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जाममुक्त होगा मुंबई, 1139 KM लंबे 10 रिंग रोड का मेगा प्लान, सांताक्रूज-चेंबूर-वर्सोवा सहित कई सड़कें जुड़ेंगी

इस पूरे प्रोजेक्ट में पब्लिक ट्रांसपोर्ट को भी विशेष प्राथमिकता दी गई है. पहले से ही जाम पड़ी सड़कों पर BRTS बस रैपिड ट्रांजिट सिस्टम लागू करने से अक्सर आम लोगों को परेशानी होती है और वे इसे आसानी से नहीं अपनाते.

जाममुक्त होगा मुंबई, 1139 KM लंबे 10 रिंग रोड का मेगा प्लान, सांताक्रूज-चेंबूर-वर्सोवा सहित कई सड़कें जुड़ेंगी
मुंबई को ट्रैफिक से फ्री करने की दिशा में 10 रिंग रोड बनाने का प्लान है.
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मुंबई:

Mumbai Ring Road Masterplan: देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में ट्रैफिक जाम रोज की समस्या है, लेकिन अब इसे सुलझाने का मिशन तेज रप्तार से आगे बढ़ रहा है. मुंबई को जाममुक्त बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया गया है. इसके तहत मुंबई और उसके आस-पास के इलाकों में 1139 किलोमीटर लंबा विशाल रिंग रोड नेटवर्क तैयार किया जाएगा. मुंबई महानगर प्रदेश विकास प्राधिकरण MMRDA ने रिंग रोड का खाका तैयार किया है. MMRDA के आयुक्त डॉ. संजय मुखर्जी ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में इसकी जानकारी और अहमियत साझा की है. उन्होंने बताया कि इस योजना के तहत मुंबई और इसके आसपास के इलाकों में 1,139 किलोमीटर लंबा एक विशाल 'रिंग रोड' नेटवर्क तैयार होगा. 

इस मेगा प्लान की सबसे खास बात यह है कि इसके लिए सिरे से कोई नया हाईवे बनाने की जरूरत नहीं पड़ेगी, बल्कि मौजूदा और निर्माणाधीन प्रोजेक्ट्स को आपस में जोड़कर यह पूरा जाल बिछाया जाएगा.

'मिसिंग लिंक' को जोड़ने की रणनीति

दशकों से मुंबई का यातायात मुख्य रूप से उत्तर-दक्षिण दिशा पर केंद्रित रहा है. वहीं, पूर्व-पश्चिम की ओर यात्रा करने में मुंबईकरों के घंटों ट्रैफिक में बर्बाद होते हैं. आमतौर पर इस समस्या का समाधान करोड़ों की लागत से एक नया हाईवे बनाना माना जाता है. लेकिन MMRDA की यह नई योजना इसके विपरीत है. यह योजना उन मिसिंग लिंक्स अधूरी कड़ियों - जैसे कोई कनेक्टर, टनल या सी-लिंक को बनाने और जोड़ने पर केंद्रित है, जो अलग-अलग इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स को एक संपूर्ण नेटवर्क में बदल सकते हैं.

सांताक्रूज़-चेंबूर लिंक रोड SCLR का अंतिम 1.4 किलोमीटर का हिस्सा कागजों पर भले ही छोटा लगे, लेकिन इसे जब बड़े नेटवर्क से जोड़ा जाता है, तो यह दो एक्सप्रेस हाईवे के बीच लगभग 10.3 किलोमीटर का सिग्नल-फ्री (पूर्व-पश्चिम) रास्ता खोल देता है. यानी यहां 'मिसिंग लिंक' ही असल प्रोजेक्ट है, जिसके पूरा होने से पूरे रास्ते की अहमियत बढ़ जाती है.

