- एक लड़की सड़क पर बाइक चला रही है. उसका कार से कुछ युवक पीछा करते हैं, गंदे इशारे करते हैं, फिर ठोकर मारकर निकल जाते हैं. लड़की की जान बाल-बाल बचती है.
- एक वॉर हीरो को पार्किंग लॉट में बिना किसी वजह पीटा जाता है.
- बाइक से पीछा कर दूसरी बाइक पर सवार दो लोगों को बीच सड़क रोका जाता है और हत्या कर दी जाती है.
ये तीनों वारदात एक हफ्ते के भीतर की हैं. जगह का नाम ना लिया जाए तो पहली बार में यकीन ही नहीं होगा कि कैपिटल सिटी के पास की मिलेनियम सिटी गुरुग्राम की कहानी है. इन घटनाओं के कारण गुरुग्राम में कानून व्यवस्था की हालत पर फिर से सवाल उठ रहे हैं. बहुत पुरानी बात नहीं है जब एनसीआर के तमाम शहरों में कानून व्यवस्था की एक सी हालत थी-नोएडा, गुरुग्राम, गाजियाबाद, फरीदाबाद. इनमें से नोएडा और गुरुग्राम में इन्फ्रा का फैलाव ज्यादा है. तो जाहिर है कानून-व्यवस्था के मामले में भी लोग इन दोनों शहरों की तुलना करते हैं. आज अगर किसी से पूछा जाए कि गुरुग्राम में रहना चाहेंगे या नोएडा में तो ज्यादा संभावना इस बात की है कि लोग नोएडा को चुनेंगे. फिर क्या हुआ कि नोएडा तो बेहतर होता गया लेकिन गुरुग्राम का संग्राम जारी है.
क्राइम: नोएडा Vs गुरुग्राम
NCRB के आंकड़ों पर गौर करें तो पता चलता है कि रेप, हत्या, चोरी के मामले गुरुग्राम में नोएडा से ज्यादा हैं. पिछले तीन साल में नोएडा की तुलना में गंभीर अपराधों के दोगुने मामले गुरुग्राम में सामने आए. ऐसा नहीं है कि नोएडा में सब सुधर गया है. जैसे अपहरण के मामले नोएडा में ज्यादा हैं. लेकिन ओवरऑल कानून व्यवस्था में सुधार साफ दिखता है.




दूसरा मामला है परसेप्शन का. और जैसा कि कहा जाता है परसेप्शन भी रियलिटी ही है. नोएडा में जिससे भी बात कीजिए, यही कहेगा कि पहले से स्थिति बहुत बेहतर हुई है. इस सोच से ही बहुत बदलाव हो जाता है. अब नोएडा में देर रात निकलने में लोगों को पहले की तुलना में कम डर लगता है. लोग बाहर निकलते हैं तो दुकानें देर तक खुलती हैं. कारोबार बढ़ता है, आमदनी बढ़ती है. नोएडा के तमाम आईटी हब में चले जाइए, देर रात तक चहल पहल दिखती है. लड़कियां पहले के मुकाबले ज्यादा निडर नजर आती हैं.
क्राइम का एक पहलू मानसिक हाल भी है. और मानसिक हाल कई बार शहर की खराब व्यवस्था का बाइप्रोडेक्ट भी होता है. गुरुग्राम में नोएडा की तुलना में ज्यादा जाम है. रोडरेज को आम ट्रैफिक जाम से भी जोड़ कर सकते हैं. आपको देर हो रही है. जाम में फंसे हैं. पहले से भरे बैठे हैं. कानून का डर ना हो तो गुस्सा ज्यादा उबलता है.
जलभराव की समस्या से नोएडा ने गुरुग्राम की तुलना में बेहतर मुकाबला किया है. यहां बेहतर टाउन प्लानिंग नजर आती हैं. सड़कें चौड़ी हैं. सीवर बेहतर है. कुल मिलाकर नोएडा रहने के लिए बेहतर शहर साबित हो रहा है.
नोएडा कैसे आगे निकला?
हाल के सालों में नोएडा में कई बड़े बदलाव हुए हैं. जिसका असर सड़क पर दिखना शुरू हो गया है. जनवरी 2020 में कमिश्नरेट प्रणाली लाई गई. इससे पुलिस तेजी से रिएक्ट कर पाती है. ट्रांसफर, पोस्टिंग, बवाल की स्थिति में एक्शन का आदेश अब सीधे पुलिस कमिश्नर देते हैं. पहले इन फैसलों में डीएम की भूमिका होती थी. पुलिस की विजिब्लिटी भी अब ज्यादा है. नोएडा में सभी पुलिस स्टेशनों को एक सीसीटीवी नेटवर्क से जोड़कर सर्विलांस को स्मार्ट बनाया गया है. ट्रैफिक और अपराध रोकने के लिए इंट्रीग्रेटेड ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम बनाया गया है. सारे सीसीटीवी वीडियो की निगरानी के लिए कंट्रोल रूम है. महिला की सुरक्षा के लिए पिंक स्कूटी पैट्रोल टीम है. ये टीम भीड़भाड़ वाली जगहों पर पैट्रोल करती है. नोएडा में राम राज्य की सुबह नहीं आई है, लेकिन अंधेरा जरूर छंट रहा है.
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