऊपर पहुंच रहा है.
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नई दिल्ली:

भारत में गर्मी अब सिर्फ दिन की 45-48°C तपिश तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि अब रातें भी उतनी ही खतरनाक होती जा रही हैं. हालात यह हैं कि रात 10 बजे के बाद भी तापमान 30°C के आसपास बना रहता है, जिससे लोगों को राहत नहीं मिल पा रही. वैज्ञानिक इसे ‘नया हीट क्राइसिस' बता रहे हैं, जहां दिन और रात दोनों मिलकर शरीर पर लगातार दबाव डाल रहे हैं.

रातें क्यों बन रही हैं ज्यादा खतरनाक?

आम तौर पर सूर्यास्त के बाद तापमान गिरता है और शरीर को आराम मिलता है, लेकिन इस साल ऐसा नहीं हो रहा. शहरों और कस्बों में दीवारें और कंक्रीट दिनभर की गर्मी को जमा कर रात में छोड़ देती हैं. इससे घर ओवन जैसे हो जाते हैं और नींद तक प्रभावित होती है.

डेटा के मुताबिक भारत में रात का तापमान हर दशक करीब 0.21°C बढ़ रहा है और लगभग सभी राज्यों में यह ट्रेंड दिख रहा है. कई जगह न्यूनतम तापमान 28-30°C के बीच बना हुआ है, जो स्वास्थ्य के लिए बेहद खतरनाक है.
 

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हीटवेव अब लंबी, ज्यादा तीव्र और लगातार

भारत के ‘कोर हीटवेव जोन' में गर्मी के दिनों की संख्या लगातार बढ़ रही है. 1961 से 2020 के बीच हीटवेव की अवधि में लगातार इजाफा हो रहा है. हर दशक में लू के दिनों और अवधि दोनों में वृद्धि दर्ज की जा रही है. ‘सीवियर हीटवेव' ज्यादा बार और लंबे समय तक रहती है. 

उत्तर भारत, मध्य भारत और पूर्वी राज्यों, जैसे उत्तर प्रदेश, बिहार, राजस्थान, मध्य प्रदेश और दिल्ली इस समय सबसे ज्यादा प्रभावित हैं. कई जगह तापमान 45°C से ऊपर पहुंच चुका है, जैसे यूपी के बांदा में 48°C रिकॉर्ड किया गया.

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नमी ने बढ़ाया खतरा

गर्मी के साथ नमी का बढ़ना इस संकट को और गंभीर बना रहा है.

  • 2015-2019 के बीच औसत नमी ~67%
  • 2020-2024 में बढ़कर ~71%

इसका सीधा असर शरीर पर पड़ता है. जब नमी ज्यादा होती है तो पसीना ठीक से सूखता नहीं. इससे शरीर ठंडा नहीं हो पाता. फिर हीट स्ट्रेस, डिहाइड्रेशन और हीट स्ट्रोक का खतरा बढ़ जाता है. यूपी, बिहार, तमिलनाडु, गुजरात, ओडिशा और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में ‘हॉट-ह्यूमिड' दिन तेजी से बढ़े हैं.

शहर बन रहे ‘हीट ट्रैप'

देश के बड़े शहर अब 'Urban Heat Island' बनते जा रहे हैं. शहर आसपास के इलाकों से 2°C से 10°C ज्यादा गर्म रहते हैं. कारण है कंक्रीट, डामर, कांच की इमारतें. वहीं कम पेड़-पौधे व AC और वाहनों से निकलने वाली गर्मी भी तापामान में तपिश बढ़ा रही है. स्थिति का विडंबना यह है कि जितना ज्यादा एयर कंडीशनर इस्तेमाल हो रहा है, उतनी ही ज्यादा गर्मी शहर में इकट्ठा हो रही है.

सूखी मिट्टी और कम बारिश की भूमिका

एक और बड़ा कारण है. मिट्टी में नमी की कमी. जब मिट्टी सूख जाती है तो ऊर्जा पानी सुखाने में नहीं लगती. बल्कि सीधी हवा को गर्म करती है. इस साल कम सर्दी, कम हिमालयी बर्फबारी और कम प्री-मानसून गतिविधियों ने भी जमीन को ज्यादा सूखा बना दिया है, जिससे हीटवेव और तीव्र हो गई.

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जलवायु परिवर्तन का साफ असर

विशेषज्ञों का कहना है कि अब यह सिर्फ मौसम नहीं, बल्कि क्लाइमेट चेंज का असर है. हालिया विश्लेषण के अनुसार 2026 की हीटवेव पहले की तुलना में करीब 2°C अधिक गर्म रही. करोड़ों लोग और अरबों डॉलर की आर्थिक गतिविधियां इससे प्रभावित हुईं. वैज्ञानिकों का मानना है कि इस तरह की घटनाओं में प्राकृतिक बदलाव की भूमिका कम और मानवजनित उत्सर्जन (fossil fuel emissions) की भूमिका ज्यादा है.

स्वास्थ्य और अर्थव्यवस्था पर असर

गर्मी अब कई स्तरों पर देश को प्रभावित कर रही है. स्वास्थ्य पर इसका असर दिख रहा है. हीट स्ट्रोक के मामलों में बढ़ोतरी हो रही है. नींद की कमी से हृदय और मानसिक स्वास्थ्य पर असर पड़ रहा है. इसका सबसे ज्यादा असर बुजुर्ग और गरीब पर पड़ रहा है. 

अर्थव्यवस्था के लिहाज से देखें तो भीषण गर्मी के चलते बिजली की मांग रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई है. खेती पर भी इसका असर दिख रहा है. सूखी जमीन और कम बारिश से किसान परेशान हैं. इसके अलावा काम के दौरान उत्पादकता भी प्रभावित हो रही है. 

विशेषज्ञ क्या कह रहे हैं?

एक्सपर्ट्स का साफ कहना है कि भारत को अब 'समर सर्वाइवल' से आगे बढ़कर हीट मैनेजमेंट सिस्टम बनाना होगा. इसके लिए नेशनल हीट एक्शन प्लान बनाना होगा. शहरों में हरियाली को बढ़ाना होगा. इसके अलावा कूलिंग इंफ्रास्ट्रक्चर बनाने पर जोर देना होगा. 

साफ बात यह है कि भारत का हीट क्राइसिस अब सिर्फ दोपहर की तेज धूप तक सीमित नहीं रह गया है. असली खतरा अब उस गर्मी से है जो 24 घंटे बनी रहती है. दिन की तपिश और रात की घुटन मिलकर लोगों की मुसीबतें बढ़ा रही हैं. सबसे चिंताजनक बात यह है कि अब आधी रात के बाद भी देश ठंडा नहीं हो रहा और यही संकेत देता है कि भविष्य की गर्मी और ज्यादा लंबी और खतरनाक होने वाली है.

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