विज्ञापन

ईरान vs इजरायल-अमेरिका युद्ध संकट पर मोदी सरकार का मास्टरप्लान, तय हुआ भारत कैसे बचाएगा अपनी इकोनॉमी

ईरान-इजरायल-अमेरिका युद्ध की आंच से भारत को बचाने के लिए कैबिनेट बैठक में लिए गए अहम फैसले. तेल, गैस, एलपीजी और महंगाई पर क्या रणनीति है. सरकार का सॉलिड एक्शन प्लान तैयार.

ईरान vs इजरायल-अमेरिका युद्ध संकट पर मोदी सरकार का मास्टरप्लान, तय हुआ भारत कैसे बचाएगा अपनी इकोनॉमी
सरकार का 3-लेयर एक्शन प्लान- अभी राहत, आगे सुरक्षा और भविष्य की तैयारी
PIB
  • ईरान युद्ध के संभावित असर को देखते हुए सरकार ने सप्लाई बनाए रखने के लिए शॉर्ट, मीडियम, लॉन्ग टर्म प्लान बनाया.
  • किसानों के लिए खाद के वैकल्पिक स्रोत और इंडस्ट्री के लिए नए आयात विकल्प तैयार किए जाएंगे
  • कालाबाजारी रोकने. आम आदमी को राहत के लिए केंद्र-राज्य मिलकर काम करेंगे. ऊर्जा संकट से निपटने की तैयारी भी है.
क्या हमारी AI समरी आपके लिए उपयोगी रही?
हमें बताएं।

पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के बीच भारत सरकार ने अब साफ कर दिया है कि यह सिर्फ विदेश नीति का मामला नहीं है, बल्कि देश की अर्थव्यवस्था, महंगाई, खेती, उद्योग और आम आदमी की जिंदगी से जुड़ा बड़ा संकट है. इसी को ध्यान में रखते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार (22 मार्च 2026) को कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी की अहम बैठक की अध्यक्षता की, जिसमें इस पूरे संकट के भारत पर पड़ने वाले असर और उससे निपटने के लिए व्यापक रणनीति तैयार की गई. बैठक में न केवल वर्तमान स्थिति की समीक्षा हुई बल्कि इसमें शॉर्ट टर्म, मीडियम टर्म और लॉन्ग टर्म एक्शन प्लान पर विस्तार से चर्चा हुई.

सप्लाई चेन की सुरक्षा के लिए शॉर्ट, मीडियम, लॉन्ग टर्म उपाय 

भोजन, ऊर्जा और ईंधन सुरक्षा की उपलब्धता का विस्तृत आकलन किया गया. सरकार ने अल्पकालिक और दीर्घकालिक उपायों के जरिए इनकी निरंतर सप्लाई सुनिश्चित करने का प्लान बनाया है. संकट की गंभीरता को देखते हुए बैठक में कैबिनेट सचिव ने वैश्विक स्थिति का विस्तृत प्रेजेंटेशन दिया. इसमें साफ बताया गया कि यह संघर्ष दुनिया की अर्थव्यवस्था पर अल्पकालिक, मध्यमकालिक और दीर्घकालिक तीनों स्तर पर असर डालेगा. सरकार ने खास तौर पर कृषि, उर्वरक, खाद्य सुरक्षा, पेट्रोलियम, बिजली, एमएसएमई, निर्यात, शिपिंग, सप्लाई चेन, पर  इसके असर का आकलन किया. यानी सरकार ने पूरे सिस्टम को ध्यान में रखते हुए और आम आदमी को केंद्र में रखते हुए अपनी योजना बनाई है, जहां सबसे अधिक जोर इस बात पर है कि जरूरी चीजों की सप्लाई कैसे बचेगी.

बैठक का सबसे बड़ा फोकस था आम आदमी की जरूरत की चीजें न तो महंगी हो, न ही उसकी किल्लत. सरकार ने भोजन, ऊर्जा, ईंधन तीनों की उपलब्धता का विस्तृत आकलन किया. फैसला ये लिया गया कि जरूरी वस्तुओं की लगातार सप्लाई सुनिश्चित करने के लिए शॉर्ट टर्म, मीडियम टर्म और लॉन्ग टर्म तीनों तरह के उपाय किए जाएंगे. इसका मतलब सरकार सिर्फ अभी की नहीं, आने वाले महीनों की तैयारी कर रही है.

ये भी पढ़ें: ईरान के राष्ट्रपति ने पीएम नरेंद्र मोदी से मांगी मदद

Latest and Breaking News on NDTV

Photo Credit: PIB

किसानों को खाद की गारंटी

आगामी खरीफ सीजन के लिए खाद की जरूरतों की समीक्षा की गई. बैठक में तय हुआ कि खाद के स्टॉक की कोई कमी नहीं होगी और भविष्य के लिए वैकल्पिक अंतरराष्ट्रीय स्रोतों पर काम शुरू कर दिया गया है. सरकार खाद संकट से कैसे निपटेगी इस पर बैठक में खास चिंता दिखाई गई. खरीफ सीजन (जून से अक्टूबर) के लिए खाद की जरूरत का आकलन किया गया. देश में पहले से मौजूद खाद भंडार की समीक्षा की गई. बताया गया कि पिछले कुछ सालों के दरम्यान खाद का पर्याप्त स्टॉक बनाया गया है, इसकी वजह से खाद उपलब्धता बनी रहेगी. 

हालांकि खाद की उपलब्धता आगे भी बनी रहे इसे लेकर सबसे अहम फैसला ये लिया गया कि उर्वरकों के वैकल्पिक स्रोत खोजे जाएंगे. यानी अगर मध्य-पूर्व संकट आगे भी बरकरार रहा और इससे सप्लाई चेन पर असर पड़ा तो दूसरे देशों से इसे आयात किया जाएगा ताकि खेती पर इसका नकारात्मक असर कम हो. और इससे भोजन की कीमतों में वृद्धि को नियंत्रित किया जा सके.

ये भी पढ़ें: जंग के सबसे अहम 24 घंटे शुरू! ट्रंप के अल्टीमेटम से पहले होर्मुज खुलेगा या युद्ध और विकराल होगा?

निर्बाध बिजली सप्लाई

देश के सभी पावर प्लांटों में कोयले के पर्याप्त स्टॉक की पुष्टि की गई, ताकि औद्योगिक और घरेलू क्षेत्रों में बिजली की कोई कटौती न हो. भारत में बिजली को लेकर यह भरोसा है कि यहां क्यूबा समेत दुनिया के कई देशों की तरह ब्लैकआउट का खतरा नहीं है. भारत सरकार ने इसे लेकर आश्वासन दिया है कि देश में बिजली की कमी नहीं होगी. इसकी वजह बताई गई है कि यहां सभी पावर प्लांट में पर्याप्त कोयला भंडार मौजूद है. इसका मतलब यह हुआ कि कोयला पर आधारित बिजली जब मौजूद होगी तो गैस के संकट का असर कम होगा. 

ये भी पढ़ें: ट्रंप का दांव पड़ा उल्टा, ईरान की हो रही कमाई! होर्मुज में एक-एक जहाज से 18 करोड़ के टैक्स की वसूली

Latest and Breaking News on NDTV

आयात-निर्यात का नया रूट

केमिकल, फार्मा और पेट्रोकेमिकल सेक्टर्स के कच्चे माल के आयात के लिए नए देशों और स्रोतों की तलाश की जाएगी. वहीं भारतीय सामानों के लिए नए वैश्विक बाजार विकसित किए जाएंगे. सरकार ने माना कि केमिकल, फार्मास्यूटिकल, पेट्रोकेमिकल जैसे सेक्टर सबसे अधिक प्रभावित हो सकते हैं. लिहाजा यह फैसला लिया गया कि जरूरी आयात के स्रोतों में विविधता लाई जाएगी. यानी एक या दो देश पर निर्भरता कम करके नए देशों से सप्लाई ली जाएगी. इससे इस सेक्टर की लागत जहां नियंत्रण में रहेगी वहीं उत्पादन भी नहीं रुकेगा. संकट के बीच सरकार ने एक और बड़ा कदम उठाया. यह तय किया गया है कि भारत नए निर्यात बाजारों की तलाश करेगा. इससे निर्यातकों को राहत मिलेगी तो देश में विदेशी मुद्रा की आय बनी रहेगी.

ये भी पढ़ें: पाकिस्‍तान में हाहाकार, 200% बढ़ी तेल की कीमत... ईरान-इजरायल जंग ने तोड़ी शहबाज सरकार की कमर

सरकार का संपूर्ण नजरिया क्या है?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्पष्ट निर्देश दिया है कि सरकार के सभी अंग मिल कर काम करें. इसके लिए प्रधानमंत्री ने मंत्रियों और सचिवों का एक विशेष समूह बनाने का निर्देश दिया है, जो हर विभाग के साथ मिलकर इस बदलती स्थिति पर पैनी नजर रखेगा. फैसलों को तेजी से लागू करेगा. प्रधानमंत्री ने यह भी स्पष्ट किया है कि अलग-अलग सेक्टर के लिए क्षेत्रीय समूह बनाए जाएं, जो उद्योग, किसान और व्यापारियों समेत सभी स्टेकहोल्डर्स से बात करेंगे. जो भी फैसले लिए जाएंगे वो जमीनी हकीकत से जुड़े होंगे.

इसका मतलब है कि ऊर्जा मंत्रालय, कृषि मंत्रालय, वित्त मंत्रालय, वाणिज्य मंत्रालय, सूक्ष्म-लघु-मध्यम उद्योग, शिपिंग और लॉजिस्टिक्स, सभी विभागों को एक रणनीति के तहत काम करना होगा. क्योंकि तेल महंगा हो चला है, अब अगर भारत में इसकी कीमतें बढ़ीं तो ट्रांसपोर्ट महंगा होगा, जिससे लोगों की थाली तक पहुंचने वाला खाना भी महंगा हो जाएगा. ऐसा न हो या इसका कम से कम असर पड़े इसके लिए सरकार की ओर से समाधान भी सभी अहम विभाग मिलकर बनाएं तब यह असरकारी होगा.

ये भी पढ़ें: ट्रंप ने ईरान में सत्ता विरोधी जनता को दिया धोखा, अब रजा पहलवी ने भी हाथ जोड़े

कालाबाजारी पर सख्त नजर

बैठक में एक बेहद महत्वपूर्ण मुद्दा उठाया गया कि कालाबाजारी और जमाखोरी रोकना है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राज्य सरकारों के साथ समन्वय बिठाने के निर्देश दिए हैं ताकि युद्ध की आड़ में जरूरी वस्तुओं की जमाखोरी या कालाबाजारी न हो सके. साथ ही बाजार पर भी नजर रखने को कहा गया है. यह इसलिए जरूरी है क्योंकि संकट के समय कीमतें और बढ़ती हैं तो सरकार यह सुनिश्चित करना चाहती है कि लोगों तक जरूरी सामान आसानी और निम्नतम कीमत तक पहुंचे. 

कुल मिलाकर सरकार ने ईरान vs इजरायल- अमेरिका युद्ध से आर्थिक संकट की संभावना को देखते हुए मैक्रो इकोनॉमिक स्तर पर तैयारी की है. इसमें सप्लाई चेन से लेकर महंगाई और ग्रोथ सभी का आकलन किया गया है. इस बैठक में सरकार ने अपनी प्राथमिकता आम आदमी को इसकी आंच से बचाने का रखा है. हालांकि यह युद्ध अगर लंबा चला तो आर्थिक दबाव बढ़ सकता है जिसे देखते हुए ही सरकार ने ये संकेत भी दिए हैं कि जरूरत पड़ने पर और कदम उठाए जाएंगे.

ये भी पढ़ें: ईरान vs इजरायल-अमेरिका युद्ध- अब नेता नहीं जनता निशाने पर, बिजली पानी बंद होने का डर

NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं

फॉलो करे:
Listen to the latest songs, only on JioSaavn.com