महाराष्ट्र के सियासी गलियारों में इन दिनों यह चर्चा जोर पकड़ रही है कि नेशनलिस्ट कांग्रेस पार्टी (NCP) के भीतर सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है. यह कयास उस वक्त तेज हो गए, जब चुनाव आयोग को भेजी गई पार्टी पदाधिकारियों और नेताओं की सूची में महाराष्ट्र प्रदेश अध्यक्ष सुनील तटकरे और राष्ट्रीय कार्याध्यक्ष प्रफुल पटेल के नाम शामिल नहीं थे. दूसरी ओर, इसी सूची में पार्थ पवार और जय पवार को प्राथमिकता मिलने से पार्टी के वरिष्ठ नेताओं में असंतोष की बातें सामने आने लगीं. हालांकि, अभी तक इस पूरे मामले पर किसी आधिकारिक स्तर पर कोई स्पष्ट बयान नहीं दिया गया है.
नेशनलिस्ट कांग्रेस पार्टी (NCP) के दोनों गुटों ने बुधवार को मुंबई में अहम बैठक बुलाने का ऐलान किया था, जिससे सियासी हलकों में हलचल तेज हो गई. हालांकि, सुनेत्रा पवार गुट ने फिलहाल अपनी प्रस्तावित बैठक को टाल दिया है. वहीं, दूसरी ओर शरद पवार ने सुबह 11 बजे वाई. बी. चव्हाण सेंटर में अपने गुट की महत्वपूर्ण बैठक बुलाई है, जिसमें मौजूदा राजनीतिक हालात और आगे की रणनीति पर चर्चा होने की संभावना है.
कहां से शुरू हुआ विवाद!
सूत्रों के मुताबिक, पार्टी में यह असंतोष तब और बढ़ गया जब चुनाव आयोग को भेजी गई पार्टी पदाधिकारियों और नेताओं की सूची में महाराष्ट्र प्रदेश अध्यक्ष सुनील तटकरे और राष्ट्रीय कार्याध्यक्ष प्रफुल पटेल का नाम शामिल नहीं था. वहीं, इस सूची में पार्थ पवार और जय पवार को प्रमुखता मिलने से पार्टी के वरिष्ठ नेताओं में नाराजगी की चर्चा शुरू हो गई. हालांकि, सुनेत्रा पवार ने बाद में सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए इसे “प्रिंटिंग मिस्टेक” बताया, लेकिन तब तक पार्टी के भीतर राजनीतिक समीकरण प्रभावित हो चुके थे.
शरद पवार से मुलाकात और चर्चाओं का बजार गर्म
विवाद तब और बढ़ गया जब सुनील तटकरे और प्रफुल पटेल ने हाल ही में शरद पवार से मुलाकात की. तटकरे ने इसे शरद पवार के स्वास्थ्य का हालचाल जानने के लिए एक शिष्टाचार मुलाकात बताया, लेकिन राजनीतिक गलियारों में इसके अलग मायने निकाले जा रहे हैं. सूत्रों के अनुसार, इन वरिष्ठ नेताओं ने सुनेत्रा पवार के नेतृत्व और पार्टी में नई पीढ़ी को तेजी से आगे बढ़ाने पर अपनी नाराजगी जताई है.
बताया जा रहा है कि पार्थ पवार और जय पवार को संगठन में मिल रही बढ़ती अहमियत पार्टी के पुराने नेताओं के लिए चिंता का विषय बन गई है. इसी बीच, शरद पवार और सांसद सुप्रिया सुले ने भी अप्रत्यक्ष रूप से सुनेत्रा पवार पर निशाना साधते हुए सुनील तटकरे और प्रफुल पटेल के नेतृत्व की खुलकर सराहना की. इससे यह संकेत मिला कि पार्टी में वरिष्ठ नेताओं को दरकिनार किए जाने की भावना बढ़ रही है.
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इन घटनाक्रमों ने एक बार फिर शरद पवार की सक्रिय भूमिका की संभावनाओं को मजबूत किया है. तटकरे और प्रफुल पटेल की शरद पवार से मुलाकात को भी इसी संदर्भ में देखा जा रहा है. अब बुधवार को होने वाली दोनों बैठकों पर सभी की नजरें टिकी हैं. वाई. बी. चव्हाण सेंटर में शरद पवार अपने समर्थकों के साथ मौजूदा राजनीतिक हालात पर चर्चा कर आगे की रणनीति तय कर सकते हैं.
ये भी पढ़ें : भारत-नॉर्वे संबंध अवसरों से भरे, दुनिया में शांति की कामना... जानें नॉर्वे में PM मोदी ने और क्या-क्या कहा
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं