सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस सूर्यकांत को लेकर सीजेपी के सौरव दास ने तीखी प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने बिहार और बंगाल में SIR प्रक्रिया का जिक्र करते हुए आरोप लगाया कि सुप्रीम कोर्ट ने वक्त पर दखल नहीं दिया, जिससे लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं और मतदाताओं के अधिकारों पर असर पड़ा. सौरव दास ने महाराष्ट्र की राजनीतिक उथल-पुथल, दलों के विभाजन और दिल्ली के संवैधानिक विवाद जैसे मामलों का भी हवाला दिया. उनका आरोप है कि जरूरी याचिकाओं की वक्त पर सुनवाई नहीं होने से सत्ता पक्ष को फायदा मिला और इससे न्यायपालिका की साख को नुकसान पहुंचा है.
सौरव ने किया सोशल मीडिया पोस्ट
सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए सौरव दास ने कहा, "चीफ जस्टिस सूर्य कांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची, जिन्होंने बंगाल और बिहार में गैर-कानूनी SIR प्रक्रिया को बिना किसी परेशानी के पूरा होने दिया, उन्हें इस मामले से चुपचाप दूर रहना चाहिए."
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'न्यायपालिका पर दाग...'
सुप्रीम कोर्ट पर सवाल उठाते हुए सौरव दास ने लिखा, "सुप्रीम कोर्ट ने यह सुनिश्चित करने में मिलीभगत की है कि Gen-Z के वोटिंग अधिकार और राज्य चुनावों के अधिकार छीन लिए जाएं. महाराष्ट्र सरकार का गिरना, पार्टियों का टूटना जैसे मामलों पर समय रहते सुनवाई और फैसला नहीं होने की वजह से बीजेपी की जीत हुई. यह हमारी न्यायपालिका पर एक बड़ा दाग है."
इससे पहले सौरव दास ने दावा किया कि सरकार उन्हें और अन्य सीजेपी नेताओं (अभिजीत दिपके और आशुतोष रांका) को दिल्ली के जंतर-मंतर पर 10 अक्टूबर को होने वाले बड़े विरोध प्रदर्शन से पहले गिरफ्तार करने की योजना बना रही है. सीजेपी ने यह विरोध प्रदर्शन वोटर लिस्ट के एसआईआर को लेकर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग के लिए बुलाया है.
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