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राज्यसभा सीट पर सस्पेंस बरकरार: मुंबई की मैराथन बैठकों के बाद क्या छगन भुजबल जाएंगे दिल्ली

महाराष्ट्र में सुनेत्रा पवार के इस्तीफे से खाली हुई राज्यसभा सीट को लेकर सस्पेंस बढ़ता जा रहा है. एनसीपी में छगन भुजबल को राज्यसभा भेजने की मांग हो रही है. लेकिन आखिरी फैसला सुनेत्रा पवार और बीजेपी आलाकमान को करना है.

राज्यसभा सीट पर सस्पेंस बरकरार: मुंबई की मैराथन बैठकों के बाद क्या छगन भुजबल जाएंगे दिल्ली
छगन भुजबल को राज्यसभा भेजने की चर्चा है. (फाइल फोटो)
IANS
  • महाराष्ट्र में सुनेत्रा पवार की खाली हुई राज्यसभा सीट के लिए उम्मीदवार पर सस्पेंस बढ़ता जा रहा है
  • एनसीपी नेता छगन भुजबल को राज्यसभा भेजने की चर्चाएं जोरों पर हैं, लेकिन फैसला होना बाकी है
  • प्रफुल्ल पटेल के आवास पर हुई बैठक में राज्यसभा सीट के साथ संगठनात्मक और राजनीतिक संतुलन पर भी चर्चा हुई थी
मुंबई:

महाराष्ट्र की राजनीति में इस समय सबसे बड़ी चर्चा उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार की खाली हुई राज्यसभा सीट को लेकर है. 18 जून को होने वाले उपचुनाव से पहले शनिवार को मुंबई में बैठकों का दौर चला, लेकिन दिनभर चली राजनीतिक कवायद के बावजूद अंतिम फैसला नहीं हो सका. सूत्रों के मुताबिक अब इस सीट पर उम्मीदवार कौन होगा, इसका अंतिम निर्णय खुद सुनेत्रा पवार लेंगी. 

पिछले कई दिनों से यह चर्चा तेज है कि राज्य के खाद्य और नागरी आपूर्ति मंत्री छगन भुजबल राज्यसभा में जाने के इच्छुक हैं. पार्टी के भीतर इस संबंध में अनौपचारिक चर्चाएं भी चल रही थीं और शनिवार को हुई बैठकों ने इन अटकलों को और बल दे दिया. 

प्रफुल्ल पटेल के आवास पर पहली अहम बैठक

सूत्रों के अनुसार, दिन की शुरुआत वरिष्ठ नेता प्रफुल्ल पटेल के मुंबई स्थित निवास पर हुई महत्वपूर्ण बैठक से हुई. इस बैठक में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के कई वरिष्ठ नेता मौजूद थे. छगन भुजबल भी बैठक में शामिल हुए. पार्टी के भीतर राज्यसभा सीट को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच इस बैठक को बेहद अहम माना गया. 

सूत्रों का कहना है कि बैठक में राज्यसभा सीट के साथ-साथ पार्टी के संगठनात्मक और राजनीतिक संतुलन पर भी चर्चा हुई. भुजबल के समर्थक लंबे समय से यह दलील दे रहे हैं कि ओबीसी समाज के बड़े चेहरे के रूप में उन्हें राष्ट्रीय राजनीति में भेजना पार्टी के लिए लाभकारी हो सकता है.

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फडणवीस से मुलाकात में रखा गया प्रस्ताव

प्रफुल्ल पटेल के आवास पर हुई चर्चा के बाद वरिष्ठ नेताओं का प्रतिनिधिमंडल सीधे मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से मिलने पहुंचा. सूत्रों के अनुसार इस मुलाकात में एनसीपी नेतृत्व की ओर से एक विस्तृत राजनीतिक प्रस्ताव रखा गया.

जानकारी के मुताबिक प्रस्ताव में छगन भुजबल को राज्यसभा भेजने की मांग के साथ-साथ उनके भतीजे समीर भुजबल को राज्य मंत्रिमंडल में शामिल करने का सुझाव भी रखा गया. इसके अलावा यदि भुजबल राज्यसभा जाते हैं तो उनके वर्तमान विधानसभा क्षेत्र येवला में होने वाले उपचुनाव में समीर भुजबल को उम्मीदवार बनाए जाने का फॉर्मूला भी चर्चा में रहा.

हालांकि इस प्रस्ताव पर मुख्यमंत्री की ओर से कोई अंतिम सहमति नहीं दी गई. सूत्रों का कहना है कि फडणवीस ने सहयोगी दल की बात ध्यानपूर्वक सुनी और इसे भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व के समक्ष रखने का आश्वासन दिया.

भुजबल के सरकारी बंगले पर दूसरी रणनीतिक बैठक

मुख्यमंत्री से मुलाकात के बाद नेताओं का एक और दौर छगन भुजबल के सरकारी आवास पर चला. इस बैठक में दिनभर हुई चर्चाओं की समीक्षा की गई. सूत्रों के अनुसार राज्यसभा सीट को लेकर संभावित राजनीतिक समीकरणों और महायुति के भीतर शक्ति संतुलन पर विस्तार से चर्चा हुई.

बैठक के बाद सभी नेता अलग-अलग रवाना हो गए, लेकिन किसी भी पक्ष ने आधिकारिक तौर पर कोई बयान जारी नहीं किया. इससे स्पष्ट है कि मामला अभी पूरी तरह खुला हुआ है और अंतिम निर्णय बाकी है.

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सुनेत्रा पवार और देवेंद्र फडणवीस.

सुनेत्रा पवार और देवेंद्र फडणवीस.

सुनेत्रा पवार की सहमति सबसे महत्वपूर्ण

एनसीपी के भीतर पिछले कुछ महीनों में सुनेत्रा पवार का प्रभाव लगातार बढ़ा है. अजित पवार के निधन के बाद पहले उन्हें पार्टी की कमान सौंपी गई, फिर वे उपमुख्यमंत्री बनीं और अब पार्टी के अधिकांश महत्वपूर्ण राजनीतिक फैसलों में उनकी भूमिका निर्णायक मानी जाती है. 

शनिवार को राज्यसभा सीट को लेकर पूछे गए सवाल पर सुनेत्रा पवार ने भी संकेत दिया कि अभी किसी नाम पर अंतिम निर्णय नहीं हुआ है और छगन भुजबल के नाम पर तत्काल कुछ कहना संभव नहीं है. 

भाजपा हाईकमान की मंजूरी के बाद ही बनेगी तस्वीर

सूत्रों के मुताबिक महायुति के घटक दलों के बीच सहमति बनने के बावजूद अंतिम मंजूरी भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व से मिलनी आवश्यक होगी. यही कारण है कि मुख्यमंत्री फडणवीस अब इस प्रस्ताव पर दिल्ली नेतृत्व से चर्चा करेंगे.

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यदि भाजपा नेतृत्व सहमत होता है तो छगन भुजबल की राज्यसभा की राह आसान हो सकती है. वहीं यदि केंद्रीय स्तर पर कोई दूसरा राजनीतिक समीकरण बनता है तो एनसीपी किसी नए चेहरे पर भी विचार कर सकती है.

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छगन भुजबल और सुनेत्रा पवार.

छगन भुजबल और सुनेत्रा पवार.

रोहित पावर का समर्थन

इस बीच शरद पवार गुट के विधायक रोहित पवार ने भी पूरे घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने कहा कि छगन भुजबल एक वरिष्ठ नेता हैं जिन्होंने राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर लंबा राजनीतिक अनुभव हासिल किया है. यदि उन्हें राज्यसभा भेजने पर विचार हो रहा है तो यह महायुति और एनसीपी का आंतरिक निर्णय है.

हालांकि रोहित पवार ने यह भी संकेत दिया कि राज्यसभा सीट को लेकर चल रही गतिविधियां महायुति के भीतर राजनीतिक समीकरणों और सत्ता संतुलन की कहानी बयां कर रही हैं. उनके अनुसार जिस प्रकार लगातार बैठकों का दौर चल रहा है, उससे साफ है कि निर्णय केवल एक सीट का नहीं बल्कि व्यापक राजनीतिक गणित का हिस्सा है.

8 जून तक करना है नामांकन

राज्यसभा उपचुनाव के लिए नामांकन की अंतिम तिथि 8 जून है और राजनीतिक गतिविधियां तेज हो चुकी हैं. ऐसे में अगले 24 से 48 घंटे बेहद महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं. फिलहाल इतना तय है कि शनिवार को मुंबई में हुई बैठकों ने छगन भुजबल की दावेदारी को मजबूत किया है, लेकिन राज्यसभा सीट पर अंतिम मुहर अभी बाकी है.

फिलहाल महाराष्ट्र की राजनीति का सबसे बड़ा सवाल यही है- क्या छगन भुजबल राज्यसभा जाएंगे, या सुनेत्रा पवार किसी नए नाम से सबको चौंका देंगी?

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