मध्य प्रदेश के बड़े शहरों की शक्ल अब पूरी तरह बदलने वाली है. आने वाले वक्त में अब आपको इंदौर और भोपाल में भी मुंबई जैसी गगनचुंबी इमारतें देखने को मिल सकती हैं. दरअसल इंदौर में आयोजित अर्बन ग्रोथ कॉन्क्लेव 2.0 में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने एक बहुत बड़ा ऐलान किया है. मुख्यमंत्री ने कहा है कि अब राज्य में 100 मंजिल तक की इमारतें बनाने की अनुमति दी जाएगी. हालांकि इसके लिए एक शर्त होगी कि इमारत के सामने की सड़क पर्याप्त रूप से चौड़ी होनी चाहिए. इस बड़े फैसले से न सिर्फ शहरों का लुक बदलेगा, बल्कि राज्य में रियल एस्टेट और बिजनेस को भी एक नई रफ्तार मिलेगी.
30 मीटर का पुराना नियम खत्म, बचेगी खेती की जमीन
मुख्यमंत्री ने बताया कि पहले मध्य प्रदेश में इमारतों की ऊंचाई को लेकर कड़े नियम थे. सामान्य तौर पर 30 मीटर से ज्यादा ऊंची बिल्डिंग बनाने की परमिशन नहीं मिलती थी. लेकिन अब सरकार इस पुराने नियम को बदलने जा रही है. सीएम का कहना है कि शहर लगातार फैल रहे हैं और इससे खेती की जमीन खत्म हो रही है. अगर हम शहरों को ऊपर की तरफ बढ़ाएंगे, तो खेती की उपजाऊ जमीन को उजड़ने से बचाया जा सकेगा. इसी सोच के साथ अब गगनचुंबी इमारतों का रास्ता साफ किया गया है.
6 जिलों को जोड़कर बनेंगे सुपर शहर
सरकार सिर्फ इमारतें ही ऊंची नहीं कर रही, बल्कि पूरे शहर का दायरा भी बढ़ाने जा रही है.
मुख्यमंत्री ने साफ किया कि इंदौर-भोपाल के बाद अब जल्द ही जबलपुर और ग्वालियर को भी इस लिस्ट में शामिल किया जाएगा. कॉन्क्लेव में शहरों के बेतरतीब विकास को रोकने पर भी बड़ी चर्चा हुई. मुख्यमंत्री ने कहा कि अब शहरों में अवैध कॉलोनियां काटने का खेल बंद होगा. इसकी जगह पर सरकार आधुनिक और व्यवस्थित टाउनशिप बसाने पर जोर दे रही है. इन टाउनशिप में रहने वाले लोगों को बिजली, पानी और सड़क जैसी बुनियादी सुविधाएं तो मिलेंगी ही, साथ ही वहां रोजगार के साधन भी विकसित किए जाएंगे.
बिजली का बिल आधा करने का नया सोलर फॉर्मूला
इस कॉन्क्लेव में सिर्फ सीमेंट-कंक्रीट की ही नहीं, बल्कि बिजली और पानी की बचत पर भी बात हुई. सरकारी खजाने पर बिजली का बोझ कम करने के लिए सरकार एक नया सोलर फॉर्मूला लेकर आई है. इसके तहत करीब 200 नगर निगम और नगर पालिकाओं को सौर ऊर्जा से जोड़ा जाएगा. इसके लिए पूल्ड म्युनिसिपल बॉन्ड जारी करके फंड जुटाया जाएगा. इसके अलावा बिरसिंहपुर में 1564 करोड़ रुपये की लागत से पानी के ऊपर तैरता हुआ (फ्लोटिंग) बड़ा सोलर प्लांट लगाने की भी तैयारी है. इससे दिन में बनने वाली बिजली को स्टोर किया जाएगा ताकि रात में भी सप्लाई हो सके.
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