मुंबई के लिए प्रस्तावित 10 'रिंग्स' 

इस विजन के तहत 10 नए हाईवे नहीं, बल्कि 10 "लूप्स" तैयार किए जाएंगे, जो इंफ्रास्ट्रक्चर को आपस में जोड़ेंगे. इन 1,139 किमी लंबे नेटवर्क का प्रस्तावित ढांचा:

  1. कोस्टल रोड – शिवड़ी वर्ली – ईस्टर्न फ्रीवे – ऑरेंज गेट, 27 किमी
  2. सी लिंक – WEH – SCLR – EEH – ईस्टर्न फ्रीवे, 34 किमी
  3. सी लिंक – WEH – JVLR – ईस्टर्न फ्रीवे एक्सटेंशन, 67 किमी 
  4. वर्सोवा सी लिंक – GMLR/उत्तरी कोस्टल – ईस्टर्न स्पाइन, 98.4 किमी
  5. दहिसर – भायंदर – घोडबंदर/ठाणे कोस्टल – ANS, 119.6 किमी
  6. मीरा-भायंदर – अलीबाग – विरार – ठाणे – ईस्टर्न स्पाइन, 185.6 किमी 
  7. उत्तन – विरार – वडोदरा मुंबई एक्सप्रेसवे (VME) – अटल सेतु, 273.5 किमी
  8. अटल सेतु – ईस्टर्न फ्रीवे – ANS – VME – NH-4B, 197 किमी 
  9. कोस्टल चेन – ठाणे बोरीवली टनल – ईस्टर्न हिस्सा, 110 किमी 
  10. पेठे मार्ग – पी डिमेलो/वाडी बंदर – ईस्टर्न फ्रीवे – शिवड़ी वर्ली, 27 किमी

एक ही सड़क से अधिक रिंग का हिस्सा बनेगी

इस नेटवर्क की खासियत यह है कि एक ही सड़क एक से अधिक रिंग का हिस्सा बन सकती है. एक छोटे से 'मिसिंग लिंक' का काम पूरा होने से उससे पहले बने कई बड़े प्रोजेक्ट्स की उपयोगिता कई गुना बढ़ जाती है जो पहले से बनकर तैयार हैं. इसके साथ ही, यह विजन मुंबई के सार्वजनिक परिवहन के लिए एक बिल्कुल नई और सकारात्मक सोच पेश करता है.

इस पूरे प्रोजेक्ट में पब्लिक ट्रांसपोर्ट को भी विशेष प्राथमिकता दी गई है. पहले से ही जाम पड़ी सड़कों पर BRTS बस रैपिड ट्रांजिट सिस्टम लागू करने से अक्सर आम लोगों को परेशानी होती है और वे इसे आसानी से नहीं अपनाते.

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नए रिंग रोड बनने से  3+3 लेन के नए कॉरिडोर तैयार होंगे

लेकिन इन नए रिंग्स के बनने से 3+3 लेन के नए कॉरिडोर तैयार होंगे. जहां यातायात की मांग ज्यादा होगी, वहां बसों के लिए एक अलग लेन आरक्षित की जा सकेगी. इससे बस यात्रा ज्यादा तेज और भरोसेमंद बनेगी. लक्ष्य यह है कि बेहतरीन सुविधा देखकर लोग खुद-ब-खुद अपनी कारों को छोड़कर पब्लिक ट्रांसपोर्ट अपनाएं, न कि जबरन कारों के लिए जगह कम करके उन्हें मजबूर किया जाए.

एमएमआरडीए के इस दृष्टिकोण का अंतिम उद्देश्य सिर्फ वाहनों की रफ्तार बढ़ाना नहीं है. इसका असली मकसद यह है कि अधिक से अधिक लोग बिना किसी रुकावट के सुगम यात्रा कर सकें. मुंबईकर जो बेशकीमती समय ट्रैफिक जाम में गंवाते हैं, वह समय बच सके और वे उसे अपने परिवारों के साथ बिता सकें.

अधिकारियों का मानना है कि चीजों को देखने का यह एक अलग नजरिया है, जो नई और बेहतर मुंबई के दरवाजे खोल सकता है. अब देखना यह है कि कागजों पर खींचा गया 'मिसिंग लिंक' का यह शानदार ताना-बाना जमीन पर कब और कितनी तेजी से हकीकत में बदलता है.

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